बॉलीवुड एक्ट्रेस इशिता दत्ता इन दिनों अपनी मच-अवेटेड फिल्म 'दृश्यम 3' (दृश्यम: द कंक्लूजन) को लेकर खबरों में बनी हुई हैं। थिएटर्स में फिल्म की धमाकेदार स्क्रीनिंग के बीच इशिता ने अपनी पर्सनल लाइफ और मदरहुड से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा शेयर किया है। फिल्म में 'अंजू सालगांवकर' का यादगार रोल निभाने वाली इशिता ने एक पॉडकास्ट के दौरान खुलासा किया कि जब उनका बेटा वायु पेट के दर्द (कॉलिक) से परेशान था, तब बॉलीवुड एक्ट्रेस काजोल की एक आसान सी सलाह ने जादू की तरह काम किया था।

इशिता दत्ता और वत्सल शेठ दो बच्चों- बेटे वायु और बेटी वेदा के माता-पिता हैं। एक पॉडकास्ट में बात करते हुए इशिता ने उस दौर को याद किया जब उनका बेटा बहुत छोटा था और कॉलिक पेन की वजह से लगातार रोता रहता था।

जब इशिता को काम आई काजोल की सीक्रेट टिप

इशिता ने बताया कि जब छोटे वायु का रोना बंद ही नहीं हो रहा था, तो वे काफी घबरा गई थीं। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। इसी दौरान उन्होंने अपनी यह परेशानी काजोल के साथ शेयर की। काजोल, जो खुद दो बच्चों (न्यासा और युग) की मां हैं, ने बिना देर किए तुरंत एक बहुत ही साधारण लेकिन असरदार उपाय बताया।

काजोल ने इशिता को सलाह दी कि वे बच्चे को प्रैम (Pram) में बिठाएं और किसी उबड़-खाबड़ या पथरीली जगह पर धीरे-धीरे घुमाएं। उबड़-खाबड़ रास्ते पर चलने से प्रैम में जो हल्का कंपन पैदा होता है, उससे बच्चे के पेट दर्द में काफी आराम मिलता है।

इशिता ने इस नुस्खे को तुरंत आजमाया और देखा कि वायु को सच में दर्द से बहुत राहत मिली और उसने रोना बंद कर दिया। इशिता ने बताया कि काजोल हमेशा बच्चों के मामलों में बहुत मददगार साबित होती हैं और उनका बच्चों से लगाव भी काफी ज्यादा है।

अजय देवगन और काजोल के साथ इशिता का खास कनेक्शन

इशिता दत्ता और काजोल का रिश्ता केवल एक सलाह तक सीमित नहीं है। दोनों काजोल के पति अजय देवगन के जरिए भी आपस में जुड़े हुए हैं। 'दृश्यम' सीरीज में अजय देवगन 'विजय सालगांवकर' के लीड रोल में हैं और इशिता उनकी बड़ी बेटी का किरदार निभाती हैं।

अभिषेक पाठक के निर्देशन में बनी फिल्म 'दृश्यम 3' इस साल 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इस हिट फ्रेंचाइजी के आखिरी पार्ट में अजय देवगन और इशिता के साथ तबू और श्रिया सरन भी मुख्य भूमिकाओं में वापस लौटे हैं।

निष्कर्ष

मां बनने का सफर हर महिला के लिए नया और चुनौतियों से भरा होता है। चाहे वह छोटे बच्चे के पेट दर्द को शांत करना हो या फिर टीनएज बच्चों की उलझनों को समझना। इशिता दत्ता और काजोल के ये अनुभव बताते हैं कि पेरेंटिंग में धैर्य, सही सलाह और बच्चों को प्यार से सुनना कितना जरूरी है।

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