अगर आप नया फ्लैट या मकान खरीदने के लिए होम लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें। यह आपके लिए अनुकूल समय है, क्योंकि कोविड के बाद अब प्रॉपर्टी मार्केट में खरीद-बिक्री का सिलसिला शुरू हो गया है। अगर आप इसके लिए होम लोन लेना चाहते हैं, तो आवेदन करने से पहले धैर्यपूर्वक इससे जुड़ी कुछ बारीकियों को समझना जरूरी है, अन्यथा फायदा होने के बजाय नुकसान भी हो सकता है। यहां सेबी पंजीकृत वित्तीय सलाहकार आर.के. पोपली बता रहे हैं कि होम लोन लेते समय आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
क्या है एमसीएलआर?
मार्जिनल कॉस्ट-बेस्ड लेंडिंग रेट यानी एमसीएलआर होम लोन के संदर्भ में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित नई बेंचमार्क दर है। इसका फायदा केवल उन्हीं ग्राहकों को मिलता है, जो फ्लोटिंग ब्याज दर का चुनाव करते हैं। एमसीएलआर श्रेणी वाले होम लोन में अपना लोन किसी दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का विकल्प मौजूद होता है। अगर आपको लगता है कि मौजूदा बैंक से लिया गया लोन महंगा पड़ रहा है, तो सस्ते दर पर लोन देने वाले बैंक में होम लोन ट्रांसफर कर सकते हैं।
चूंकि होम लोन की रकम बहुत ज्यादा होती है, ऐसे में 1 प्रतिशत के फर्क से भी अच्छी-खासी बचत हो जाती है। अगर आपने 20 लाख रुपये का होम लोन लिया है, तो ब्याज दर में 1 प्रतिशत की कमी होने पर सीधे 20 हजार रुपये सालाना की बचत होती है। ऐसे में अगर थोड़ी रकम प्रोसेसिंग शुल्क में भी खर्च होती है, तब भी यह घाटे का सौदा नहीं है।
क्रेडिट स्कोर का रखें ध्यान
क्रेडिट कार्ड के बिल, शॉपिंग या किसी अन्य लोन की ईएमआई की किस्तों का भुगतान सही समय पर करें। इससे आपको अपना क्रेडिट स्कोर सुधारने में मदद मिलेगी। आजकल अधिकतर बैंक क्रेडिट स्कोर के आधार पर लोन देने का फैसला करते हैं, क्योंकि इसी के आधार पर बैंक ग्राहकों की विश्वसनीयता का आकलन करते हैं।
अगर किसी व्यक्ति का क्रेडिट स्कोर अच्छा हो, तो बैंक आसान शर्तों पर लोन देने को तैयार होते हैं और ब्याज दरों में थोड़ी रियायत भी दे सकते हैं। आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है, तो बैंक से मोलभाव जरूर करें। इससे आपको प्रोसेसिंग फीस में छूट मिल सकती है। अच्छे क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों को बैंक प्री-अप्रूव्ड लोन भी देते हैं। ऐसी स्थिति में आप बिल्डर से भी अच्छी तरह मोलभाव कर सकते हैं।
लोन ट्रांसफर करने का निर्णय
होम लोन लेते समय फ्लोटिंग ब्याज दर का चुनाव करें, ताकि किसी दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का विकल्प खुला रहे। यदि आपके लोन की अवधि 10 साल से ज्यादा बची हो, तो होम लोन ट्रांसफर करने पर फायदा मिल सकता है। लेकिन जब लोन चुकता होने में केवल दो-चार साल ही बचे हों, तो कोई बदलाव नहीं करना चाहिए, क्योंकि प्रोसेसिंग फीस के कारण बचत से ज्यादा खर्च हो जाएगा। इसलिए किसी दोस्त या रिश्तेदार की बातों में आकर निर्णय न लें, बल्कि किसी सेबी पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से परामर्श करने के बाद ही कोई कदम उठाएं।
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होम लोन लेते समय ध्यान रखने योग्य जरूरी बातें
प्रॉपर्टी का चुनाव पहले करें: यदि आप प्रॉपर्टी का चुनाव पहले करते हैं, तो आपके पास बैंकों के कई विकल्प होंगे और सबसे सस्ती ब्याज दर पर लोन मिल सकता है।
डाउन पेमेंट तैयार रखें: जरूरत के समय पैसों का इंतजाम न हो पाने से परेशानी झेलनी पड़ती है, इसलिए डाउन पेमेंट की राशि पहले से ही जुटा कर रखें।
बाजार की पड़ताल करें: बिल्डर के कहने पर बिना सोचे-समझे उसके द्वारा सुझाए बैंक से लोन फाइनेंस न करवाएं। पहले जांचें कि किस बैंक में ब्याज दर सबसे कम है।
होम लोन इंश्योरेंस लें: होम लोन इंश्योरेंस आपके परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में परिवार पर किस्तों का बोझ न पड़े।
दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें: लोन के दस्तावेजों पर छोटे अक्षरों में लिखी गई शर्तों और जानकारियों को ध्यान से पढ़ने के बाद ही उन पर हस्ताक्षर करें।
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