करियर की दुनिया बाहर से जितनी अच्छी दिखती है, अंदर से उतनी ही कड़वी और चौंकाने वाली होती है। कई बार हम सालों तक मेहनत करते हैं, ठीक से काम करते हैं और अपना 100% देते हैं, लेकिन हमें वो मुकाम नहीं मिलता, जिसके हम हकदार होते हैं। कॉर्पोरेट वर्ल्ड के कुछ ऐसे कड़वे सच हैं जो इंसान को बहुत देर से समझ आते हैं।

कॉर्पोरेट की दुनिया में कैसे करें सर्वाइव?

नौकरीपेशा जिंदगी में कई ऐसे कड़वे अनुभव होते हैं जो हमें तब समझ आते हैं जब बहुत देर हो चुकी होती है। हम सोचते हैं कि कड़ी मेहनत से ही सक्सेस हासिल मिलेगी, लेकिन ऑफिस की पॉलिटिक्स, दिखावा और चालें कुछ और ही कहानी बताती हैं। आइए जानते हैं करियर से जुड़े उन सच के बारे में जानते हैं, जो हर प्रोफेशनल को समय रहते जान लेना चाहिए।

1. नए एम्प्लॉई को वफादार से ज्यादा सैलरी मिलती है

पुराने एम्प्लॉई को कंपनी अक्सर ''taken for-granted'' ले लेती है। सोचती है ये कहीं नहीं जाएगा, 8-10% increment दे दो बस। असल में नया आदमी तो आ रहा है, उसे खींचने के लिए कंपनी को मार्केट रेट देना पड़ता है। इसलिए, 5 साल पुराने एम्प्लॉई से ज्यादा सैलरी 2 साल से काम करने वाले वाले नए एम्प्लॉई को मिल जाती है। यही वजह है कि आजकल लोग हर 2-3 साल में जॉब स्विच करके सैलरी बढ़ाते हैं।

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2. देर तक रुकना भुला दिया जाता है, जल्दी जाना याद रखा जाता है

आपने पूरे महीने 8 बजे तक बैठकर काम किया, किसी ने नोटिस नहीं किया। सबको लगेगा यही तो आपका काम है। एक दिन आप 5:30 बजे निकल गए क्योंकि घर में काम था, तो तुरंत बातें बनने लगेंगी कि आजकल इसका मन नहीं लग रहा या ये तो कामचोर हो गया है। दरअसल, नेगेटिव चीज दिमाग में ज्यादा देर टिकती है और उसी बात को सब नोटिस भी करेंगे।

3. काम से पहले की तारीफ कभी अच्छी नहीं होती

अगर आपका बॉस या साथी जो कभी तारीफ नहीं करता, अचानक आकर बोले कि, 'यार तू तो टीम का हीरो है, तेरे जैसा कोई नहीं; तो समझ जाओ अगली लाइन होगी कि, 'एक छोटा सा काम है, क्या तू कर देगा?' ये तारीफ नहीं बल्कि बात में फंसाने का तरीका होता है। इसका मतलब है कि पहले इमोशनल किया, फिर एक्स्ट्रा काम थमा दिया।

4. हुनर पहचान दिलाता है, नेटवर्क तरक्की

आप बहुत टैलेंटेड हैं, सब जानते हैं, लेकिन आप अकेले अपने केबिन में काम करते रहते हैं। दूसरा बंदा एवरेज काम करता है पर लंच में बॉस के साथ बैठता है, मीटिंग में बोलता है, सबको जानता है। प्रमोशन के टाइम पर बॉस उसी को याद रखेगा जिसे वो रोज देखता है। हुनर से आपकी इज्जत बनेगी, पर कुर्सी नेटवर्क से मिलेगी।

5. बेहतरीन काम करने वाले नहीं, दिखने वाले आगे बढ़ते हैं

दो लोग हैं। एक चुपचाप दिन-रात बढ़िया रिपोर्ट बनाता है। दूसरा एवरेज रिपोर्ट बनाता है, मेल पर सबको CC करता है, मीटिंग में बोलता है "मैंने ये रिपोर्ट बनाई है"। बॉस को दूसरा वाला ज्यादा मेहनती लगेगा क्योंकि वो दिख रहा है। कॉर्पोरेट में काम करना ही काफी नहीं, काम को दिखाना भी आना चाहिए।

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6. काम पीछे छूट जाता है, राजनीति आगे निकल जाती है

आपने 6 महीने लगाकर एक प्रोजेक्ट को नंबर 1 बना दिया। आपका साथी जो बॉस का खास है, उसने 2 मीटिंग में बॉस की हां में हां मिलाकर आपका क्रेडिट ले लिया। आपका रिजल्ट आने में 6 महीना लगा, उसकी पॉलिटिक्स 6 दिन में काम कर गई। परफॉर्मेंस धीरे चलती है, पॉलिटिक्स तेज।

7. बेहतरीन काम करने वालों को पैसा नहीं, और काम मिलता है

आप टॉप परफॉर्मर हैं, तो मैनेजर सोचेगा, 'ये तो कर ही लेगा, इसी को दे दो"। आपको बोनस या सैलरी बढ़ाने की जगह और 2 प्रोजेक्ट दे दिए जाएंगे, और जो काम नहीं करता, उसे कोई काम नहीं देता क्योंकि डर है कि वो बिगाड़ देगा। मतलब ईमानदारी की सजा और ज्यादा काम।

करियर की इन कड़वी सच्चाइयों को समय रहते समझ लेना ही समझदारी है। सिर्फ मेहनत काफी नहीं होती, कॉर्पोरेट की नब्ज पहचानना और अपनी वैल्यू समझना भी बहुत जरूरी है। अगर आप ये बातें वक्त रहते सीख लेंगे, तो नौकरी में होने वाले शोषण और निराशा से काफी हद तक बच जाएंगे। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।