सेवानिवृत्ति को लोग प्राय: एक निश्चित उम्र से जोड़कर देखते हैं, पर वास्तव में यह आपकी आर्थिक आवश्यकताओं के आकलन व उन्हें पूरा करने की तैयारी से जुड़ा विषय है। बीते दिनों बहुत सी पाठिकाओं ने इसे लेकर मुझसे अपनी भावनाएं साझा की। आपमें से कुछ पाठिकाएं 55 वर्ष के करीब होंगी और हाल ही में इस स्तंभ से आपका जुड़ाव हुआ। कुछ स्कूल टीचर, होममेकर होंगी, जिनके पतियों ने कुछ समय पूर्व ही काम-धंधा बंद किया, तो वहीं कुछ महिलाएं ऐसी भी होंगी जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी घर संभालते हुए बिता दी। अब उनके मन में अपने भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का विचार आता होगा, जबकि 30 या 40 की आयुवर्ग के पड़ाव पर मौजूद महिलाएं ये सोचती होंगी कि सेवानिवृत्ति की योजना के लिए अभी समय है।

ये स्तंभ आप सभी के लिए है। खासकर उन लोगों के लिए जो ये सोचती हैं अभी उनका समय नहीं आया है, क्योंकि सेवानिवृत्ति की योजना के लिए सबसे महत्वपूर्ण ये नहीं होता कि कौन से निवेश का चयन कर रहे हैं या कितना रिटर्न मिल रहा है, बल्कि उसमें समय का महत्व सबसे अधिक होता है। आयु जितनी कम होगी उतना ही ज्यादा समय आपको मिलेगा। सेवानिवृत्ति की योजना पर काम करने के लिए सबसे उपयुक्त समय वो था जब आपको पहली सैलरी मिली थी, उसके बाद सबसे अच्छा समय वर्तमान है।

कैसे करें शुरुआत?

इस संबंध में एक सवाल से शुरुआत करनी चाहिए, जिसकी बहुत से लोग अनदेखी कर जाते हैं: वास्तव में मुझे सेवानिवृत्ति पर कितने धन की आवश्यकता होगी।

इस बात पर विचार करें कि एक अच्छी जिंदगी जीने के लिए आपको मासिक कितने धन की आवश्यकता होती है, इसमें घरेलु खर्च, खाने-पीने व अन्य उपयोग की वस्तुओं, बिजली, स्कूल फीस, दवाइयों व अन्य उपभोग के खर्चों को शामिल करें। एक अहम बात को प्राय: लोग नजरअंदाज कर जाते हैं। मान लेते हैं कि इन सब चीजों पर 40 हजार रुपये राशि खर्च होते हैं, पर 20 वर्ष बाद ये राशि पर्याप्त नहीं होगी। यदि छह प्रतिशत की दर से महंगाई बढ़ती है तो यह आगे चलकर आपको मासिक एक लाख 28 हजार रुपये की आवश्यकता होगी। वर्तमान लाइफस्टाइल बनाए रखने के लिए दो दशक बाद आपको इतनी धनराशि की जरूरत होगी। सेवानिवृत्ति के करीब 25 वर्ष तक यही लाइफस्टाइल बनाए रखने के लिए आपको तीन-चार करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी।

इतनी बड़ी राशि की चर्चा हम आपको डराने के लिए नहीं कर रहे। इसका आशय सिर्फ इतना है कि आपको एक लक्ष्य लेकर चलने की आवश्यकता है। उसी अनुसार आप योजना बना सकती हैैं। ये न हो तो आप बस उम्मीदों में रह जाते हैं।
इस स्तंभ में अब हम उन बातों की चर्चा करेंगे, जो विशेषकर महिलाओं के लिए महत्व रखती हैं।

एनपीएस राशि जोड़ने की प्रक्रिया पर असर

भारतीय महिलाओं की औसत आयु पुरुषों से तीन साल अधिक होती है। वर्ष 2024 में भारत में पुरुषों की जीवन प्रत्याशा 71 वर्ष थी, जबकि महिलाओं की जीवन प्रत्याशा 74 वर्ष रही। इस अंतर का अर्थ है कि जमा धनराशि इतनी होनी चाहिए कि महिलाओं की आवश्यकता को अधिक समय तक पूरा कर सके। यानी उन्हें अपनी सेवानिवृत्ति की योजना को आगे बढ़कर स्वयं संभालना होगा। इसके लिए किसी अन्य व्यक्ति की जीवन प्रत्याशा के अनुरूप बनी योजना पर वह निर्भर नहीं हो सकतीं। सेवानिवृत्ति की योजना में लोग एक अन्य वास्तविकता की अनदेखी कर जाते हैं। महिलाएं करियर में ब्रेक लेती हैं। बच्चों के जन्म, पालन-पोषण, शादी के बाद स्थानांतरण या परिवार में किसी सदस्य की बीमारी के कारण उन्हें ब्रेक लेना पड़ता है। इस ब्रेक के साथ ही ईपीएफ योगदान पर भी ब्रेक लग जाता है। एसआइपी की निरंतरता प्रभावित होती है, एनपीएस राशि जोड़ने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ता है। यदि कोई महिला अपने करियर में दो वर्ष अवधि का तीन बार ब्रेक लेती है, तो उसे आय पर मिलने वाले चक्रवृद्धि ब्याज में ये छह वर्ष घट जाएंगे, जबकि निर्बाध नौकरी करने वाले पुरुषों के साथ ऐसा नहीं होता। इसे संतुलित करने के लिए महिलाओं को शुरुआत करनी चाहिए। जब आप काम कर रही हों तो थोड़ा अधिक निवेश करें। जब भी ब्रेक लें और आय प्रभावित हो, तब भी उस राशि को न छेड़ें जो सेवानिवृत्ति के लिए जोड़ रही हैं।

अब विचार करें कि आप सेवानिवृत्ति की ओर किस प्रकार बढ़ेंगी।

जो लोग 20 वर्ष या 30 वर्ष के आयुवर्ग के पड़ाव पर है, उनके लिए इक्विटी अच्छा विकल्प है। डाइवर्सीफाइड इक्विटी फंड्स या इंडेक्स फंड्स में एसआइपी यदि शीघ्र शुरू कर देती हैं और हर साल आय बढ़ने के साथ ही उसकी राशि में वृद्धि करती हैं तो यह आपको आर्थिक मजबूती दे सकता है। आपकी सैलरी से जो ईपीएफ कटता जाता है, उससे एक बड़ी धनराशि खड़ी हो जाती है। उसमें नामिनी को अपडेट रखें। यदि नौकरी बदलती हैं तो ईपीएफ राशि निकालने के बजाय अकाउंट स्थानांतरित करवाएं। यदि आप नौकरी के शुरूआती वर्षों में ईपीएफ से कुछ लाख ही निकालती हैं तो भी रिटारयमेंट के समय मिलने वाली राशि में बड़ा फर्क आ जाएगा, क्योंकि उसमें आपको चक्रवृद्धि ब्याज मिलता है। एनपीएस (नेशनल पेंशन स्कीम) में 80 सी मद से आगे अतिरिक्त टैक्स लाभ मिलते हैं। साथ ही लंबे समय में निवेश को लेकर एक अनुशासन बनता है।

जो लोग उम्र के 40वें पड़ाव पर हैं, उन्हें भी इक्विटी निवेश की आवश्यकता हो सकती है। 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति का अर्थ है कि जोड़ी गई धनराशि करीब 85 वर्ष आयु या अधिक समय तक आपके काम आ सके। यदि इस पड़ाव पर पूरी तरह से फिक्स्ड डिपाजिट्स पर निर्भर होती हैं तो आगामी दिनों में जीवनयापन को सुगम बनाने के लिए आपका धन तेजी से नहीं बढ़ेगा। इसलिए इक्विटी में एक समुचित राशि निवेश करें। इस पर ध्यान दें कि आपकी कार्ययोजना क्या है और आपको कितने धन की आवश्यकता होगी। दोनों के मध्य जो अंतर आएगा, उसे ही आपको अपना बचत लक्ष्य बनाना है।

जो लोग आयु के 50वें पड़ाव पर हैं या सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उन्हें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि उनका धन लंबे समय तक बना रहे और समुचित धनराशि भी अर्जित होती रहे। इसके लिए बैलेंस्ड म्यूचुअल फंड्स से सिस्टेमैटिक विद्ड्रावल प्लान (धनराशि की निकासी) पर काम करना चाहिए, इस प्रकार आप एक निश्चित राशि मासिक निकाल सकेंगी जबकि शेष राशि उसमें ही रहेगी और उसमें वृद्धि जारी रहेगी। सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम में सामान्यत: अधिकांश फिक्स्ड डिपाजिट्स के मुकाबले प्रत्येक तिमाही पर मिलने वाले ब्याज की दर आधिक होती है। ये वरिष्ठ नागरिकों के हित में सरकार द्वारा समर्थित उपाय है। पोस्ट आफिस मंथली इनकम स्कीम एक अन्य विश्वसनीय विकल्प है। इस आयु में सर्वाधिक लाभ के बजाय आपका लक्ष्य होना चाहिए कि बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए सतत आय होती रहे।

एक बात का खयाल जीवन के प्रत्येक पड़ाव पर रखना चाहिए। एक महिला की सेवानिवृत्ति योजना उसके नाम पर होनी चाहिए, उसका अपना अकाउंट, अपना फोलियो हो। वो जाइंट अकाउंट नहीं होना चाहिए, जिसमें अन्य किसी के हस्ताक्षर की आवश्यकता हो। ऐसा प्लान भी न हो, जिसकी कागजी कार्यवाई आपके पति ने संभाली हुई हो, क्योंकि यदि अपनी सेवानिवृत्ति योजना व उसके लिए जोड़ी जाने वाली धनराशि तक आपकी पहुंच नहीं है तो वो आपकी तैयारी नहीं, बल्कि निर्भरता कहलाएगी।

इस हफ्ते दो अंक लिखें। पहला, आपका वर्तमान मासिक खर्च क्या है। दूसरा, सेवानिवृत्ति के समय आपको अनुमानित प्रतिमाह कितने धन की आवश्यकता होगी, इसमें महंगाई खर्च को भी शामिल करें। दोनों के मध्य अंतर की गणना करें। जो संख्या प्राप्त होगी, उसका गुणन सेवानिवृत्ति तक पहुंचने में शेष बचे वर्ष से करें, इस प्रकार जो अंक निकलकर आएगा, वह उपयोगी आंकड़ा साबित हो सकता है। इसके बाद आप उपरोक्त जानकारियों के आधार पर सेवानिवृत्ति की कार्ययोजना पर काम कर सकती हैं।

अगले हफ्ते हम सेवानिवृत्ति के उस पहलू की चर्चा करेंगे, सामान्यत: लोग जिसकी अनदेखी कर जाते हैं, पर समय आने पर सामना करना ही पड़ता है। ये पहलू जुड़ा है स्वास्थ्य से। कुछ भी गलत हो जाए तो उसका हर्जाना स्वास्थ्य को भुगतना पड़ता है।
वर्तमान में सही निर्णय लेकर आप अपने भविष्य को सबसे बड़ा उपहार दे सकती हैं।

यदि आपके मन में अर्थ से जुड़े कोई सवाल हों तो हमें लिखें-iamolaxmi@gmail.com

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Images: magnific