आजकल के समय में हर किसी ने ट्रेन में सफर किया है, लेकिन क्या आपके मन में कभी एक सवाल आया है, क्या आपने कभी सोचा है कि सबसे पहला महिला कोच किस ट्रेन में बना था? अगर नहीं तो आइए यहां जानते हैं। अपनी रफ्तार, आराम और शाही अंदाज के लिए फेमस 'Deccan Queen' ट्रेन ने पिछले 95 सालों से मुंबई से पुणे के बीच के सफर को आरामदायक बनाया है। यह ट्रेन 1930 में शुरू हुई। इस ट्रेन का सफर आज भी उतना ही खास है, जितना पहले हुआ करता था।

क्यों पड़ा नाम Deccan Queen?

पुणे को प्यार से 'Queen of the Deccan' यानी डेक्कन की रानी कहा जाता है। डेक्कन के पठार पर बसे इस अहम शहर को मुंबई से जोड़ने के लिए जब इस ट्रेन को शुरू किया गया, तो इसी नाम से इसे डेक्कन क्वीन बुलाया गया। देखते ही देखते ये नाम ट्रेन की पहचान बन गया।

डेक्कन क्वीन ने अपनी पहली दौड़ 1 जून, 1930 को लगाई थी। यह आज भी चल रही है और भारत की सबसे पुरानी ट्रेनों में से एक है। उस समय इसे मुंबई से पुणे के बीच एक स्पेशल वीकेंड ट्रेन के तौर पर शुरू किया गया था, ताकि लोग पुणे में होने वाली घुड़दौड़ देखने जा सकें। बाद में इसकी पॉपुलैरिटी इतनी बढ़ी कि इसे रोजाना चलाया जाने लगा।

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इलेक्ट्रिक इंजन से चली पहली ट्रेनों में से एक

डेक्कन क्वीन का इतिहास मुंबई-पुणे रूट के इलेक्ट्रिफिकेशन से भी जुड़ा है। अपने शुरुआती सालों में ही ये ट्रेन इलेक्ट्रिक इंजन से चलने लगी थी, जब मुंबई के आसपास रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण हो रहा था। उस दौर में इलेक्ट्रिक ट्रेन का चलना बहुत बड़ी और मॉडर्न बात मानी जाती थी।

देश को दिया पहला महिला कोच

भारतीय रेलवे में महिलाओं की सेफटी और सुविधा की बात आती है तो डेक्कन क्वीन का नाम सबसे पहले आता है। यह वही ट्रेन है जिसने 1930 में भारत का पहला महिला स्पेशल कोच शुरू किया था। उस समय जब अकेली महिलाओं का ट्रेन में सफर करना आम बात नहीं थी, तब महिलाओं को ज्यादा सेफ और आरामदायक सफर देने के लिए ये पहल की गई थी।

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डाइनिंग कार और घाट का नजारा

इस ट्रेन की एक और पहचान है इसका डाइनिंग कार। उस जमाने में ट्रेन में बैठकर खाना खाना एक लग्जरी माना जाता था और डेक्कन क्वीन अपनी इस सुविधा के लिए काफी फेमस हुई।

इसके अलावा भोर घाट का सफर इस ट्रेन की जान है। मुंबई से पुणे के बीच पश्चिमी घाट, पहाड़, घाटियां, सुरंगें और मानसून में झरनों का नजारा, इस सफर को यादगार बना देता है।

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