Jitiya Vrat 2026: जितिया (जिउतिया) व्रत माताओं द्वारा संतानों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए रखा जाने वाला कठिन व्रत है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले इस निर्जला व्रत का धार्मिक महत्व है। यह व्रत तीन दिनों तक चलता है नहाय-खाय से शुरू होकर जितिया के दिन निर्जला उपवास और फिर अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण के साथ संपन्न होता है। व्रत के दौरान नियमों का पालन किया जाता है, इसलिए इसके पारंपरिक खान-पान की जानकारी होना भी बहुत जरूरी है। नीचे लेख में जानें इस व्रत में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?

जितिया व्रत में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?

अगर आप पहली बार जितिया व्रत रखी रही हैं, तो यह समझना और जानना बेहद जरूरी है कि इस दौरान खाने की किन चीजों की मनाही होती है और किन चीजों को खा सकते हैं। नीचे दी गई सारणी में देखें-

व्रत के दिन क्या खाना चाहिए (स्वीकार्य चीजें) क्या नहीं खाना चाहिए (वर्जित चीजें)
नहाय-खाय (पहला दिन)
  • मड़ुआ की रोटी
  • नोनी का साग
  • अरवा चावल और कद्दू (लौकी) की सब्जी
  • सेंधा नमक या सामान्य नमक (बिना लहसुन-प्याज का सात्विक भोजन)
  • लहसुन और प्याज
  • किसी भी प्रकार का मांसाहारी भोजन या तामसिक आहार
  • बाजार की तली-भुनी या अशुद्ध चीजें
जितिया व्रत का मुख्य दिन (दूसरा दिन - निर्जला उपवास) कुछ भी नहीं (यह पूर्णतः निर्जला उपवास होता है)
  • अन्न का एक भी दाना
  • एक बूंद पानी या किसी भी प्रकार का तरल पदार्थ (दूध, जूस आदि)
पारण का दिन (तीसरे दिन - व्रत खोलना)
  • सूर्योदय के बाद पारण करना
  • भीगे हुए कच्चे चने और खीरे के टुकड़े
  • पारंपरिक व्यंजन जैसे नोनी का साग, झोर-भात, पूरियां, खीर और ठेकुआ
  • सूर्योदय से पहले कुछ भी खाना
  • बिना स्नान किए या बिना भगवान को भोग लगाए भोजन करना
  • भारी, मसालेदार या बासी भोजन (तुरंत खोलने पर)
सामान्य नियम (पूरे व्रत के दौरान) पूरी तरह शुद्ध, सात्विक और घर का बना ताजा भोजन
  • मांस, मदिरा, अंडे और नशीली वस्तुएं
  • व्रत के भोजन में सामान्य बर्तनों का उपयोग (व्रत के लिए अलग बर्तन इस्तेमाल होते हैं)

नहाय-खाय (पहला दिन) के दिन क्या खाया जाता है?

जितिया व्रत की शुरुआत 'नहाय-खाय' से होती है। इस दिन व्रती महिलाएं स्नान करने के बाद शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। इस दिन मुख्य रूप से नोनी का साग और मड़ुआ की रोटी खाने की परंपरा है। इसके साथ ही अरवा चावल (बिना उबले चावल) और कद्दू की सब्जी बनाई जाती है। भोजन में सेंधा नमक या सामान्य नमक का उपयोग परंपरा के अनुसार किया जाता है।

जितिया व्रत का दूसरा दिन

व्रत के मुख्य दिन महिलाएं बिना कुछ खाए और एक बूंद पानी पिए पूरे 24 घंटे का निर्जला उपवास रखती हैं। दिनभर पूजा-पाठ, कथा सुनने और संतानों की मंगल कामना में समय बिताया जाता है।

पारण के दिन खाएं जाते हैं ये विशेष व्यंजन

व्रत का पारण सप्तमी या नवमी तिथि (उदया तिथि के अनुसार) को सूर्योदय के बाद किया जाता है। पारण के दिन कई प्रकार के पारंपरिक और स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं, जिन्हें परिवार के सभी सदस्य मिलकर खाते हैं। पारण की शुरुआत आमतौर पर भीगे हुए कच्चे चने और खीरे के टुकड़े से की जाती है। कुछ क्षेत्रों में नोनी का साग और झोर-भात भी खाया जाता है। इस दिन घरों में अलग-अलग पकवान जैसे आटे या मैदे की पूरियां, खीर, ठेकुआ और मौसमी फल परोसे जाते हैं। 

जितिया व्रत में किन चीजों को खाने का परहेज होता है?

जितिया (जिउतिया) व्रत जितना कठिन है, इसके नियम और खान-पान से जुड़े परहेज भी उतने ही सख्त होते हैं। इस दौरान भोजन में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित होता है। व्रत के दिनों में किसी भी प्रकार के मांसाहारी भोजन, अंडे और शराब या नशीली चीजों का सेवन करना मना है। जितिया के दूसरे दिन अन्न के साथ-साथ एक बूंद पानी या किसी भी तरह के तरल पदार्थ (दूध, जूस आदि) का सेवन करना सख्त मना होता है।

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व्रत के इन दिनों में बाजार की खुली हुई चीजें या पैकेटबंद जंक फूड खाने से बचा जाता है। जिस बर्तन में परिवार के अन्य सदस्यों के लिए सामान्य खाना या लहसुन-प्याज वाला खाना बनता है, उसमें व्रत का भोजन नहीं पकाया जाता। व्रत का खाना पूरी तरह अलग और नए या शुद्ध किए गए बर्तनों में बनता है। साथ ही सूरज उगने से पहले कुछ भी खाना वर्जित है।

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। जितिया व्रत के खान-पान से जुड़े नियमों के लिए अपने परिवार के बुजुर्गों या पंडित जी की सलाह जरूर लें। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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