भारत में देवी-देवताओं के कई ऐतिहासिक और पवित्र मंदिर स्थित हैं, जिनकी अपनी अनोखी परंपराएं हैं। आमतौर पर मंदिरों के द्वार सभी भक्तों के लिए खुले रहते हैं, लेकिन देश में कुछ ऐसे प्रसिद्ध शक्तिपीठ और पवित्र धाम भी हैं, जहां एक खास समय या उत्सव के दौरान पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह बंद हो जाता है। केरल से लेकर तमिलनाडु के समुद्री तटों पर बसे ये मंदिर महिला सशक्तिकरण, पवित्रता और सदियों पुरानी परंपराओं के अनूठे प्रतीक हैं। आइए जानते हैं दक्षिण भारत के इन प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में, जहां महिलाओं की प्रधानता है और पुरुषों के लिए नियम काफी सख्त हैं। पढ़ते हैं आगे...

भारत के किन 3 प्रसिद्ध मंदिरों में पुरुषों का आना है मना?

भारत के ऐसे मंदिर के नाम निम्न प्रकार हैं, जहां पुरुष नहीं जा सकते हैं-

1. आट्टुकाल भगवती मंदिर (केरल)

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित आट्टुकाल भगवती मंदिर देवी भद्रकाली को समर्पित है। इस मंदिर को महिलाओं के सबरीमाला के रूप में भी जाना जाता है। यहां की सबसे बड़ी खासियत विश्व प्रसिद्ध 'पोंगाला उत्सव' है।

(photo credit -Kerala Tourism)

मंदिर की पौराणिक कथा और इतिहास

इस मंदिर का इतिहास तमिल महाकाव्य 'सिलप्पधिकारम' की मुख्य नायिका कन्नकी की पौराणिक कथा से गहराई से जुड़ा हुआ है। कथा के अनुसार, अन्याय का शिकार हुए अपने पति कोवलन की बेगुनाही साबित करने के बाद कन्नकी ने क्रोध में मदुरै शहर को नष्ट कर दिया था। इसके बाद कोडुंगलूर जाते समय उन्होंने आट्टुकाल में किल्ली नदी के पास एक छोटी बच्ची का रूप धरकर मुल्लुवीटिल परिवार के एक बुजुर्ग से नदी पार कराने की मदद मांगी। उनकी अलौकिक दिव्य चमक से प्रभावित होकर बुजुर्ग उन्हें अपने घर ले आए, जहां से वे अचानक गायब हो गईं। उसी रात देवी ने बुजुर्ग के सपने में आकर मंदिर बनाने का निर्देश दिया, जिसके बाद इस पवित्र धाम की स्थापना हुई।

दर्शन का समय

  • सुबह 04:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
  • शाम 05:00 बजे से रात 08:30 बजे तक
कैसे पहुंचें?
  • निकटतम एयरपोर्ट- तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (5.4 किमी)|
  • निकटतम रेलवे स्टेशन, तिरुवनंतपुरम सेंट्रल (2.7 किमी)।

2. चक्कुलत्तुकावु श्री भगवती मंदिर (केरल)

केरल के आलप्पुषा से लगभग 30 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में नीरेट्टूपुरम में स्थित चक्कुलत्तुकावु मंदिर करीब 3000 साल पुराना ऐतिहासिक धाम है। पंबा और मणिमला नदियों के बीच बसा यह मंदिर मां दुर्गा को समर्पित है।

(photo credit -keralatourism.org)

नारी पूजा की अनूठी परंपरा

इस मंदिर का सबसे अनोखा अनुष्ठान 'नारी पूजा' है, जो हर साल दिसंबर महीने के पहले शुक्रवार (धनु मास) को आयोजित होता है। इस दिन 10 दिनों का उपवास रखने वाली महिला श्रद्धालुओं के पैर स्वयं पुरुष पुजारी धोते हैं। इसके अलावा, यहां का पोंगाला उत्सव भी बेहद प्रसिद्ध है, जिसमें महिलाएं मिट्टी के बर्तनों में चावल, गुड़ और नारियल से बना मीठा व्यंजन (पोंगाला निवेद्यं) पकाकर मां दुर्गा को अर्पित करती हैं।

दर्शन का समय

  • सुबह 04:30 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक
  • शाम 04:30 बजे से रात 08:00
कैसे पहुंचें?
  • निकटतम रेलवे स्टेशन- तिरुवल्ला (11 किमी) |
  • निकटतम एयरपोर्ट- कोच्चिन इंटरनेशनल एयरपोर्ट (113 किमी) |

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3. कुमारी अम्मन मंदिर, कन्याकुमारी

भारत के अंतिम छोर पर तीन महासागरों के संगम पर स्थित कुमारी अम्मन मंदिर 108 शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ मां भगवती के बाल रूप 'देवी कन्या कुमारी' की पूजा की जाती है।

(photo credit - kanyakumaritourism.in)

पुरुषों के प्रवेश पर कड़े नियम

इस मंदिर में शादीशुदा पुरुषों का प्रवेश मुख्य भाग में पूरी तरह वर्जित माना जाता है। केवल बाल ब्रह्मचारी पुरुषों को ही मंदिर के द्वार तक जाने की अनुमति होती है। मान्यता है कि इस स्थान पर माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।

हीरे की नथ का रहस्यमय तेज

देवी की मूर्ति की सबसे बड़ी विशेषता उनकी हीरे की नथ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस नथ की चमक इतनी तीव्र थी कि पुराने समय में समुद्र में जाने वाले नाविक इसे लाइटहाउस की रोशनी समझ लेते थे और उनके जहाज चट्टानों से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते थे। इसी कारण मंदिर का पूर्वी दरवाजा हमेशा बंद रखा जाता है और साल में केवल 5 विशेष अवसरों पर ही खोला जाता है।

रामायण, महाभारत और प्राचीन संगम साहित्य में इस मंदिर का उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार, बाणासुर नामक असुर का वध केवल एक कुंवारी कन्या द्वारा ही संभव था। देवताओं की प्रार्थना पर मां पराशक्ति ने कुमारी रूप धारण किया और बाणासुर का संहार करके देवलोक को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया।

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दर्शन का समय

  • सुबह 4:30 से दोपहर 12:30 बजे
  • शाम 4:00 से रात 8:30 बजे
कैसे पहुंचें- कन्याकुमारी बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से मात्र 1 किमी

निष्कर्ष

ये तीनों मंदिर भारतीय संस्कृति की आस्था और नारी शक्ति के प्रति सम्मान की महान परंपरा को प्रदर्शित करते हैं। यदि आप दक्षिण भारत की आध्यात्मिक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इन ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन करना एक अद्भुत और अच्छा अनुभव साबित हो सकता है।

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