बच्चों को हमेशा कच्ची मिट्टी के घड़े के समान माना जाता है, मतलब आप उन्हें जिस भी आकार में ढालना चाहती हैं ढाल सकती हैं। ऐसे में कई बार पेरेंट्स बच्चों के सामने ऐसी बातें कर देते हैं जो उनके आत्मविश्वास में कमी ला सकती हैं और बच्चे को आगे बढ़ने में भी परेशानी आती है। बच्चे पेरेंट्स को देखकर कई बातें सीखते हैं। इसलिए, ध्यान रखें कि आप अपने बच्चों के सामने क्या कहते हैं। आप किस तरह से बच्चे को किसी काम के लिए प्रेरित करते हैं या फिर अगर आप बार-बार उसकी आलोचना करते हैं तो उसका बच्चे पर कैसा असर हो सकता है? माता-पिता का आपसी मतभेद भी बच्चे में मन में नकारात्मक प्रभाव डालता है। वहीं ऐसी कुछ बातें हैं जो आपको कभी भी बच्चे के सामने नहीं बोलनी चाहिए, नहीं तो उसका आत्मविश्वास कम हो सकता है। आइए जानें उन बातों के बारे में।
बच्चे के सामने न करें गलत शब्दों का इस्तेमाल
आपके लिए बहुत जरूरी है कि आप घर पर अपने बच्चे के सामने कभी भी अपशब्दों का इस्तेमाल न करें। आपको मजाक में भी बच्चे को अपशब्द नहीं बोलने चाहिए। अगर आप बार-बार ऐसा करते हैं तो धीरे-धीरे बच्चे का आत्मविश्वास कम होने लगता है और बच्चा भी आपकी ऐसी भाषा को सीखने लगता है और बाहर इसका इस्तेमाल करने लगता है। कई बार बच्चे को उन शब्दों का मतलब भी नहीं पता होता है, लेकिन आम बोलचाल की भाषा में वो इस्तेमाल करने लगता है।
'तुम ये काम कभी नहीं कर पाओगे'
कई बार पेरेंट्स बच्चे के सामने किसी काम के लिए ऐसा बोल देते हैं कि 'तुम ये काम कभी नहीं कर पाओगे ' और ये शब्द बच्चे के लिए पत्थर की लकीर बन जाते हैं। बच्चे को धीरे-धीरे ऐसा लगने लगता है कि वो कोई भी काम कुशलता से नहीं कर सकता है और उसके आत्मविश्वास में कमी आने लगती है। अगर आप भी अपने बच्चों से अक्सर ऐसी बातें कहती हैं, तो यकीन मानिए बच्चे का आत्मविश्वास इतना कम हो सकता है कि वो बाहर भी खुद को कोई भी काम न कर पाने वाला समझने लगता है। अगर बच्चे को किसी काम में मुश्किल हो रही है तो ऐसा कहने के बजाय उसकी मदद करना ज्यादा बेहतर है।
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'बच्चे होने से पहले जीवन में कितना सुकून था'
कई बार देखा जाता है कि पेरेंट्स बच्चों की शरारत को देखकर इतने परेशान हो जाते हैं कि उनके आगे ही ऐसी बातें करने लगते हैं, कि बच्चे होने से पहले जीवन में कितना सुकून था। दरअसल ऐसे शब्दों का बच्चे के मन-मस्तिष्क में बहुत गहरा असर होता है और बच्चे का आत्मविश्वास धीरे-धीरे कम होने लगता है। यही नहीं अगर बच्चे ऐसी कोई भी बात पेरेंट्स के मुंह से सुन लेते हैं तो वे खुद को उनके ऊपर बोझ समझने लगते हैं और रिश्ते में दूरियां भी आने लगती हैं।
'जब मैं बोल रही हूं तो तुम बिलकुल चुप रहो'
अक्सर देखा जाता है कि बच्चे जब पेरेंट्स के सामने अपनी बात रखते हैं तो वो कुछ इस तरह की प्रतिक्रिया देते हैं कि जब वो बोल रहे हैं तो बच्चे को बीच में बोलने की जरूरत नहीं है। ऐसे में बच्चे का आत्मविश्वास काफी कम होने लगता है। यही नहीं ऐसा करने से बच्चा अपने मन की बातें पेरेंट्स के सामने नहीं करता है और कई जरूरी बातें भी छुपाने लगता है।
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'तुम उसकी तरह कभी नहीं बन सकते'
आमतौर पर पेरेंट्स की आदत होती है कि वो अपने बच्चे की तुलना किसी और बच्चे से करते हैं। बच्चे की किसी और से तुलना करना और ये कहना कि 'तुम उसकी तरह कभी नहीं बन सकते', बच्चे के मन में आत्मविश्वास की कमी आने लगती है। बच्चे की किसी अन्य बच्चे के साथ तुलना करना गलत है चाहिए क्यों आ उसकी तुलना उसके सिबलिंग से ही कर रही हैं, तब भी यह ठीक नहीं है। बच्चे की तुलना दूसरों से करने के बजाय उसे प्रेरणादायक शब्द कहें और हमेशा यही सिखाएं कि बच्चा हर काम निपुणता से कर सकता है और कोई भी उससे बेहतर नहीं है।
अगर आप भी बच्चे के सामने इनमें से कोई भी शब्द बोलती हैं तो अपनी इस आदत को तुरंत बदल लें। आपकी ये गलती बच्चे के भविष्य तक को खराब कर सकती है।
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