हौसला अगर सच्चा हो, तो अंधकार भी रास्ता नहीं रोक पाता है। छत्तीसगढ़ की रहने वाली बिमला मांझी ने इस कहावत को सच कराया है। आज हम जहां परेशानियों से हार मान लेते हैं। वहीं बिमला ने मुश्किल परिस्थितियों को अपना हथियार बनाकर पहले प्रयास में नीट परीक्षा पास की। अब उनका लक्ष्य एमबीबीएस की पढ़ाई करके सफल डॉक्टर बनना है ताकि वह अपने गांव की मेडिकल व्यवस्था को सही कर सकें। नीचे पढ़ें इनकी संघर्ष की कहानी।

बिमला मांझी ने टॉर्च की रोशनी में की पढ़ाई

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मैनपाट इलाके में बिमला मांझी का घर है। वहां पर बिजली की हालत बेहद खराब थी। अक्सर रातभर लाइट नहीं रहती थी। ऐसे में वह टॉर्च जलाकर पढ़ाई करती थी। उनका कहना है कि जब इरादे मजबूत हो, तो तूफान भी रास्ता नहीं रोक सकता है।

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बिमला ने परिवार को दिया श्रेय

डॉक्टर बनने के सपने को पूरा होने का श्रेय बिमला अपने परिवार को देती है। पिता मजदूरी करते हैं। पढ़ाई के लिए जब भी पैसों की जरूरत हुई, तो माता-पिता ने किसी न किसी प्रकार से इस चीज की व्यवस्था की। वहीं भाई हर मोड़ पर साथ खड़ा रहा। बिमला आगे कहती हैं, कि परिवार का यही भरोसा सबसे बड़ी ताकत बना।

डॉक्टर से पहले कलेक्टर बनने का था सपना

बिमला डॉक्टर से पहले कलेक्टर बनना चाहती थी, जिससे वे अपने गांव की तस्वीर बदल सकें। इसके लिए उन्होंने प्रयास आवासीय विद्यालय में दाखिला लिया। मगर वहां पर मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी का मौका मिला। स्वास्थय कमी को देखते हुए उन्होंने डॉक्टर बनने का सोचा।

पहले प्रयास में क्रैक किया नीट परीक्षा

बिमला ने पहली बार में नीट परीक्षा पास की। उन्होंने बताया कि 12वीं परीक्षा और नीट की तैयारी उन्होंने साथ में की। इस वजह से उनके पास समय की भी कमी थी। मगर उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी।

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बिमला मांझी की संघर्ष की कहानी पढ़कर आप समझ गई होंगी कि अगर लगकर मेहनत की जाए, तो कोई सफर मुश्किल नहीं है। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Image Credit- Chattishgarh Government Website, Magnific