क्या आप भी लैपटॉप को अक्सर 100% ब्राइटनेस पर चलाती हैं? अगर ऐसा है, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। अमेरिकन स्टडी ऑफ ऑप्थेनोलॉजी के अनुसार, दिन भर लैपटॉप को फुल ब्राइटनेस पर चलाने से आंखों को कुछ खास नुकसान नहीं होता है, लेकिन इससे आंखों में काफी ज्यादा थकावट महसूस हो सकती है। साथ ही जलन, ड्राइनेस और सिरदर्द जैसा लगने लगता है। इस वजह से आपका काम में मन नहीं लगता और आप काफी परेशान रहती हैं।
100% ब्राइटनेस पर लैपटॉप चलाने के क्या हैं नुकसान?
ऑफिस में दिन भर एक जगह बैठकर 100% ब्राइटनेस पर लैपटॉप चलाने के नुकसान जानती हैं। आइए यहां जानें।
1. आंखों में थकान और खिंचाव
अगर आपके ऑफिस में रोशनी कम है और सिस्टम में तेज ब्राइटनेस है, तो अक्सर आंखों को एडजस्ट करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे आंखें काफी जल्दी थक जाती हैं।
2. आंखों में सूखापन और जलन
जब रोशनी तेज होती है तो पलक देर से झपकती है। अक्सर हम लोग 1 मिनट में 15 बार पलक झपकाते हैं, जो ज्यादा रोशनी की वजह से 5-6 तक रह जाती है। इसी वजह से आंसू जल्दी आते हैं और आंखों में जलन भी होने लगती है।
3. सिरदर्द और भारीपन
दिनभर फुल स्क्रीन ब्राइटनेस पर काम करने से शाम तक आंखें थक जाती हैं और जलन, भारीपन सा महसूस होने लगता है।
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4. नींद खराब होना
अगर आप रात में ऑफिस के बाद तेज रोशनी में फोन चलाती हैं तो मेलाटोनिन हार्मोन बनना बंद हो जाता है, जिससे नींद आने में काफी समय लगता है।
आंखों को बचाने के तरीके
स्क्रीन की ब्राइटनेस और लंबे समय तक स्क्रीन देखने के नुकसान से बचने के लिए आप आसान तरीकों से आंखों को सेफ रख सकती हैं।
- ऑफिस में लैपटॉप की ब्राइटनेस को नॉर्मल रखें। ज्यादा तेज रोशनी से आपकी आंखों पर जोर पड़ेगा और फिर आंख दर्द होगी।
- आजकल बहुत से डिवाइस में नाइट मोड जैसे अलग से फिल्टर आते हैं, जिन्हें आप ऑन कर सकती हैं।
- साथ ही हर 20 मिनट में, 20 सेकेंड का ब्रेक लें और कम से कम 20 फीट दूर किसी चीज को देखें।
- आप एंटी-ग्लेयर स्क्रीन का भी यूज कर सकती हैं। यह चमक को कम करता है। इससे स्क्रीन पर फोकस करने में कम मदद लगती है।
- ऑफिस में ब्रेक लेकर पानी पीते रहें। यह आंखों को गिला रखने में मदद करता है।
आंखों के लिए परफेक्ट मोड कौन सा है?
अगर आप 100% ब्राइटनेस को बार-बार चेंज नहीं करना चाहती हैं, तो एक नई ट्रिक अपना सकती हैं।
- दिन में लाइट मोड और रात में डार्क मोड ऑन कर दें।
- रिसर्च की मानें तो डार्क मोड से रात में आंखों पर 40% तक कम जोर पड़ता है और नींद भी अच्छी आती है।
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