घर में लगे पौधों से नई पौध तैयार करना बागवानी का एक आसान और किफायती तरीका है। मनी प्लांट, गुलाब, गुड़हल और कई दूसरे पौधों की टहनियों से कटिंग तैयार की जा सकती है। मगर कई बार कटिंग लगाने के बाद भी उसमें जड़ें नहीं निकलतीं। कुछ दिनों में पत्तियां मुरझाने लगती हैं, तना काला पड़ जाता है या कटिंग बिना बढ़े ही सूख जाती है। ऐसे में लोग अक्सर नई कटिंग लगा देते हैं, जबकि असली समस्या पानी, मिट्टी, रोशनी या कटिंग चुनने के तरीके में हो सकती है। नीचे लेख में इंस्टाग्राम इंफ्लुएंसर और गार्डनर कविता तिवारी से जानें कि किन गलतियों की वजह से कटिंग में जड़ें नहीं निकलती हैं?

किन गलतियों की वजह से कटिंग में जड़ें नहीं निकलती हैं?

प्रकृतिक में कई ऐसे पौधे हैं, जो कटिंग से तैयार हो जाते हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग इन प्लांट्स को कटिंग से लगाते हैं,लेकिन कई बार ऐसी स्थिति आती हैं, तो देखभाल और मेहनत के बाद भी कटिंग से जड़ें नहीं निकलती हैं? 

1. गलत टहनी से कटिंग तैयार करना

कटिंग से जड़ें निकलने की शुरुआत सही टहनी चुनने से होती है। अगर आप किसी कमजोर, सूखी, बीमार या कीड़े लगी टहनी को काटकर लगा रहे हैं, तो उसके सफल होने की संभावना कम हो सकती है। इसी तरह फूलों से भरी टहनी भी जड़ें बनाने के बजाय अपनी ऊर्जा फूलों और बीजों में लगा सकती है। इसलिए कटिंग के लिए स्वस्थ, हरी और ऐसी टहनी चुनें जिसमें नई वृद्धि हो रही हो।

टहनी को साफ और तेज कैंची से पत्ती की गांठ के ठीक नीचे काटें। गांठ वह जगह होती है जहां से पत्ती या दूसरी शाखा निकलती है। निचली पत्तियां हटा दें और ऊपर दो-तीन पत्तियां रहने दें। इससे कटिंग से पानी की अधिक कमी नहीं होगी और उसे जड़ें बनाने में मदद मिल सकती है।

2. मिट्टी का बहुत सख्त या गीला होना

कटिंग लगाने के लिए सीधे बगीचे की भारी और चिकनी मिट्टी इस्तेमाल करना एक आम गलती है। ऐसी मिट्टी में पानी जमा हो सकता है और जड़ों तक हवा पहुंचने में परेशानी होती है। वहीं, बहुत सूखी मिट्टी में कटिंग जल्दी मुरझा सकती है। दोनों स्थितियों में जड़ें बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

इसलिए कटिंग लगाने के लिए हल्का, भुरभुरा और पानी की निकासी वाला चुनें। अच्छी गुणवत्ता वाले पॉटिंग मिक्स में कोकोपीट मिला सकती हैं, ताकि नमी बनी रहे और अतिरिक्त पानी बाहर निकल जाए। गमले में पानी निकलने के लिए छेद जरूर होने चाहिए। मिट्टी को नम रखें, लेकिन उसमें लगातार पानी भरा न रहने दें।

3. कटिंग को जरूरत से ज्यादा पानी देना

कई लोगों को लगता है कि कटिंग को जल्दी जड़ें निकालने के लिए बार-बार पानी देना जरूरी है। बता दें कि ऐसा करना नुकसान पहुंचा सकता है। जब मिट्टी लगातार गीली रहती है, तो कटिंग के निचले हिस्से में सड़न शुरू हो सकती है। अगर तना नीचे से काला या मुलायम पड़ रहा है, तो यह अधिक नमी का संकेत हो सकता है।

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इससे बचने के लिए मिट्टी की ऊपरी सतह को देखकर पानी दें। अगर माध्यम अभी नम है, तो दोबारा पानी देने की जरूरत नहीं है। पानी में कटिंग लगा रहे हैं, तो पानी को साफ रखें और समय-समय पर बदलें। ध्यान रखें कि पौधे की प्रजाति के अनुसार पानी की जरूरत अलग-अलग हो सकती है।

4. तेज धूप में कटिंग रख देना

कटिंग में अभी जड़ें नहीं होतीं, इसलिए वह मिट्टी से पानी लेकर अपनी जरूरत पूरी नहीं कर सकती। अगर उसे सीधे तेज धूप में रख दिया जाए, तो पत्तियों से पानी तेजी से निकलने लगता है। इससे कटिंग मुरझा सकती है और जड़ें बनने से पहले ही सूख सकती है।

कटिंग वाले गमले को ऐसी जगह रखें जहां पर्याप्त रोशनी आती हो, लेकिन दोपहर की तेज धूप सीधे न पड़े। नमी बनाए रखने के लिए पारदर्शी प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, बैग को पत्तियों से चिपकने न दें और रोज कुछ देर हटाकर हवा आने दें। प्लास्टिक से ढके गमले को सीधी धूप में न रखें, क्योंकि उसके अंदर तापमान बहुत बढ़ सकता है।

5. बार-बार कटिंग निकालकर जड़ें देखना

कटिंग लगाने के कुछ दिन बाद ही उसे मिट्टी से निकालकर देखना कि जड़ें निकली हैं या नहीं, एक और गलती है। इससे बनने वाली नाजुक जड़ें टूट सकती हैं और कटिंग को दोबारा जमने में समय लग सकता है। हर पौधे में जड़ें निकलने का समय भी एक जैसा नहीं होता।

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इसलिए कटिंग लगाने के बाद धैर्य रखें। कुछ पौधों में एक-दो सप्ताह में जड़ें दिख सकती हैं, जबकि दूसरे पौधों को इससे ज्यादा समय लग सकता है। नई पत्तियां निकलना अच्छी शुरुआत हो सकती है, लेकिन यह हमेशा जड़ें बनने का पक्का प्रमाण नहीं होता। मिट्टी में लगी कटिंग को हल्के से खींचने के बजाय कुछ समय बाद गमले के नीचे से जड़ें दिखाई देने या नई वृद्धि मजबूत होने के संकेत देखें।

6. गलत मौसम में कटिंग लगाना

कटिंग लगाने के लिए मौसम भी महत्वपूर्ण है। बहुत ज्यादा गर्मी, ठंड या अचानक तापमान बदलने से जड़ें बनने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। कई मुलायम टहनियों वाली कटिंग के लिए वसंत और शुरुआती गर्मी अनुकूल होती है, लेकिन हर पौधे का सही समय अलग हो सकता है। इसलिए कटिंग लगाने से पहले पौधे की जरूरत समझें। अगर मौसम ठंडा है, तो कटिंग को ठंडी हवा और तापमान में अचानक बदलाव से बचाएं। 

कटिंग में जड़ें जल्दी निकलने के लिए क्या करें?

अगर आपने जो कटिंग लगाई है उससे जड़ें नहीं निकल रही हैं, तो नीचे बताई गई बातों को फॉलो करें।

  • हमेशा स्वस्थ टहनी और साफ कैंची का इस्तेमाल करें।
  • कटिंग को सही गांठ के नीचे से काटें और निचली पत्तियां हटा दें।
  • हल्की, हवादार और पानी की निकासी वाली मिट्टी चुनें।
  • मिट्टी में नमी बनाए रखें, लेकिन पानी जमा न होने दें।
  • कटिंग को तेज सीधी धूप से बचाकर पर्याप्त रोशनी में रखें।
  • बिना जरूरत कटिंग को बार-बार न छेड़ें और जड़ें बनने के लिए समय दें।

नोट- रूटिंग हार्मोन कुछ पौधों की कटिंग में उपयोगी हो सकता है, लेकिन हर कटिंग के लिए इसे इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। इसकी मात्रा और इस्तेमाल का तरीका प्रोडक्टट के निर्देशों के अनुसार रखें।

सही कटिंग, नमी और अनुकूल वातावरण मिलने पर पौधे की नई जड़ें बनने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए कटिंग के सूखने पर तुरंत पौधे को बेकार समझने के बजाय उसकी देखभाल के तरीकों की जांच करें। छोटी-छोटी गलतियां सुधारकर आप घर पर ही नई पौध तैयार करने में बेहतर परिणाम पा सकती हैं।

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