संगीत की कोई सीमा नहीं होती है और सुरों को किसी देश या सरहद में नहीं बांधा जा सकता है। इसका सबसे बड़ा जीता जागता उदाहरण है 80 के दशक का वो मशहूर गाना, जिसे सुनकर आज भी दिल भर आता है। गाने का नाम है 'लंबी जुदाई'। यह गाना फिल्म हीरो का है जो कि 1983 में रिलीज हुआ था।
यह दर्दभरा गाना सिर्फ एक म्यूजिक ट्रैक नहीं है बल्कि भारत और पाकिस्तान के बीच जुड़ी संस्कृति का एक ऐसा नगीना है, जो 40 साल बाद भी हर किसी की प्लेलिस्ट में छाया हुआ है। इसके बोल तो ऐसे हैं जिसे सुनकर दिल भर आता है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि जैकी श्रॉफ और मीनाक्षी शेषाद्रि पर फिल्माया गया यह गाना असल में बॉलीवुड के लिए नहीं लिखा गया था? इसके पीछे पाकिस्तान के लोकसंगीत (फोक म्यूजिक) का एक बहुत ही दिलचस्प इतिहास है। आइए इसके बारे में जानते हैं विस्तार से-
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पाकिस्तान की मिट्टी से उठी थी वो सुरीली आवाज
'लम्बी जुदाई' मूल रूप से पाकिस्तान का एक मशहूर लोकगीत है। इसे सबसे पहले पाकिस्तान की मशहूर लोक गायिका रेशमा ने अपनी खास और भारी आवाज में गाया था। पाकिस्तान के रेडियो और लोकल कार्यक्रमों में यह गाना पहले से ही बहुत पॉपुलर था। रेशमा के गाने के ठेठ देहाती और सच्चे अंदाज ने इस गाने में बिछड़ने के दर्द को इस तरह भरा कि यह सीधे दिल को छू जाता था।
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सुभाष घई की नजर और रेशमा जी का भारत आना
80 के दशक की शुरुआत में जब जाने-माने डायरेक्टर सुभाष घई अपनी फिल्म 'हीरो' बना रहे थे, तब उन्होंने रेशमा की आवाज में यह गाना सुना। गाने की धुन और रेशमा की आवाज का जादू सुभाष घई के सिर चढ़ गया। उन्होंने तुरंत डिसाइड कर लिया कि यह गाना उनकी फिल्म का सबसे खास और इमोशनल हिस्सा बनेगा। सुभाष घई ने रेशमा से संपर्क किया और उनसे गाने के लिए निवेदन किया।
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लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और आनंद बक्शी का जादू
जब फिल्म 'हीरो' के लिए इस गाने को दोबारा रिकॉर्ड किया गया, तो इसकी पुरानी धुन को वैसा ही रखा गया था।
- संगीत: मशहूर संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने गाने की असली रूह को बदले बिना इसमें शानदार वायलिन और म्यूजिक का तड़का लगाया।
- बोल: जाने-माने गीतकार आनंद बक्शी ने इसके शब्दों को हिंदी फिल्मों के हिसाब से लिखा।
इस तरह से बॉलीवुड सिनेमा का ये कालजयी सैड सॉन्ग बनकर तैयार हुआ था, जिसे आज भी लोग खूब पसंद करते हैं। वैसे देखा जाए तो पाकिस्तानी लोकगायिका रेशमा ने बॉलीवुड में कुछ और भी गीत गाए हैं लेकिन ‘लंबी जुदाई’ की बात ही कुछ और थी।
पाकिस्तान नहीं, भारत में जन्मीं थीं रेशमा
आपको बता दें कि गायिका रेशमा को 'रेगिस्तान की कोकिला' (Nightingale of the Desert) की उपाधि भी दी गई थी। इसका कारण उनका जन्मस्थान राजस्थान का बीकानेर क्षेत्र था, जहां वे एक बंजारा परिवार में जन्मी थीं। साल 1947 में राजस्थान के एक बंजारा (खानाबदोश) परिवार में ही रेशमा का जन्म हुआ था। हालांकि, बंटवारे के बाद उनका परिवार पाकिस्तान के कराची जाकर बस गया था।
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