अगर आपको गार्डन‍िंग पसंद है, तो आप गोबर की खाद और वर्मीकंपोस्‍ट का इस्‍तेमाल जरूर करती होंगी। ज्‍यादातर लोग पौधों में इन्‍हीं दोनों खाद का इस्‍तेमाल करते हैं, लेक‍िन कई बार लोगों के मन में सवाल आता है क‍ि आख‍िर दोनों में से कौन सी खाद ज्‍यादा अच्‍छी है? क्‍या स‍िर्फ गोबर की खाद डालना काफी है या फ‍िर वर्मीकंपोस्‍ट से ज्‍यादा फायदा म‍िलता है?

आपको बता दें क‍ि ये दोनों ही ऑर्गेन‍िक खाद हैं। इन दोनों के अपने-अपने फायदे हैं। बस आपको पौधों के ह‍िसाब से इनका इस्‍तेमाल करना चाह‍िए। आज हम आपको अपने इस लेख में बताएंगे क‍ि गोबर की खाद और वर्मीकंपोस्‍ट में क्‍या अंतर है और क‍िस पौधे के ल‍िए कौन-सी खाद का इस्‍तेमाल करना ज्‍यादा सही रहेगा। आइए जानते हैं-

क्या होती है गोबर की खाद?

गोबर की खाद गाय, भैंस या दूसरे पशुओं के गोबर को पूरी तरह सड़ाकर तैयार की जाती है। इसे अच्छी तरह सड़ने के बाद ही पौधों में डालना चाहिए। इस खाद से मिट्टी उपजाऊ होती है और मिट्टी में भी लंबे समय तक नमी बनी रहती है।

क्या होती है वर्मीकंपोस्ट?

वर्मीकंपोस्ट केंचुओं की मदद से तैयार की जाने वाली ऑर्गेन‍िक खाद है। केंचुए सूखे पत्तों, सब्जियों के छिलकों और दूसरे जैविक कचरे को खाकर उसे पोषक तत्वों से भरपूर खाद में बदल देते हैं। यह खाद दि‍खने में भुरभुरी और डार्क ब्राउन या काले रंग की होती है। इसमें पौधों के लिए जरूरी कई पोषक तत्व पाए जाते हैं।

गोबर की खाद और वर्मीकंपोस्‍ट में क्‍या है अंतर?

गोबर की खाद वर्मीकंपोस्‍ट
मिट्टी की क्‍वाल‍िटी सुधारने में ज्यादा मदद करती है।

पौधों को पोषक तत्व जल्दी देती है।

पोषक तत्व धीरे-धीरे छोड़ती है। गमलों और किचन गार्डन के लिए बहुत अच्छी रहती है।
बड़े पौधों और जमीन की तैयारी के लिए अच्छी मानी जाती है। नई पत्तियां, फूल और सब्जियों की ग्रोथ में मदद करती है।

फूल वाले पौधों के लिए कौन-सी बेहतर?

अगर आपने गार्डन में गुलाब, गेंदा, गुड़हल, मोगरा या दूसरे फूल वाले पौधे लगा रखें हैं तो इनके ल‍िए वर्मीकंपोस्ट काफी अच्छा रहेगा। वहीं, अगर मिट्टी उपजाऊ नहीं है तो पहले उसमें गोबर की अच्छी तरह सड़ी हुई खाद मिला सकती हैं। इसके बाद समय-समय पर थोड़ी मात्रा में वर्मीकंपोस्ट डाल सकती हैं।

सब्जियों के पौधों में क्या डालें?

टमाटर, मिर्च, बैंगन, धनिया, पालक और दूसरी सब्जियों के लिए दोनों ही खाद का साथ में इस्तेमाल करना अच्छा रहता है। मिट्टी तैयार करते समय गोबर की खाद मिला दें और पौधों की जब ग्रोथ हो तो हर 20 से 30 दिन में थोड़ा-थोड़ा वर्मीकंपोस्ट डाल सकती हैं।

गमलों के लिए कौन-सी खाद बेहतर है?

अगर आप बालकनी या छत पर गार्डनिंग करती हैं, तो आपके ल‍िए वर्मीकंपोस्ट ज्यादा सही रहेगा। यह हल्की होती है, कम मात्रा में भी अच्छा असर भी दिखाती है और गमले की मिट्टी को भी पौधों के ल‍िए अच्‍छा बनाती है।

कितनी मात्रा में दोनों खाद का इस्‍तेमाल करें?

अगर आप इन दोनों खाद का इस्तेमाल करती हैं, तो इनकी मात्रा के बारे में भी जान लेना चाह‍िए। जब सही मात्रा में खाद का इस्‍तेमाल करेंगी तो पौधों को भी अच्‍छा फायदा म‍िलेगा।

  • गोबर की खाद: गमले के आकार के अनुसार हर 45 से 60 दिन में 1 से 2 मुट्ठी।
  • वर्मीकंपोस्ट: हर 20 से 30 दिन में 1 से 2 मुट्ठी (गमले के आकार के अनुसार)।

खाद डालने के बाद हल्की गुड़ाई करें और थोड़ा पानी भी जरूर दें।

आखिर कौन-सी खाद है सबसे बेस्ट?

अगर सिर्फ एक खाद चुननी हो, तो गमलों और घर की गार्डनिंग के लिए वर्मीकंपोस्ट ज्यादा सही रीहेगी, लेकिन अगर आप मिट्टी को उपजाऊ या उसकी सेहत सुधारना चाहती हैं तो अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद भी उतनी ही जरूरी है।

तो अगर आप भी अभी तक इन दोनों में अंतर और इस्‍तेमाल के तरीके को एक ही समझती थीं, तो हम आपकी ये दुव‍िधा दूर कर दी है। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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