जरा सोचिए अगर आधी रात को घर में मेडिकल इमरजेंसी आ गई या अचानक नौकरी चली गई, तो ऐसे में सबसे पहले पैसा याद आएगा। अगर पैसा सेविंग अकाउंट में पड़ा है तो ठीक है, लेकिन अगर वही पैसा शेयर बाजार या किसी लॉन्ग टर्म FD में फंसा है, तो निकालना कितना मुश्किल होगा। यहीं पर इमरजेंसी फंड की असली भूमिका शुरू होती है। यह कोई इन्वेस्टमेंट नहीं, बल्कि आपके बुरे वक्त का बीमा है। इसका एक ही मकसद है कि पैसा सुरक्षित रहे और जरूरत पड़ते ही तुरंत हाथ में आ जाए।

क्या सच में जरूरी है इमरजेंसी फंड?

एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लगभग 75% लोगों के पास 3 महीने तक का भी इमरजेंसी फंड नहीं है। हम SIP, स्टॉक, क्रिप्टो में पैसा लगाते हैं, लेकिन बेसिक सेफ्टी नेट बनाना भूल जाते हैं। हर किसी के पास कम से कम 3 से 6 महीने के जरूरी खर्चों के बराबर पैसा अलग से होना चाहिए। अगर आप फ्रीलांसर हैं, तो ये फंड 9 से 12 महीने का होना चाहिए। आइए ICICI गाजियाबाद ब्रांच की मैनेजर स्वाथी सिंह से इमरजेंसी फंड के बारे में जानते हैं।

कितना होना चाहिए इमरजेंसी फंड?

इमरजेंसी फंड आपके रोजमर्रा के खर्चों का 3 से 6 गुना होता है। इसमें सिर्फ सर्वाइवल खर्च गिने जाते हैं, जैसे- घर का किराया, EMI, राशन, बिजली-पानी का बिल, बच्चों की फीस और इंश्योरेंस। बाहर खाना, शॉपिंग, ओटीटी सब्सक्रिप्शन; इसमें नहीं गिने जाते हैं। मान लीजिए आपका जरूरी खर्च 40,000 रुपये महीना है, तो आपका टारगेट 1.2 लाख से 2.4 लाख रुपये होना चाहिए।

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पैसा रखने के 5 सबसे सेफ और स्मार्ट ऑप्शन

1. हाई-इंटरेस्ट सेविंग अकाउंट

आपके फंड का 20-30% हिस्सा हमेशा सेविंग अकाउंट में होना चाहिए। मेडिकल इमरजेंसी में UPI, ATM से तुरंत पैसा निकालने का यही एक तरीका है। कोशिश करें इसे अपनी सैलरी अकाउंट से अलग बैंक में खोलें ताकि खर्च न हो। Small Finance Banks में 6-7% तक ब्याज मिल जाता है और 5 लाख तक DICGC इंश्योरेंस भी मिलता है।

2. सेविंग + FD का कॉम्बो

ये सबसे स्मार्ट तरीका है। आपके सेविंग अकाउंट में एक लिमिट से ज्यादा पैसा आते ही वो ऑटोमेटिक FD में चला जाता है और FD वाला ब्याज देता है। जरूरत पड़ने पर बिना किसी पेनल्टी के वो खुद-ब-खुद टूट कर वापस सेविंग में आ जाता है। लिक्विडिटी और रिटर्न दोनों का बैलेंस।

3. लिक्विड म्यूचुअल फंड

ये फंड 91 दिन से कम अवधि वाले सरकारी T-Bills और मनी मार्केट में निवेश करते हैं। ये सेविंग अकाउंट से ज्यादा 6.5-7.5% तक रिटर्न देते हैं और पैसा 1 वर्किंग डे में अकाउंट में आ जाता है। कई फंड्स में 50,000 रुपये तक इंस्टेंट रिडेम्पशन की सुविधा भी है।

4. आर्बिट्राज फंड

ये कैश और फ्यूचर मार्केट के बीच के प्राइस डिफरेंस से कमाते हैं। इन्हें इक्विटी की तरह टैक्स लगता है, इसलिए अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट में हैं और आपका फंड 3 लाख से ज्यादा है, तो 1 साल बाद निकालने पर आपको टैक्स में फायदा मिलेगा।

5. सबसे स्मार्ट तरीका

कभी भी पूरा पैसा एक जगह न रखें। बेस्ट फॉर्मूला है कि 1 महीने का खर्च सेविंग अकाउंट में, 2 महीने का खर्च लिक्विड फंड में और बाकी बचा पैसा स्वीप-इन FD या शॉर्ट टर्म FD लैडर में।

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किन 4 जगहों पर इमरजेंसी फंड कभी न रखें?

1. शेयर बाजार और इक्विटी म्यूचुअल फंड

बाजार क्रैश होने पर आपका फंड 20-40% तक गिर सकता है। इमरजेंसी के वक्त नुकसान में बेचना सबसे बड़ी गलती है।

2. PPF, NSC, NPS जैसी लॉक-इन स्कीम

भले ही ये सबसे सेफ हैं, पर इनका पैसा निकालना बहुत मुश्किल है। रातों-रात पैसा चाहिए तो ये किसी काम के नहीं हैं।

3. फिजिकल गोल्ड, प्रॉपर्टी और कैश

सोना या घर बेचने में दिन लग जाते हैं और सही कीमत भी नहीं मिलती। घर में ज्यादा कैश रखना चोरी का रिस्क है।

4. हाई-रिस्क प्रोडक्ट्स

लीज फाइनेंसिंग, इनवॉइस डिस्काउंटिंग, कॉर्पोरेट FD; जो 10-12% का लालच देते हैं, उनसे दूर रहें। इनमें पैसा फंसने और डिफॉल्ट का खतरा बहुत ज्यादा है।

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हमेशा याद रखिए कि इमरजेंसी फंड अमीर बनने का तरीका नहीं है, बल्कि गरीब होने से बचने का तरीका है। इसका काम आपको रिटर्न देना नहीं, बल्कि उस वक्त बचाना है जब कोई और ऑप्शन काम नहीं कर रहा है। इसलिए, रिटर्न के पीछे मत भागिए, लिक्विडिटी और सेफ्टी को पहली प्राथमिकता दीजिए। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।