हरियाली तीज पर किसी मंदिर में दर्शन करने या किसी धार्मिक शहर की यात्रा करने का प्लान बना रही हैं, तो इस बार जयपुर घूमने जा सकती हैं। जयपुर में तीज माता की शाही सवारी निकलने जा रही है। इस यात्रा की खास बात यह है कि इसे लोग धार्मिक कार्यक्रम की तरह नहीं देखते। शाही सवारी के दौरान शहर का माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो जाता है, हर जगह आपको खूबसूरत सजावट देखने को मिलती है। आज के इस आर्टिकल में हम आपको इस तीज माता की शाही सवारी के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। इस उत्सव के दौरान क्या खास होता है और आपको यहां क्यों घूमने जाना चाहिए, इसके बारे में आप समझ पाएंगी।
जयपुर में कब निकलेगी तीज माता की शाही सवारी?
जयपुर में तीज महोत्सव 15 और 16 अगस्त 2026 को मनाया जाने वाला है। तीजा माता की शाही सवारी दोनों दिन सिटी पैलेस से निकलती है। शाम को 5 बजे आप इस शाही सवारी में शामिल होने के लिए पहुंच सकती हैं। यह सवारी सिटी पैलेस से शुरू होकर त्रिपोलिया बाजार तक जाएगी। यह शहर के प्रमुख रास्तों से होते हुए यह शाही सवारी यहां तक पहुंचेगी।। इसमें शामिल होने के लिए कोई टिकट शुल्क नहीं है, इसलिए आप कहीं से भी इस शाही सवारी का हिस्सा बन सकती हैं।
तीज माता की शाही सवारी क्यों है खास?
गुलाबी नगरी में हर साल निकलने वाली यह सवारी सिर्फ एक धार्मिक जुलूस नहीं है। इस यात्रा में आपको राजस्थान की पारंपरिक संस्कृति को करीब से देखने का मौका मिलेगा। तीज माता की पालकी, हाथी-घोड़े और ऊंट के साथ लोक कलाकार पारंपरिक संगीत और नृत्य करते हुए यात्रा को और भी ज्यादा यादगार बना देते हैं। इस दौरान पूरे रास्ते में आपको बाजार और दुकानें भी खास अंदाज में सजे नजर आएंगे। सवारी को देखने के लिए स्थानीय लोगों की बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ती है। सभी ने पारंपरिक पोषाक पहनी होती है। कई लोग आसपास की इमारतों और छतों से इस शाही सवारी का नजारा देखते हैं। रंग-बिरंगे राजस्थानी परिधान, लोक नृत्य और पारंपरिक संगीत की वजह से इस शाही सवारी में शामिल होना और भी ज्यादा मजेदार हो जाता है।
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शाही सवारी में क्या है खास?
- तीज माता की सजी हुई पालकी
- सजे-धजे हाथी और ऊंट
- घोड़े और रथ
- लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां
- राजस्थानी लोक नृत्य और संगीत
- पारंपरिक बैंड वाले
- रंग-बिरंगे राजस्थानी परिधान में आए लोग
तीज माता की शाही यात्रा की शुरुआत कैसे होती है?
तीज माता की पालकी चांदी की बनी होती है। यह भव्य पालकी सैकड़ों किलो चांदी से बनी होती है, जिसमें बैठकर माता पूरे शहर की यात्रा करती हैं। यात्रा शुरू होने से पहले माता का श्रृंगार किया जाता है। पारंपरिक वस्त्रों के साथ चांदी की पालकी में बिठाने के बाद माता की पूजा होती है और फिर शाही यात्रा की शुरुआत होती है। यात्रा खत्म होने के बाद पालकी और मूर्ति को रात में जयपर के सिटी पैलेस वापस ले जाया जाता है और अगले दिन यहीं से यात्रा की शुरुआत होती है।
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इस यात्रा में आपको विदेशी नागरिक भी बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए नजर आएंगे। आप भी अगर यहां आ रही हैं, तो पहले ही होटल बुकिंग कर लें। ऐसा इसलिए, क्योंकि त्योहारों के दौरान होटल महंगे हो जाते हैं।
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