हिन्दू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाने वाला जीवित्पुत्रिका व्रत माताओं के लिए सबसे कठिन और पवित्र व्रतों में से एक है। इस निर्जला व्रत में माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए भगवान जीमूतवाहन और सूर्य देव की पूजा करती हैं। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में इस पर्व की रौनक देखते ही बनती है। इस पूरे अनुष्ठान के दौरान मैथिली और भोजपुरी लोकगीत इस पर्व की आत्मा होते हैं।
इन गीतों के बिना जितिया का यह महापर्व अधूरा सा लगता है, जो घरों के माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना देते हैं। आज इस व्रत का आखिरी दिन है।
"आस-पास जितिया कइलीं मोर मईया..." लोकगीत की लिरिक्स
आस-पास जितिया कइलीं मोर मईया,
त हमरो के दिहलू जनम हो ना...
अंगुरी पकरि के तू चलल सिखवलू,
कोरा में लिहलु उठाय हो ना...
जुग-जुग जियसु मोर गोदी के ललना,
मईया देवेली असीस हो ना...
अचरा के छंहिया में राखि के सुतवलू,
चंदा निहारे तोर मुंह हो ना...
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"आस-पास जितिया कइलीं मोर मईया..." लोकगीत का मतलब
"आस-पास जितिया कइलीं मोर मईया, त हमरो के दिहलू जनम हो ना..."
अर्थ- संतान अपनी मां को याद करते हुए कह रही है कि हे मेरी मां! तुमने आसपास के सभी व्रतों की तरह बहुत ही श्रद्धा और कठिन नियमों के साथ 'जितिया' का व्रत किया, और भगवान से प्रार्थना करके मुझे इस दुनिया में जन्म दिया।
"अंगुरी पकरि के तू चलल सिखवलू, कोरा में लिहलु उठाय हो ना..."
अर्थ- मां के उस प्यार को याद किया गया है जब बच्चाछोटा था। मां ने उंगली पकड़कर चलना सिखाया और जब बच्चा थक जाता था या रोता था, तो उसे प्यार से अपनी गोद (कोरा) में उठा लेती थी।
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"जुग-जुग जियसु मोर गोदी के ललना, मईया देवेली असीस हो ना..."
अर्थ- मां अपनी संतान को गले लगाकर हमेशा यह आशीर्वाद देती है कि हे मेरे लाल! तू जुग-जुग जिए यानी तेरी उम्र बहुत लंबी हो और तू हमेशा खुश रहे।
"अचरा के छंहिया में राखि के सुतवलू, चंदा निहारे तोर मुंह हो ना..."
अर्थ- मां अपने आंचल की छांव में बच्चे को सुलाती है और प्यार से उसका चांद सा खूबसूरत चेहरा निहारती रहती है।
जितिया व्रत में लोकगीत का महत्व
गीत के अर्थ के अनुसार, एक मां अपने बच्चों की लंबी आयु के लिए नदी के घाट पर जाकर पूजा करती है, चील और सियारिन (जितिया व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा के पात्र) का स्मरण करती है और ईश्वर से प्रार्थना करती है कि उसके आंगन में हमेशा खुशियों की रोशनी बनी रहे। यह संगीत केवल मनोरंजन नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही है।
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