International Coffee Day 2026: भारत में कॉफी पीना अब सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि हमारी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह की शुरुआत से लेकर ऑफिस और कैफे में बैठकों तक, हर जगह कॉफी पीते लोग देखे जा सकते हैं। कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया के मुताबिक, साल 2024 में देश के अंदर कॉफी की खपत 96,000 मीट्रिक टन तक पहुंच गई। यह आंकड़े बताते हैं कि दक्षिण भारतीय बाजारों से निकलकर अब पूरे भारत में कॉफी का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है।

चेरीज इंडिया के संस्थापक परिमल शाह के अनुसार, जैसे-जैसे कॉफी की मांग बढ़ रही है, वैसे-वैसे इससे पर्यावरण पर पड़ने वाले असर पर ध्यान देना भी जरूरी हो गया है। कॉफी उगाने, प्रोसेस करने, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्टेशन के साथ-साथ इसे बनाने में पानी और बिजली की खपत होती है। हालांकि, पर्यावरण के प्रति जागरूक होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप कॉफी पीना छोड़ दें। बस अपनी कुछ छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके आप प्रकृति को बचा सकते हैं। जानते हैं कैसे?

सिर्फ कप तक सीमित न रहें: पैकेजिंग और वेस्ट पर दें ध्यान

हम जो कॉफी पीते हैं, वह एक लंबी प्रक्रिया का आखिरी पड़ाव होती है। डिस्पोजेबल कप और ज्यादा पैकेजिंग कचरा बढ़ाती है।

  • जरूरत के हिसाब से खरीदारी: घर या ऑफिस के लिए उतनी ही मात्रा में कॉफी खरीदें जितनी जरूरत हो, ताकि प्रोडक्ट खराब या बेकार न हो।
  • री-यूजेबल कप अपनाएं: डिस्पोजेबल प्लास्टिक या कागज के कप की जगह अपने खुद के मग या दोबारा इस्तेमाल होने वाले कप का इस्तेमाल करें। दफ्तरों में इसका असर काफी बड़ा दिखता है।
  • बेहतर पैकेजिंग: कंपनियों को भी ऐसी रीसाइक्लिंग होने वाली पैकेजिंग पर जोर देना चाहिए, जिससे कॉफी सुरक्षित रहे और कचरा भी कम हो।

यह भी पढ़ें- पतली बनती है कोल्ड कॉफी? अपनाएं ये 3 ट्रिक्स, मिनटों में मिलेगा कैफे जैसा थिक फ्रॉथ

कॉफी बनाने का सही तरीका क्या है?

कॉफी तैयार करने की प्रक्रिया में भी थोड़ा बदलाव करके संसाधनों को बचाया जा सकता है।

  • उतना ही पानी गर्म करें जितनी जरूरत हो: अक्सर लोग जरूरत से ज्यादा पानी उबालते हैं, जिससे बिजली और गैस ज्यादा खर्च होती है।
  • कॉफी मशीनों को चालू न छोड़ें: ऑफिस में पूरे दिन कॉफी मेकर चालू रहने से ऊर्जा की बर्बादी होती है। जब इस्तेमाल न हो, तो मशीन बंद कर दें या स्टैंडबाय मोड पर रखें।

बची हुई कॉफी का सही इस्तेमाल

कॉफी बनने के बाद जो पाउडर या वेस्ट बचता है, उसे सीधा कचरे में फेंकने की जरूरत नहीं है।

  • घर पर खाद (Compost) बनाएं: बची हुई कॉफी को पेड़-पौधों के लिए खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • कैफे और ऑफिस में रिसाइकलिंग: जहां बड़ी मात्रा में कॉफी बनती है, वहां इस वेस्ट को इकट्ठा करके खाद या अन्य कामों में रीसायकल करने की व्यवस्था होनी चाहिए।

सही कॉफी कैसे चुनें?

आज के ग्राहक केवल स्वाद और कीमत ही नहीं देखते, बल्कि यह भी जानना चाहते हैं कि कॉफी कहां से आ रही है और उसे उगाने का तरीका कैसा है।

  • सोर्सिंग की जानकारी: कंपनियों को यह साफ करना चाहिए कि उनकी कॉफी पर्यावरण के अनुकूल तरीकों से उगाई जा रही है या नहीं।
  • समझदारी से खरीदारी: एक जागरूक ग्राहक के तौर पर ऐसी ब्रांड्स को प्राथमिकता दें जो सस्टेनेबिलिटी का ध्यान रखती हैं।

यह भी पढ़ें- कॉफी सिर्फ पीने के लिए नहीं होती, घर के इन 6 कामों को भी बनाती है आसान

निष्कर्ष

पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए किसी बहुत बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है। हमारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें ही बड़ा असर डालती हैं। 

अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Main Images: magnific