बॉक्स ऑफिस पर शुक्रवार को महासंग्राम देखने को मिला है और तीन बड़ी फिल्में एक-दूसरे से भिड़ती नजर आ रही हैं। इनमें रश्मिका और विजय की 'रणबाली', यामी गौतम की 'नई नवेली' और राजकुमार राव की 'प्रहार' शामिल हैं। इस क्लैश में सबसे खास बात यह है कि तीनों फिल्में अलग-अलग जॉनर की हैं। राजकुमार राव और वामिका गब्बी स्टारर 'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्जवल निकम' में 26/11 के हमलों के बाद आंतकी कसाब को फांसी तक पहुंचाने की कानूनी लड़ाई दिखाई गई है, जो कोर्टरूम में हुई थी और वकील उज्जवल निकम ने लड़ी थी। फिल्म में राजकुमार राव इन्हीं का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में राजकुमार राव की एक्टिंग कैसी है, इसकी खूबियां और खामियां क्या हैं और क्या यह फिल्म देखनी चाहिए, इन सारे सवालों का जवाब आपको इस रिव्यू में मिल जाएगा।
Prahaar मूवी रिव्यू
| स्टारकास्ट | राजकुमार राव, वामिका गब्बी, जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर, ललित प्रभाकर |
| जॉनर | बायोपिक, थ्रिलर और ड्रामा |
| डायरेक्टर | अविनाश अरुण |
| अवधि | 2 घंटा 20 मिनट |
| हमारी रेटिंग | 2.5 |
| देखें या नहीं देखें? | राजकुमार राव की एक्टिंग पसंद है और सच्ची घटनाओं पर बनी कहानियां अच्छी लगती हैं, तो इसे एक बार देखा जा सकता है। |
Prahaar फिल्म की कहानी क्या है?
इस कहानी की शुरुआत 26/11 के हमले से होती है। इन हमलों में आतंकी अजमल कसाब (ललित प्रभाकर को जिंदा पकड़ा गय था, लेकिन उसका जुर्म साबित करना और उसे फांसी के फंदे तक पहुंचाना बिल्कुल आसान नहीं था। उस वक्त देश के जाने-माने सरकारी वकील उज्ज्वल निकम (राजकुमार राव) ने कोर्टरूम में यह कानूनी लड़ाई लड़ी थी। कसाब कभी अपने मुंबई आने की वजह कुछ और बताता, तो कभी अपनी उम्र को लेकर झूठ बोलता और कहता कि वह 18 साल का नहीं है, ऐसे में कहानी और पेचीदा होती जाती है। उज्जवल निकम की जिंदगी अदालत के इर्द-गिर्द घूमती है और इसके चलते वह कहीं न कहीं अपने परिवार से दूर हो गए हैं, यह भी इस कहानी में दिखाया गया है। फिल्म में वामिका गब्बी उनकी पत्नी का रोल निभा रही हैं। वहीं बचाव पक्ष के वकील अब्बास काजमी (सिकंदर खेर) हैं। उज्जवल निकम अपने कर्तव्य और परिवार के बीच संतुलन बनाकर कैसे कसाब को फांसी तक पहुंचाते हैं, यह कहानी इसी के इर्द-गिर्द घूमती है।
Prahaar का स्क्रीनप्ले और निर्देशन कैसा है?
फिल्म का विषय बहुत गंभीर है, ऐसे में कहानी और स्क्रीनप्ले में इस बात का ध्यान रखा गया है। फिल्म की कहानी बेशक दमदार है, लेकिन इसे दिखाने का अंदाज बेहतर हो सकता था। फिल्म का फर्स्ट हाफ काफी स्लो है और इसमें सीधे कोर्टरूम ड्रामा दिखाया गया है और ऐसे में आपको शुरू से फिल्म के साथ जुड़ने में मुश्किल आ सकती है। अविनाश अरुण धवारे की इस कहानी में कहीं न कहीं इमोशनंस मिसिंग हैं। सेकंड हाफ पहले से बेहतर है, लेकिन ओवरऑल इस फिल्म से बंधे रहने में आपको मुश्किल हो सकती है।
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Prahaar में राजकुमार राव की एक्टिंग कैसी है?
राजकुमार राव के बारे में कहा जाता है कि वह जब भी पर्दे पर किसी किरदार को निभाते हैं, तो उसे पूरी तरह जीते हैं और अपना बना लेते हैं और यहां भी यही देखने को मिला है। राजकुमार राव ने खुद को उज्जवल निकम के रोल में बखूबी ढाला है। 26/11 का गुस्सा हो, इंसाफ की तड़प हो या कानूनी लड़ाई में मुश्किल आने का दर्द हो, राजकुमार ने हर इमोशन को जिया है। वामिका गब्बी ने भी शानदार काम किया है। इन दोनों के अलावा जयदीप अहलावत और सिकंदर खेर का काम भी शानदार है।
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