भारत देश में सुबह की शुरुआत कड़क चाय के साथ ही होती है। नुक्कड़ की टपरी से लेकर आलीशान कैफे और रेस्टोरेंट तक, अदरक, इलायची, लौंग वाली मसाला चाय हर जगह मेनू में देखने को मिल जाती है। क्या आपने कभी सोचा है कि पानी में उबलने वाली चाय की पत्तियों में मसालों का यह स्वाद कैसे घुला? अगर नहीं, तो आज हम आपको मसाला टी के इतिहास के बारे में बताएंगे।
मसाला चाय का दिलचस्प इतिहास
भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत चाय बोर्ड का आधिकारिक डिजिटल पोर्टल के अनुसार, शुरुआत में चाय रोजाना पिया जाने वाला ड्रिंक नहीं था, बल्कि इसका इस्तेमाल औषधीय काढ़े के रूप में किया जाता था। इन्हीं आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से लेकर अंग्रेजों की व्यापारिक नीतियों तक, मसाला चाय के कई पड़ाव देखने को मिले। आइए जानते हैं पहली मसाला चाय के इतिहास के बारे में।
काढ़े से हुई मसाला चाय की शुरुआत
मसाला चाय का इतिहास राजा-महाराजाओं के दौर से जुड़ा है। आज से लगभग 5000 साल पहले भारतीय उपमहाद्वीप के राजघरानों में एक खास ड्रिंक बनाया जाता था, जिसे जड़ी-बूटियों का काढ़ा कहते थे। इस काढ़े में अदरक, काली मिर्च, लौंग, दालचीनी और तुलसी जैसी कई आयुर्वेदिक चीजें मिलाई जाती थीं। इसे बनाने के पीछे का मुख्य कारण राजाओं को सेहतमंद रखना था। उस समय इस काढ़े में चाय पत्ती और दूध का इस्तेमाल नहीं किया जाता था।
ब्रिटिश काल और असम में चाय की खोज
अंग्रेजों के आने के बाद चाय का व्यापारिक और सांस्कृतिक रूप बदला। असम की स्थानीय सिंहपो जनजाति के लोग चाय की पत्तियों का सेवन करते थे। सन 1830 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के असम में जंगली चाय के पौधों की खोज की, जिसके बाद से ही भारत में बड़े पैमाने पर चाय के बागान लगाए गए।
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दूध और मसाले वाली चाय का क्रेज
सन 1900 के आसपास 'इंडियन टी एसोसिएशन' ने भारतीय बाजारों में चाय बेचना शुरू किया। चाय की महंगी पत्तियों के खर्च से बचने के लिए कुछ भारतीय दुकानदारों और हलवाइयों ने चाय पत्ती के साथ दूध, चीनी और अपने पारंपरिक भारतीय मसालों को मिलाकर एक नया ड्रिंक तैयार किया। इसके बाद से ही भारत में मसाला चाय की शुरुआत हुई और लोगों ने दूध के साथ मसाले और चाय पत्ती मिलाकर चाय पीना शुरू कर दिया।
सीटीसी (CTC) तकनीक से बढ़ा चाय का उत्पादन
1950 में 'क्रश, टियर, कर्ल' यानी CTC मशीन के आने के बाद चाय पत्ती का उत्पादन बहुत तेजी से बढ़ गया, जिससे चाय के दाम काफी कम हो गए। इस कड़क दानेदार चाय पत्ती के साथ जब भारतीय मसालों और दूध को उबाला गया, तो एक गाढ़ा, खुशबूदार और पसंदीदा ड्रिंक बनकर तैयार हुआ। आज यही भारतीय मसाला चाय हर घर में देखने को मिलती है।
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मसाला चाय केवल पानी, दूध और पत्ती का मिश्रण भर नहीं है, बल्कि यह भारत के इतिहास और संस्कृति की पहचान बन चुकी है। आयुर्वेदिक काढ़े से शुरू होकर अब यह दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचने वाली सबकी पसंदीदा मसाला चाय बन गई है।यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।
(Image credit: magnific)
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