छिपकली एक फुर्तीला जीव है, जो अपनी सुरक्षा के लिए कई तरीके आजमाता है। जब भी किसी खतरे या शिकारी से इसका सामना होता है, तो यह अपनी जान बचाने के लिए एक हैरान कर देने वाली तकनीक अपनाती है। जी हां, छिपकली अपनी पूंछ को अपने शरीर से अलग कर देती है। इस प्रक्रिया को विज्ञान की भाषा में 'ऑटोटोमी' कहा जाता है। कटकर अलग होने के बाद भी पूंछ कई मिनटों तक जमीन पर तड़पती और हिलती रहती है। पहली नजर में यह दृश्य अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक दिलचस्प साइंस छिपी है। जानते हैं आगे...
कटने के बाद भी पूंछ में क्यों बनी रहती है हलचल?
पूंछ के कटकर अलग होने और उसके बाद भी हिलते रहने का सीधा संबंध छिपकली के नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र से जुड़ा है।
खास हड्डियों की बनावट: छिपकली की रीढ़ की हड्डी के पिछले हिस्से और पूंछ के जोड़ों में एक खास 'फ्रैक्चर प्लेन' यानी कमजोर बिंदु होता है। जब कोई पूंछ को पकड़ता है, तो छिपकली अपनी मांसपेशियों को सिकोड़कर उस हिस्से को आसानी से तोड़ देती है।
रीढ़ की तंत्रिकाओं का कमाल: कटने के बाद भी पूंछ के अंदर मौजूद नसें और मांसपेशियां पूरी तरह से मृत नहीं होतीं।
बिना दिमाग के सिग्नल: पूंछ का यह मूवमेंट छिपकली के दिमाग से नियंत्रित नहीं होता, बल्कि पूंछ में मौजूद स्पाइनल नर्व्स खुद ही 'रिफ्लेक्स सिग्नल' भेजती हैं। इसी वजह से दिमाग से संपर्क टूटने के बाद भी पूंछ में ऐंठन और हलचल होती रहती है।
तड़पती पूंछ कैसे बचाती है छिपकली की जान?
कटी हुई पूंछ का लगातार हिलना असल में एक झांसा देने का तरीका है, जो छिपकली को नई लाइफ दे सकता है।
- जमीन पर तड़पती पूंछ को देखकर शिकारी को लगता है कि उसने शिकार को पकड़ लिया है। जब तक शिकारी उस पूंछ पर ध्यान केंद्रित करता है, तब तक छिपकली चुपचाप वहां से भाग निकलती है।
- प्राकृतिक माहौल में ज्यादातर शिकारी छिपकली के मुख्य शरीर के बजाय उसकी हिलती हुई पूंछ को निशाना बनाते हैं, जिससे छिपकली के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
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दोबारा पूंछ का उगना
पूंछ गंवाने के बाद छिपकली बिना पूंछ के नहीं रहती, बल्कि कुछ ही हफ्तों में उसकी नई पूंछ आ जाती है। दोबारा पूंछ उगने की प्रक्रिया में छिपकली के शरीर में नई मांसपेशियां, त्वचा, उपास्थि और तंत्रिकाएं बनती हैं। नई उगी पूंछ दिखने और बनावट में पुरानी पूंछ जैसी बिल्कुल नहीं होती। इसमें रीढ़ की हड्डी की जगह केवल एक कार्टिलेज की नली होती है और इसका रंग भी थोड़ा अलग हो सकता है।
ऑटोटोमी प्रक्रिया से जुड़े कुछ तथ्य
छिपकली की इस अनोखी क्षमता से जुड़े कई ऐसे तथ्य हैं जो बेहद हैरान करते हैं।
- पूंछ में छिपकली वसा जमा करके रखती है। पूंछ टूटने पर ऊर्जा का बड़ा हिस्सा भी चला जाता है, इसलिए जब तक जीवन पर संकट न आए, छिपकली अपनी पूंछ नहीं गिराती।
- हर छिपकली की पूंछ एक ही गति से नहीं हिलती। कुछ प्रजातियों की पूंछ कटने के बाद केवल कुछ सेकेंड्स हिलती है, तो कुछ की पूंछ कई मिनटों तक तेजी से छटपटाती है।
- छिपकली जीवन में कई बार पूंछ गिरा सकती है, लेकिन हर बार नई उगने वाली पूंछ पहली से छोटी और कमजोर होती जाती है।
निष्कर्ष
कटी हुई पूंछ का हिलना केवल एक घटना नहीं है, बल्कि यह प्रकृति द्वारा छिपकली को दिया गया एक बेहतरीन सुरक्षा कवच है। बिना दिमाग के निर्देशों के भी केवल स्थानीय तंत्रिकाओं के रिफ्लेक्स एक्शन के दम पर पूंछ का हिलते रहना, जीवन रक्षा का अच्छा उदाहरण है।
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