टैक्स को लेकर बुनियादी समझ विकसित करना अति आवश्यक है। पिछले स्तंभ में हमने इस संबंध में बुनियादी बातों की चर्चा की थी। नौकरी से अर्जित आय और निवेश, दोनों पर टैक्स के नियम भिन्न होते हैं। जब आप कोई निवेश बेचते हैं और उससे जो लाभ अर्जित करते हैं, उसे 'कैपिटल गेन' (पूंजीगत लाभ) कहा जाता है। आपको संपूर्ण निवेश राशि पर नहीं, बल्कि केवल कैपिटल गेन पर टैक्स देना पड़ता है। इस टैक्स की दर कितनी होगी, यह दो बातों पर निर्भर करता है—निवेश किस प्रकार का है और उसे आपने कितने समय तक अपने पास रखा है।
इस हफ्ते हम उन निवेशों की चर्चा करेंगे जो सामान्यतः भारतीय घरों में किए जाते हैं। आप कुछ भी खरीदने या बेचने का निर्णय लें, उससे पहले टैक्स की दरों व नियमों के बारे में जान लेना चाहिए।
इक्विटी म्यूचुअल फंड्स और शेयर्स में बहुत से लोग बड़ी राशि निवेश करते हैं। इनके विषय में बीते दो वर्षों में टैक्स के नियमों में काफी बदलाव आया है, जिसे ठीक तरीके से जानना उचित होगा।
यदि आप इक्विटी म्यूचुअल फंड्स या शेयर्स 12 माह या उससे कम अवधि तक अपने पास रखने के बाद बेचते हैं, तो अर्जित लाभ को 'शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन' कहा जाएगा और उस पर 20 प्रतिशत टैक्स लगेगा। यह दर वर्ष 2024 के बजट में 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत की गई थी। यदि आपने इन्हें 12 माह से अधिक अवधि तक अपने पास रखा है, तो उससे अर्जित लाभ 'लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन' कहलाएगा और उस पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगेगा। यह दर भी उसी बजट में 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत की गई थी।
यहां पर टैक्स में कुछ राहत भी प्रदान की गई है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर सवा लाख (1.25 लाख) रुपये तक की राशि को टैक्स मुक्त रखा गया है। इस सीमा से अधिक लाभ होने पर ही 12.5 प्रतिशत टैक्स देय होता है।
यदि आप कोई SIP कई साल चलाने के बाद बेचना चाहते हैं, तो अर्जित लाभ 'लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन' कहलाएगा। उसमें सवा लाख रुपये तक का लाभ टैक्स मुक्त होगा, जबकि उससे अधिक धनराशि पर 12.5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगेगा। बहुत से निवेशकों को यह दर उनकी सैलरी पर लगने वाले टैक्स से कम ही प्रतीत होगी।
डेट म्यूचुअल फंड्स के नियमों में वर्ष 2023 के बाद से काफी बदलाव आया है। मार्च 2023 तक यह नियम था कि अगर आपने तीन साल से अधिक समय तक डेट म्यूचुअल फंड्स को अपने पास रखा है, तो उससे अर्जित लाभ 'लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन' में शुमार किया जाता था। इस प्रकार टैक्स में कुछ राहत मिलती थी, पर अब उसे समाप्त कर दिया गया है। वर्तमान नियम के अनुसार, डेट फंड्स पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुरूप टैक्स देय होता है। अब इससे फर्क नहीं पड़ता कि उसे आपने कितने समय तक पास रखा है; चाहे आप उसे एक साल रखें या दस साल, अर्जित लाभ पर टैक्स आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार ही लगेगा। इस तरह डेट फंड्स को भी टैक्स के मामले में फिक्स्ड डिपॉजिट्स (FD) की श्रेणी में ही रखा जाएगा। यही वजह है कि आजकल लोग डेट फंड्स को टैक्स लाभ के बजाय 'लिक्विडिटी' (नकदी की सुलभता) के पहलू के कारण पसंद करते हैं।
फिक्स्ड डिपॉजिट्स पर अर्जित लाभ पर हमेशा से इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देय रहा है। यहाँ शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म से फर्क नहीं पड़ता। यदि FD पर आपको सालाना 50 हजार का ब्याज लाभ मिल रहा है और आप 20 प्रतिशत टैक्स के दायरे में आती हैं, तो ब्याज राशि पर दस हजार रुपये टैक्स पड़ेगा।
पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) को टैक्स बचत के लिहाज से बेहद उपयोगी माना जाता है। इस मद में आप सालाना डेढ़ लाख रुपये तक की राशि निवेश कर सकती हैं, जिसे धारा 80C के तहत छूट मिलती है। इसकी मैच्योरिटी राशि पर टैक्स नहीं लगता। इसके तिहरे लाभ हैं—निवेश की गई राशि, उस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि, तीनों ही टैक्स मुक्त रहते हैं। यही वजह है कि PPF पर करीब 7.1 प्रतिशत की ब्याज दर लोगों को आकर्षित करती है। जो लोग उच्च इनकम टैक्स स्लैब में आते हैं, वे इस मद में निवेश करके टैक्स की बचत कर सकते हैं क्योंकि उन्हें रिटर्न पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता।
गोल्ड के नियमों को भी भली-भांति समझना चाहिए। आप उसे किस रूप में और कितनी अवधि तक पास रखती हैं, इस पर बहुत कुछ निर्भर करता है। भौतिक (फिजिकल) रूप में या गोल्ड म्यूचुअल फंड्स के रूप में यदि इसे कम से कम 24 माह तक पास रखती हैं, तो यह लॉन्ग टर्म निवेश के दायरे में आएगा। गोल्ड ETF शेयर बाजार में सूचीबद्ध (listed) होते हैं, इसलिए इक्विटी की भांति इनमें 12 माह तक निवेश जारी रखने पर ही यह लॉन्ग टर्म निवेश के दायरे में आ जाता है। सभी मामलों में गोल्ड पर लॉन्ग टर्म निवेश से होने वाली आय पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगेगा, जबकि शॉर्ट टर्म गेन पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देय होगा।
सोवरन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) उनके लिए हैं जो सही समय की प्रतीक्षा में लंबे समय तक उन्हें अपने पास सुरक्षित रखते हैं। यदि सोवरन गोल्ड बॉन्ड्स को 8 साल की मैच्योरिटी अवधि तक अपने पास रखते हैं, तो कैपिटल गेन पूर्णतः टैक्स मुक्त हो जाएगा। यदि मैच्योरिटी से पहले इसे बेचते हैं, तो लाभ पर गोल्ड ETF की भांति ही टैक्स लगेगा।
रियल एस्टेट के नियम अलग होते हैं। प्रॉपर्टी को यदि आपने 24 माह से कम अवधि तक पास रखा है, तो वहां शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन का नियम लागू होगा और अर्जित लाभ पर इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा। यदि प्रॉपर्टी को 24 माह से अधिक अवधि तक पास रखा गया है, तो उससे अर्जित लाभ पर 12.5 प्रतिशत टैक्स अथवा मुद्रास्फीति के अनुसार संपत्ति की खरीद लागत को समायोजित करने की प्रक्रिया (इंडेक्सेशन) के आधार पर 20 प्रतिशत टैक्स—दोनों में से जो भी कम हो—देय होगा। यदि आपने 23 जुलाई 2024 से पहले कोई प्रॉपर्टी खरीदी है, तो आपके पास उसे बेचने पर हुए लाभ पर 12.5 प्रतिशत या इंडेक्सेशन के अनुरूप 20 प्रतिशत में से जो भी कम हो, वह चुनने का विकल्प होगा। हालांकि, उक्त तिथि के उपरांत खरीदी गई प्रॉपर्टी पर केवल 12.5 प्रतिशत टैक्स का ही नियम लागू होगा।
कुछ बातों को हमेशा याद रखना चाहिए
जब बात निवेश या टैक्स की हो, तो कैलेंडर वर्ष के बजाय 'वित्तीय वर्ष' (Financial Year) को ध्यान में रखें। वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है; क्रय-विक्रय और लाभ की गणना भी उसी के अनुरूप की जाती है। वर्षों पहले शुरू की गई किसी SIP को जब आप रिडीम करती हैं, तो प्रतिमाह दी जाने वाली किस्त की तिथि को ध्यान में रखें और उसी के अनुरूप महीनों की गणना करें।
वित्त से जुड़ी जिज्ञासाएं व अनुभव साझा करने के लिए हमें लिखें- iamolaxmi@gmail.com
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Images: magnific
