आज के दौर में सब कुछ बहुत तेजी से बदल रहा है और युवाओं का जीवन भी इस बदलाव से अछूता नहीं है। अपनी आंखों में अनगिनत सपने संजोए वे मंजिल की तलाश में निकल पड़ते हैं, लेकिन छोटी-सी असफलता उनका मनोबल तोड़ देती है। हालांकि, यह अच्छी बात है कि आज के युवा खुद अपनी पहचान बनाना चाहते हैं और इसके लिए निरंतर प्रयास भी करते हैं, फिर भी जब उन्हें सफलता नहीं मिलती, तो ऐसी स्थिति में वे यह सोचकर गहरी चिंता और अवसाद में डूब जाते हैं कि आखिर उनसे क्या भूल हो गई?

युवाओं को यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि ईमानदारी से की जाने वाली कोशिश आपके लिए कामयाबी के साथ खुशियों के भी द्वार खोल देती है। ऐसा कैसे हो सकता है? इस बारे में हमें मोटिवेशनल स्पीकर एवं यूथ मेंटोर यश तिवारी बता रहे हैं।

हार भी स्वीकारें

अगर कभी जीवन के किसी मोड़ पर आपको नाकामी का सामना करना पड़े, तो घबराएं नहीं, बल्कि आपके मन में जीवन के प्रति खेल भावना जैसा नजरिया होना चाहिए। यह संभव नहीं है कि हर क्रिकेट मैच में केवल आप ही शतक बनाएं, जिस तरह बैटिंग के दौरान आप लगातार रनों की बरसात करके लोगों की प्रशंसा बटोर रहे होते हैं, उसी तरह कभी-कभी जीरो पर आउट हो जाना भी उतना ही स्वाभाविक है। इसके बाद अपनी नाकामी को लेकर आपके मन में कोई मलाल नहीं होना चाहिए, बल्कि दोबारा पूरे उत्साह के साथ अगले मैच की तैयारी में जुट जाएं। जब आप जीत की तरह हार को भी सहजता से स्वीकारना सीख जाएंगे, तो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी खुश रहेंगे।

मार्क्स नहीं हैं सब कुछ

जब परीक्षा का रिजल्ट आने वाला होता है, तो उस दौरान स्कूल-कॉलेज के सभी छात्र डर जाते हैं। उनके मन में एक अलग ही तरह का तूफान चल रहा होता है। यहां तक कि परीक्षा की तैयारी के दौरान हॉल में जाने से पहले टॉपर स्टूडेंट्स भी बार-बार नोट्स और किताबें देख रहे होते हैं, क्योंकि उनके मन में इस बात का भय बना होता है कि अगर मुझे पिछली बार से कम मार्क्स मिले, तो यह मेरे लिए अपमानजनक बात होगी। हर छात्र के मन में ऐसा भय होता है कि रिजल्ट के मामले में कहीं मैं पिछड़ न जाऊं। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि परीक्षा के रिजल्ट के बारे में सोचकर पेरेंट्स बच्चों से कहीं ज्यादा चिंतित होते हैं।

बढ़ाएं बच्चों का मनोबल

अधिकतर परिवारों में बच्चों की काबिलीयत को परीक्षा में आने वाले अंकों से मापा जाता है। कोचिंग क्लासेज में भी बच्चों को कई बार परीक्षा के रिजल्‍ट के नाम पर इतना डराया जाता है कि वह भय युवावस्था तक उनके मन में बना रहता है। ऐसे में आपको बच्‍चों को यह समझाना चाहिए कि मार्कशीट में दर्ज मार्क्‍स केवल एक परीक्षा में दी गई परफॉर्मेंस बताती है। तुम्हारी असली योग्यता इस बात में है कि तुम अपने मन को मजबूत बनाकर अपनी रुचि से जुड़े क्षेत्र में आगे बढ़ने की कोशिश जारी रखो।

पेरेंट्स की जिम्मेदारी

आज की युवा पीढ़ी के मन में कई बातों को लेकर अंतर्द्वंद्व चल रहा होता है, इसलिए सबसे पहले अपने बच्चों का विश्वास जीतना सीखें। अब तक मनोवैज्ञानिकों द्वारा किए गए कुछ अध्ययनों से भी तथ्य सच साबित हो चुका है कि कठोर अनुशासित माहौल में पले-पढ़े बच्चे कई बार विद्रोही बन जाते हैं। अगर कभी आपका यंग बच्‍चा दोस्तों के साथ देर शाम की पार्टी में जाना चाहे, तो उसे मना करने के बजाय उसके साथ गाड़ी और ड्राइवर भेजें। अगर ऐसा संभव न हो तो उसके उन दोस्तों के नंबर और जहां वह जा रहा है, वहां की लोकेशन अपने फोन में सेव कर लें। साथ ही बच्‍चे को अल्‍कोहल लेकर ड्राइविंग से होने वाले नुकसान और एसटीडी (सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज) के खतरों से भी आगाह कराएं। आपके ऐसे संतुलित व्यवहार से उनके मन में सहज ढंग से ऐसी भावना विकसित होगी कि मम्मी-पापा को हमारी सुरक्षा की चिंता रहती है, फिर भी वे हमें पूरी आजादी देते हैं, इसलिए हमें कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचे।

सामंजस्य है जरूरी

आजकल कॉलेज स्टूडेंट्स या नई जॉब की शुरुआत करने वाले युवाओं के सामने नए हालात होते हैं, जिन्हें समझने में उन्हें थोड़ा वक्त लगता है। ऐसी स्थिति में उन्हें धैर्य नहीं खोना चाहिए। अगर आप घर से बाहर रहकर इंजीनियरिंग, एमबीए या कोई अन्य प्रोफेशनल कोर्स कर रहे हों, तो लक्ष्य पर अपना ध्यान केंद्रित करें। कई बार पेरेंट्स या घर की याद आती है तो उनसे नियमित रूप से बातचीत करें। हो सकता है, आपको अपने किसी रूम मेट या दोस्त की आदतें नापसंद हों, ऐसी स्थिति में आपको परिपक्व नजरिया अपनाना चाहिए, क्योंकि दुनिया में हर व्यक्ति का स्वभाव दूसरे से अलग होता है। सभी को अपने अनुकूल बना पाना असंभव है, इसलिए पहले ईमानदारी से आत्म-निरीक्षण करते हुए अपनी कुछ आदतों में बदलाव लाकर दूसरों के साथ एडजस्ट करने की कोशिश करें।

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और भी गम हैं...

आजकल युवाओं के बीच गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड का चलन इतना आम हो गया है कि इसके बिना वे दोस्तों के बीच खुद को अलग-थलग महसूस करते हैं। ऐसे रिश्तों में पार्टनर की नाराजगी या ब्रेकअप एक बड़ी समस्या है क्योंकि इसके बाद लड़के/लड़कियां इतने उदास हो जाते हैं कि कई बार डिप्रेशन जैसे लक्षण विकसित होने लगते हैं। इससे वे पढ़ाई में भी पिछड़ने लगते हैं, लेकिन जो आपको छोड़कर चला गया, उसकी याद में आंसू बहाकर अपना कीमती वक्त बर्बाद करने के बजाय सेहत और करियर पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

भले ही आपको इस बात पर यकीन न हो, लेकिन जब आप सकारात्मक तरीके से सोचना शुरू करेंगे, तब आपको खुद ही इसका असर महसूस होगा। सभी के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार करने का सबसे बड़ा फायदा यही होता है कि आपकी जान-पहचान और दोस्ती हमेशा अच्छे लोगों से होगी, जो जीवन के हर मुश्किल दौर में आपके लिए मददगार साबित होंगे।

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निराशा दूर करने के 5 गोल्‍डन रूल्स

  • अपनी क्षमताओं को पहचानें।
  • लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें।
  • स्वस्थ खान पान अपनाएं।
  • भावनात्मक संतुलन कायम रखें।
  • सुबह जल्दी उठें, योग और ध्यान को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

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