हमारी भारत की धरती ऋषि-मुनियों और वीरों की धरती कही जाती है। हमारे इतिहास में कई ऐसी वीरांगनाएं हुई हैं, जिनके साहस और जज्बे के आगे बड़े-बडे़ धुरंधरों के घुटने टेक दिया। 'महिलाएं जिनके हौसले ने बदल दिया इतिहास' सीरीज में हम रोजाना ऐसी ही वीरांगनाओं की कहानी आप तक पहुंचा रहे हैं। कर्नाटक की ओनाके ओबव्वा भी ऐसी ही वीर महिला थीं। उन्हें चित्तौड़गढ़ की रणचंडी भी कहा जाता है। उनके पास न तो विशाल सेना थी, न कोई राजसी वैभव था....लेकिन देशप्रेम और मातृभूमि का रक्षा का संकल्प इतना अटूट था कि उन्होंने अकेले ही 18वीं सदी में मैसूर के मुस्लिम शासक हैदर अली की सेना को चित्रदुर्ग के किले में घुसने से रोका और अकेले उनका सामना किया। हथियार के नाम पर उनके साप सिर्फ एक 'ओनाके' यानी अनाज कूटने वाला मूसल था और इस मूसल से ही उन्होंने दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए। चलिए उनके बारे में जानते हैं।

कौन थीं ओनाके ओबव्वा?

ओनाके का नाम चित्रदुर्ग के किले से बेहद गहराई से जुड़ा है। इतिहासकारों की मानें तो ओनाके ओबव्वा 18वीं सदी के दौरान चित्रदुर्ग के एक सैनिक नहाले मुड्डा की पत्नी थीं। कहाले का नाम किले पर नजर रखना और कुछ भी संदिग्ध दिखने पर सैनिकों को सावधान करना था। उपलब्ध ऐतिहासित विवरणों के मुताबिक, उनकी जिंदगी के बारे में बहुत विस्तार में खास जानकारी नहीं मिलती है, लेकिन खासतौर पर कर्नाटक की लोक परंपराओं में उनकी कहानियां संरक्षित हैं।

जब हैदर अली ने बनाई थी चित्रदुर्ग के किले में घुसने की योजना

बताया जाता है कि आज के कर्नाटक में मौजूद चित्रदुर्ग के मजबूत किले पर 18वीं सदी में मदकारी नायक का शासन था। मुस्लिम शासक हैदर अली ने कई बार चित्रदुर्ग के किले पर कई बार कब्जा करने की कोशिश की थी, लेकिन पत्थरों से बना यह किला दुश्मन की सेना के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती था। बताया जाता है कि एक बार हैदर अली को खबर मिली कि कि चित्रगुप्त किले के एक बड़े पत्थर में छेद हो गया है और वहां से एक आदमी अंदर जा सकता है। इसके बाद हैदर अली ने अपनी सेना को धीरे-धीरे किले के अंदर भेजने और हमला करने की योजना बनाई। कई जगह यह भी कहा जाता है कि किले की दीवार में एक गुप्त छेद था और एक जासूस ने हैदर अली को खबर दी थी कि उस छेद से अंदर जाया जा सकता है।

ओनाके की वीरता के आगे पूरी सेना ने टेक दिए थे घुटने

बताया जाता है कि एक बार ओनाके अपने पति के लिए दोपहर के वक्त खाना लेकर जा रही थीं और उन्होंने देखा कि दुश्मन के सैनिक एक छेद से चुपचाप अंदर की तरफ घुस रहे थे। तभी ओनाके ने मोर्चा संभालने का फैसला लिया। उसने चुपचाप रसोई से एक 'ओनाके (धान से दाने अलग करने के लिए इस्तेमाल होने वाला लंबा लकड़ी का मूसल) उठाया और दुश्मन के सैनिकों के सामने चट्टान बनकर खड़ी हो गईं और चालाकी से कई दुश्मनों को मार गिराया। कहा जाता है कि जब उनके पति वहां पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि ओनाके कई सैनिकों को मार चुकी थीं और वहां उनके शव पड़े थे। ऐसा बताया जाता है कि उसी में से एक आखिरी सैनिक ने ओनाके को मार दिया था। हालांकि, कई इतिहासकारों ने कहा है कि सैनिकों ने ओनाके को घायल कर दिया था और उसी रात उन्हें भी जान गंवानी पड़ी थी।

 

'महिलाएं जिनके हौसले ने बदल दिया इतिहास' सीरीज में हम ऐसी ही साहसी और दुनिया को बदलने का हौसला रखने वाली महिलाओं की कहानी आप तक पहुंचाते रहेंगे। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। साथ ही ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।