भारत में ऐसे कई अनोखे गांव हैं, जिनकी रहस्यमयी कहानियां सुनते ही लोग हैरान हो जाते हैं। भारत अपनी प्राचीन मान्यताओं और अनोखी परंपराओं के लिए विदेशों में भी काफी मशहूर है। यहां आपको कदम-कदम पर इतिहास के अलग-अलग रंग देखने को मिलेंगे। आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे गांवों के बारे में बताएंगे, जहां दानवों की पूजा की जाती है।
जी हां, आमतौर पर देश में विजयदशमी यानी दशहरे के दिन रावण, कुंभकरण और मेघनाद जैसे दानवों के पुतले जलाए जाते हैं। लेकिन भारत में कुछ गांव ऐसे भी हैं, जहां रावण दहन नहीं किया जाता, बल्कि रावण और अन्य दानवों की बाकायदा पूजा-अर्चना की जाती है। भारत के इन अनोखे गांवों में रावण, ताड़का और मेघनाद जैसे पात्रों की पूजा के साथ-साथ दीये जलाकर विशेष आरती की जाती है। आइए जानते हैं इन अनोखे गांवों के बारे में -
1. बैजनाथ, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
अगर आप हिमाचल प्रदेश घूमने जा रही हैं, तो कांगड़ा जिले में स्थित बैजनाथ धाम का रुख कर सकती हैं। माना जाता है कि इस जगह पर रावण ने घोर तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था और यहीं पर उसने अपने 10 सिर अर्पित किए थे। रावण की इस अटूट भक्ति के कारण यहां के स्थानीय लोग उसे भगवान शिव का परम भक्त मानते हैं। यही वजह है कि दशहरे के दिन यहां रावण का पुतला जलाने के बजाय लोग दीये जलाकर उसकी विशेष पूजा करते हैं।
2. बिसरख गांव (उत्तर प्रदेश)
उत्तर प्रदेश के बिसरख गांव का नाम रावण के पिता महर्षि विश्रवा के नाम पर पड़ा था। इस गांव के लोग रावण को अपना बेटा मानते हैं। यही कारण है कि यहां कभी भी रामलीला का आयोजन नहीं होता और न ही दशहरे पर रावण का पुतला जलाया जाता है। इसके विपरीत, दशहरे के दिन बिसरख गांव में शोक का माहौल रहता है और रावण की आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
3. मंदसौर (मध्य प्रदेश)
मध्य प्रदेश के मंदसौर की बात करें तो यहां के स्थानीय लोग रावण को अपने क्षेत्र का दामाद मानते हैं। मंदसौर का प्राचीन नाम 'दशपुर' था, जिसे रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका माना जाता है। मंदसौर के खानपुरा क्षेत्र में दशहरे के दिन रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है। बल्कि, यहां परंपरा ऐसी है कि महिलाएं जब भी रावण की प्रतिमा के सामने से गुजरती हैं, तो दामाद होने के नाते उसके सम्मान में घूंघट निकाल लेती हैं।
4. बस्तर और दक्षिण भारत
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में गोंड और बैगा आदिवासी समुदाय के लोग ताड़का को अपनी कुलदेवी और रक्षक मानते हैं। इसके अलावा कर्नाटक के कोलार और मांड्या जिले में भी ऐसे गांव हैं, जहां रावण की ज्ञान साधना और ताड़का की शक्तियों का आदर किया जाता है। यहां के लोग दीये जलाकर उनकी पूजा करते हैं।
इन अनोखे गांवों तक कैसे पहुंचें?
इन सभी जगहों पर आप फ्लाइट या ट्रेन के माध्यम से आसानी से पहुंच सकती हैं। नजदीकी रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट पर पहुंचते ही आपको कई लोकल टैक्सी और कैब आसानी से मिल जाएंगी, जो आपको इन गांवों तक पहुंचा देंगी।
निष्कर्ष: भारत में अधिकतर जगहों पर दशहरे के दिन रावण दहन किया जाता है, लेकिन इस लेख में बताए गए कुछ गांव ऐसे हैं, जहां रावण दहन के बजाय उसकी और अन्य दानवों की पूजा की जाती है। अगर आप भी अब तक इस अनोखी परंपरा से अनजान थीं, तो उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपको पसंद आई होगी। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हरजिंदगी से।
(image credit: magnific)
-1789988045717_m.webp)