आज के समय में बच्चों को पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ पैसे की सही समझ देना भी बेहद जरूरी है। अक्सर माता-पिता को लगता है कि बच्चे अभी बहुत छोटे हैं, वे पैसों के बारे में क्या समझेंगे? मगर सच यह है कि पैसों की कद्र न सीखने पर बच्चे बड़े होकर फिजूलखर्च करते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल आता है कि बच्चों को इस बारे में कब समझाएं? तो आज का यह लेख आपके लिए है। कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत से जानिए बच्चों को किस उम्र में और किन आसान तरीकों से पैसों की सही समझ दी जा सकती है, जिससे वे आगे चलकर जिम्मेदार नागरिक बन सकें।
बच्चे को पैसों के बारे में किस उम्र में समझाएं?
बच्चा जैसे ही गिनती सीखने लगे या बाजार में सामान और पैसों के लेन-देन को समझने लगे, तभी से उन्हें पैसों के बारे में समझाना शुरू कर देना चाहिए। यह कोई मुश्किल काम नहीं है बल्कि आप रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातों और आदतों के जरिए खेल-खेल में उन्हें यह सिखा सकती हैं। सबसे पहले उन्हें सिक्कों और नोटों की पहचान कराना सिखाएं।
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बच्चों को पैसे की कैसे दें सीख?
बच्चों को ट्रांसपेरेंट गुल्लक लाकर दें, जिससे वे अपनी बचत को आंखों के सामने बढ़ता हुआ देख सकें। उन्हें समझाएं कि जब वे इसमें पैसे बचाएंगे, तभी अपनी पसंद का कोई खिलौना खरीद पाएंगे। साथ ही उन्हें यह बताना बहुत जरूरी है कि कौन सी चीज हमारी जरूरत है और कौन सी चीज सिर्फ हमारी चाहत है। बाजार जाते समय उन्हें कहें कि आज हम सिर्फ जरूरत का सामान खरीदेंगे।
पॉकेट मनी का मतलब बताएं
बच्चा जैसे 8-10 साल का हो, तो उसे हफ्ते या महीने की एक छोटी और बंधी हुई पॉकेट मनी दें। उन्हें खुद तय करने दें कि उन्हें यह पैसा कब और कहां खर्च करना है। अगर वे सारे पैसे एक ही दिन में खत्म कर देते हैं, तो उन्हें दोबारा पैसे न दें ताकि उन्हें अपनी गलती का एहसास हो।
खरीदारी में शामिल करें
जब आप राशन या घर का सामान खरीदने जाएं, तो बच्चों को साथ ले जाएं। साथ ही अगर बच्चा बड़ा है, तो उन्हें 500 रुपये दें और हफ्ते भर की सब्जियां लाने के लिए बोलें। फिर उन्हें कीमतों की तुलना करना सिखाएं कि कौन सा सामान बजट में आ रहा है और कौन सा महंगा है?
पैसे मेहनत से आते हैं इसकी अहमियत समझाएं
बच्चों को समझाएं कि एटीएम या फोन पे, गूगल पे से पैसे जादू से नहीं आते हैं। यह रोज ऑफिस में कड़ी मेहनत करने से आते हैं। कभी-कभी घर के छोटे-मोटे एक्स्ट्रा कामों के बदले उन्हें छोटे इनाम दें, जिससे वे समझें कि पैसा मेहनत से आता है।
ना सुनना सिखाएं
आज के समय में माता-पिता बच्चों के शौक बच्चों के शौक पूरे करने के हर संभव कोशिश करते हैं। अगर आप भी ऐसा करती हैं, तो यह गलत है। बच्चे की हर जिद को तुरंत पूरा न करें। अगर कोई चीज बजट से बाहर है या गैर-जरूरी है, तो प्यार से नहीं कहना और सुनना सिखाएं। साथ ही उन्हें इसका कारण बताएं।
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अगर आपका बच्चा छोटा है और अभी से उसे पैसों की अहमियत सीखाना चाहती हैं,तो ये एक्सपर्ट के बताए गए तरीके आजमा सकती हैं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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