राजस्थान की राजधानी जयपुर अपनी ऐतिहासिक विरासत, भव्य किलों, आलीशान राजमहलों और गुलाबी रंग के लिए जानी जाती है। इसी अनोखी रंगत की वजह से पूरी दुनिया इस शहर को 'पिंक सिटी' के नाम से जानती है। जयपुर में मौजूद पुराने बाजार, ऐतिहासिक इमारतें और अधिकतर घर गुलाबी रंग से रंगे हुए हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस पूरे शहर का रंग गुलाबी ही क्यों है? अगर नहीं, तो आज इस लेख में हम आपको इसके पीछे का रोचक इतिहास बताने जा रहे हैं।

जयपुर को क्यों रंगा गया गुलाबी?

अगर आप भी इतिहास में दिलचस्पी रखते हैं और यह जानना चाहते हैं कि आखिर जयपुर का रंग गुलाबी कैसे हुआ, तो आइए जानते हैं इसके पीछे की असली वजह -

जयपुर की स्थापना और इसका शुरुआती इतिहास

राजस्थान पर्यटन विभाग के आधिकारिक डिजिटल पोर्टल और जयपुर राजपरिवार के सिटी पैलेस संग्रहालय के अनुसार, जयपुर की नींव 18 नवंबर 1727 को आमेर के महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा रखी गई थी। उस समय महान वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य ने इस शहर का नक्शा तैयार किया था। इस पूरे शहर को सही नाप-जोख, ग्रिड सिस्टम और वास्तुशास्त्र के हिसाब से बसाया गया था। जब यह शहर बनकर तैयार हुआ था, तब यहां की इमारतें सफेद और हल्के बादामी रंग की हुआ करती थीं।  

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1876 में क्यों रंगा गया पूरे शहर को गुलाबी रंग में?

शहर को गुलाबी रंग से रंगने की दिलचस्प कहानी साल 1876 से शुरू होती है। उस समय जयपुर में महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय का शासन था। उसी दौरान ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के बेटे प्रिंस ऑफ वेल्स अल्बर्ट एडवर्ड भारत के दौरे पर आने वाले थे।

प्रिंस ऑफ वेल्स का भव्य और यादगार स्वागत करने के लिए महाराजा चाहते थे कि जब प्रिंस जयपुर आएं, तो यहां की मेहमाननवाजी देखकर हैरान रह जाएं। उनके स्वागत के लिए ही महाराजा सवाई राम सिंह ने पूरे शहर की इमारतों को गेरुआ-गुलाबी रंग से रंगने का शाही आदेश जारी किया।

गुलाबी रंग चुनने के मुख्य कारण

महाराजा द्वारा पूरे शहर को गेरुआ-गुलाबी रंग से रंगवाने के पीछे कुछ खास वजहें थीं -

  • महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय राजपूत घराने से ताल्लुक रखते थे। राजपूती परंपरा में गुलाबी रंग को मेहमाननवाजी, प्यार और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
  • यह रंग तेज धूप और गर्मी का असर कम करने में भी काफी मददगार होता है।
  • इन्हीं कारणों से शहर की सभी इमारतों, दुकानों और पुरानी चारदीवारी को गुलाबी रंग से ही रंगा गया।

जयपुर को कैसे मिला पिंक सिटी नाम?

प्रिंस ऑफ वेल्स के साथ आए पत्रकार और लेखक स्टेनली रीड भी जयपुर की सुंदरता से बेहद प्रभावित हुए। सुंदर गुलाबी रंग से सजे जयपुर को देखकर उन्होंने अपनी किताब में इस शहर का जिक्र किया और इसे पिंक सिटी नाम दिया। बस, तभी से दुनिया भर में यह शहर पिंक सिटी के नाम से मशहूर हो गया।  

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शाही कानून और गुलाबी रंग की परंपरा

प्रिंस ऑफ वेल्स के जाने के बाद, महाराजा सवाई राम सिंह ने 1877 में एक शाही कानून बनाया। इस कानून के तहत जयपुर की पुरानी चारदीवारी के अंदर बने सभी मकानों और दुकानों पर सिर्फ गुलाबी रंग करना अनिवार्य कर दिया गया। साथ ही यह भी तय हुआ कि किसी अन्य रंग का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। आज भी जयपुर प्रशासन इस नियम का पालन कराता है, ताकि शहर की ऐतिहासिक पहचान बनी रहे। 

सार:

जयपुर का यह गुलाबी रंग भारतीय मेहमाननवाजी और शाही परंपरा की एक सुंदर मिसाल पेश करता है। जब भी आपको मौका मिले, पुरानी चारदीवारी की गलियों में घूमकर इस गुलाबी इतिहास को खुद करीब से जरूर महसूस करें।