बिना दवा के बीमारी को ठीक करने का कारगर तरीका है Cupping Therapy

By Pooja Sinha22 Nov 2017, 18:32 IST

कपिंग थेरेपी alternative medicine का एक प्राचीन रूप है, जिसमें स्किन पर एक local suction बनाया जाता है। चिकित्सकों का मानना है कि इससे blood circulation बढ़ता है और treatment में help मिलती है। Suction में गर्मी (आग) या mechanical devices (हाथ या बिजली के पंप) का उपयोग कर किया जाता है। एक तरह से देखा जाए तो कपिंग मसाज का inverse है, इसमें muscles पर दबाव डालने की जगह suction skin, tissues और मसल्‍स को ऊपर की और खींचने के लिए दबाव का उपयोग करते हैं। आइए जानें, कपिंग थेरेपी क्या है, कितने प्रकार की होती हैं और इससे क्या फायदे हैं।

कपिंग थेरेपी के प्रकार

कपिंग दो प्रकार की होती हैं, ड्राई कपिंग और वैट कपिंग। इसमें से वेट कपिंग ज्यादा famous है। सामान्य तौर पर वैट कपिंग therapeutic दृष्टिकोण पर आधारित होती है और ड्राई कपिंग चिकित्सीय तथा आराम पहुंचाने वाली पद्धति पर काम करती है।

कपिंग की हेल्‍प से कई health problems से निजात पाई जा सकती है, जैसे यह body से विषाक्त पदार्थों को बाहर करने में हेल्‍प करती है। यह न सिर्फ एक पारंपरिक चीनी चिकित्सा पद्धति है बल्कि इस इलाज को प्राचीन मिस्र, उत्तर अमेरिकी भारतीयों, यूनानियों द्वारा तथा अन्य एशियाई और यूरोपीय देशों में इस्तेमाल किया जाता है।

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कपिंग थेरेपी के फायदे

  • कपिंग थेरेपी के उपयोग का एक प्रमुख कारण यह है कि यह pain से आराम दिलाता है। कपिंग वास्तव में सॉफ्ट टिशू को लक्ष्य बनाता है तथा सूजन और दर्द वाले स्थान पर दबाव डालता है। इससे blood circulation बढ़ता है। यह body में गहराई तक टिशू को आराम पहुंचाता है।
  • कपिंग लंग्‍स और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को उत्तेजित करता है ताकि बलगम बाहर निकल सके। खांसी के द्वारा body के अतिरिक्त कफ (बलगम) को बाहर निकाला जाता है। इस थेरेपी के उपयोग से भारी सर्दी, एलर्जी के लक्षणों और कफ से तीव्रता से आराम पाया जा सकता है।
  • कपिंग से तनी हुई मसल्‍स से दबाव दूर हो जाता है। जिसका आपकी health पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है और यही कारण है कि कपिंग थेरेपी अक्सर इतनी प्रभावी होती है।
  • बॉडी के टिशू में toxins होने से ब्‍लड सर्कुलेशन उचित तरीके से नहीं होता। जब ब्‍लड अपने साथ टॉक्सिन्स लेकर इस क्षेत्र से गुजरता है तो कपिंग इस ठहराव में सुधार लाता है। यह dead cells में आये हुए कचरे को साफ़ करने का काम भी करता है। ये सभी तत्व प्राकृतिक रूप से बाहर निकाल दिए जाते हैं।
  • पाचन से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए भी कपिंग एक लोकप्रिय थेरेपी बन गयी है। इसमें Irritable bowel syndrome या आईबीएस भी शामिल है।
  • कपिंग थेरेपी में प्रभावित क्षेत्र पर blood circulation बढ़ाया जाता है ताकि नई blood vessels बनाई जा सकें। यही कारण है कि आजकल एथलिट इस थेरेपी का अधिक उपयोग करते हैं। बहुत अधिक कसरत करने के बाद यह body की तीव्रता से normal करता है!

बॉलीवुड स्‍टार भी इस थेरेपी से बहुत प्रभावित है। तो आप कब ट्राई कर रही हैं कपिंग थेरेपी।

Credits:

Editor: Syed Afraz   

Producer: Prabjot Kaur