भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भगवान गणेश की महिमा और उनके भव्य मंदिर अपनी एक अलग पहचान रखते हैं। दुनिया के कई देशों में विघ्नहर्ता गणेश को ज्ञान, सफलता और समृद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है। प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति और व्यापार के प्रसार के साथ गणपति की यह आस्था एशिया के कई देशों तक फैली। आज थाईलैंड से लेकर इंडोनेशिया और जापान तक कई प्रसिद्ध स्थान हैं जहां गणपति के प्राचीन और भव्य मंदिर स्थित हैं। जानते हैं, इनके बारे में...
विदेश में मौजूद प्रसिद्ध गणेश मंदिर के नाम
इंडिया के साथ-साथ विदेशों में भी कई ऐसे गणेश मंदिर हैं जो प्रसिद्ध हैं-
1. बाली, इंडोनेशिया: एलीफेंट गुफा
इंडोनेशिया का बाली द्वीप अपनी अनूठी हिंदू संस्कृति के लिए जाना जाता है। बाली में भगवान गणेश को ज्ञान और रक्षा के देवता के रूप में पूजा जाता है। यहां का सबसे प्रमुख और प्राचीन स्थल 'Goa Gajah' यानी एलीफेंट गुफा है, जो उबुद के पास स्थित है।
- ऐतिहासिक महत्व: यह 11वीं शताब्दी का एक प्रसिद्ध मंदिर है, जहां गुफा के अंतर गणेश जी की प्राचीन प्रतिमा के साथ शैव प्रतीक भी देखने को मिलते हैं।
- सांस्कृतिक मेल: यहां बौद्ध स्तूप भी मौजूद हैं, जो हिंदू और बौद्ध परंपराओं के आपसी मेल को दर्शाते हैं।
2. थाईलैंड: प्रू फिकानेट
थाईलैंड में भगवान गणेश को 'प्रू फिकानेट' या 'प्रू फिकानेस' के नाम से जाना जाता है। यहां उन्हें सफलता, कला और व्यापार की उन्नति का प्रतीक माना जाता है। बैंकॉक के सेंट्रलवर्ल्ड मॉल के बाहर स्थित गणेश मंदिर में स्टूडेंट और बिजनेसमैन की भारी भीड़ जुटती है।
- विशाल कांस्य प्रतिमा: चाचोएंगसाओ के ख्लॉन्ग खान में एक बेहद भव्य और विशाल कांस्य प्रतिमा है, जिसकी ऊंचाई लगभग 39 मीटर है। इसे 854 अलग-अलग कांस्य के टुकड़ों को जोड़कर बनाया गया है।
- यात्रा की जानकारी: बैंकॉक से लगभग 95 किलोमीटर पूर्व दिशा में स्थित इस पार्क तक कार से पहुंचने में डेढ़ घंटे का समय लगता है।
यह भी पढ़ें- Ganesh Visarjan 2026 Wishes: इन दिल छू लेने वाले संदेशों से अपनों को दें गणेश विसर्जन की शुभकामनाएं
3. जापान: बौद्ध परंपरा में 'शोतेन' के रूप में गणेश
जापान में भगवान गणेश की परंपरा बौद्ध धर्म के जरिए पहुंची थी। आठवीं और नौवीं शताब्दी के दौरान यह परंपरा भारत से चीन होते हुए जापान तक पहुंची। जापानी बौद्ध संस्कृति में गणेश को 'गणाबाची' या 'शोतेन' कहा जाता है, जिन्हें खुशी और समृद्धि का देवता माना जाता है।
- अनोखा स्वरूप: जापान में गणेश की कुछ मूर्तियों का स्वरूप भारतीय परंपरा से अलग है, जहां दो हाथी-मुख वाली आकृतियों को गले मिलते हुए दिखाया जाता है, जो पुरुष और स्त्री ऊर्जा के मिलन का प्रतीक है।
- प्रमुख मंदिर: ओसाका के पास माउंट इफोमा पर स्थित 'होजानजी मंदिर' और टोक्यो के असाकुसा जिले में स्थित 'मात्सुचियामा शोडेन' यहां के सबसे प्रसिद्ध केंद्र हैं।
निष्कर्ष
इससे पता चलता है कि आस्था की कोई सीमा नहीं होती। भारत से शुरू हुई विघ्नहर्ता की यह परंपरा आज दुनिया के कई देशों में अपनी अनूठी संस्कृति और रूपों के साथ जीवित है, जो विभिन्न देशों की कला और इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
