गणेश उत्सव की शुरुआत जितनी धूमधाम से होती है, बाप्पा की विदाई का मौका उतना ही भावनात्मक होता है। भक्त अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करते हैं, कोई डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन तो कोई दस दिनों तक बप्पा की सेवा करता है, लेकिन अनन्त चतुर्दशी का दिन गणेश विसर्जन का सबसे मुख्य अवसर माना जाता है। इस दिन पूरे आदर और भक्ति भाव के साथ गणपति जी का विसर्जन कर उन्हें अगले साल फिर आने का निमंत्रण दिया जाता है। इसके लिए हमने ज्योतिषाचार्य सिद्धार्थ एस कुमार से भी बात की है। पढ़ते हैं आगे...
अनन्त चतुर्दशी 2026: तिथि और शुभ समय
अगर आप 10वें दिन बप्पा का विसर्जन करने जा रहे हैं, तो इस साल गणेश विसर्जन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को किया जाएगा। पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि की पूरी जानकारी इस प्रकार है-
| नाम | शुभ समय |
| चतुर्दशी तिथि की शुरुआत | 24 सितंबर 2026 को रात 11:18 बजे |
| चतुर्दशी तिथि की समाप्ति | 25 सितंबर 2026 को रात 11:06 बजे |
अनन्त चतुर्दशी का महत्व
भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनन्त चतुर्दशी या अनन्त चौदस कहते हैं। इसी दिन दस दिनों से चल रहे गणेश उत्सव का समापन होता है। यह दिन न सिर्फ बप्पा की विदाई का है, बल्कि भगवान विष्णु के अनन्त रूप की आराधना के लिए भी सबसे पवित्र माना जाता है। इस दिन भक्त दिनभर का उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु के साथ माता यमुना व शेषनाग जी की पूजा करते हैं।
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अनन्त सूत्र बांधने की परंपरा
अनन्त चतुर्दशी के दिन अनन्त सूत्र बांधने का विशेष नियम है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस सूत्र में साक्षात भगवान विष्णु का वास होता है।
- पूजा के बाद पुरुष इसे अपने दाएं हाथ और महिलाएं अपने बाएं हाथ में बांधती हैं।
- इस धागे में कुल 14 गांठें लगाई जाती हैं।
- ये 14 गांठें पौराणिक मान्यताओं के 14 लोकों का प्रतीक मानी जाती हैं।
- माना जाता है कि इसे धारण करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
विसर्जन करते समय रखें इन बातों का ध्यान
गणपति विसर्जन केवल मूर्ति को पानी में प्रवाहित करना नहीं है, बल्कि यह एक धार्मिक विधि है।
- विसर्जन से पहले बप्पा की अंतिम आरती करें और उन्हें मोदक व लड्डू का भोग लगाएं।
- अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना करें और परिवार में सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
- मूर्ति को सम्मान के साथ किसी पवित्र जल स्रोत में ही प्रवाहित करें।
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निष्कर्ष
गणेश विसर्जन और अनन्त चतुर्दशी का संगम धर्म और आस्था का अद्भुत प्रतीक है। 25 सितंबर 2026 को पूरे विधि-विधान और शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश को विदा करें और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अनन्त सूत्र जरूर बांधें।
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