भाद्रपद मास की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक पितृ पक्ष मनाया जाता है। इस साल ये दिन 26 सितंबर से 10 अक्टूबर चलेंगे। इन सोलह दिनों में लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म करते हैं। मान्यता है कि इस दौरान पूर्वज सूक्ष्म रूप में धरती पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा दिए गए अन्न-जल को ग्रहण करते हैं। इसलिए श्राद्ध का भोजन तैयार करते समय अत्यधिक सावधानी और शुद्धता बरतने की आवश्यकता होती है। वाराणसी के पंडित राघवेंद्र तिवारी के अनुसार, अगर श्राद्ध की थाली में नियमों के विरुद्ध जाकर कुछ विशेष सब्जियां या मसाले शामिल कर दिए जाएं, तो पितृ नाराज हो जाते हैं और घर में पितृ दोष लग सकता है।

क्यों जरूरी है श्राद्ध में सात्विकता का ध्यान रखना?

पंडित राघवेंद्र तिवारी बताते हैं कि पितृ पक्ष का मुख्य उद्देश्य पूर्वजों को तृप्त करना है। इसके लिए भोजन पूरी तरह से सात्विक, पवित्र और दोषमुक्त होना चाहिए।

रसोई में जरा सी भी लापरवाही या वर्जित चीजों का प्रयोग श्राद्ध के पूर्ण फल को नष्ट कर सकता है। भोजन बनाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता का भाव होना चाहिए, ताकि पितर प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दें।

श्राद्ध की थाली में कौन सी सब्जियां नहीं शामिल करनी चाहिए?

पंडित के अनुसार, पितृ पक्ष के भोजन में तामसिक और जमीन के नीचे उगने वाली कुछ सब्जियों का प्रयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

  • कंदमूल और जमीन के नीचे उगने वाली सब्जियां: आलू, मूली, गाजर, शलजम, चुकंदर और अरबी को श्राद्ध की थाली में शामिल नहीं करना चाहिए।
  • अन्य वर्जित सब्जियां: बैंगन, कटहल, पत्तागोभी और काले चने जैसी चीजें भी इस दौरान बनाना अशुभ माना जाता है।

श्राद्ध में किन मसालों और अनाजों का न करें प्रयोग?

श्राद्ध के भोजन में प्याज-लहसुन का प्रयोग तो पूरी तरह वर्जित है ही, साथ ही लाल मिर्च, काला नमक और राई का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए। लाल मिर्च की जगह काली मिर्च और सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग करना उत्तम होता है।

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पंडित राघवेंद्र तिवारी के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में मसूर की दाल, चने की दाल, कुलथी और राजमा नहीं पकाना चाहिए। इसके स्थान पर मूंग की दाल या उड़द की दाल का उपयोग करना सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि उड़द के बड़े पितरों को विशेष प्रिय होते हैं।

पितरों की कृपा पाने के लिए श्राद्ध के इन नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है। जब आप पूरी शुद्धता और सादगी के साथ पितरों के लिए भोग तैयार करते हैं, तो वे प्रसन्न होकर आपके पूरे परिवार को आरोग्य, शांति और संपन्नता का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

पंडित के द्वारा बताई गई चीजों के अनुसार श्राद्ध की थाली को तैयार करते समय ध्यान रख सकती हैं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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