रिश्ते बहुत कच्ची डोर की तरह होते हैं, जितना आप इन्हें संभाल कर रखेंगी, ये उतने ही लंबे चलेंगे। ऐसे में कई बार शक और गलतफहमी रिश्तों में दरार ला सकती हैं। अगर आपको भी इसी चीज का दर बना रहता है, तो अब आप 'डिजिटल बाउंड्रीज' की मदद से अपने रिश्ते को मजबूत बना सकती हैं।

क्या होती है डिजिटल बाउंड्री?

आजकल मोबाइल फोन और डिजिटल दुनिया का ट्रेंड काफी बढ़ गया है, जिसका असर कई कपल्स पर भी देखा गया है। रिलेशनशिप एडवाइजर श्रेया चौबे की मानें, तो हर रिश्ते में डिजिटल बाउंड्री बहुत जरूरी होती है। दरअसल, डिजिटल बाउंड्री का मतलब है ऐसे नियम या रूल्स, जिन्हें दोनों पार्टनर मिलकर तय करते हैं, जिससे दोनों के बीच अंडरस्टैंडिंग बनी रहे और गलतफहमी न हो। डिजिटल बाउंड्रीज के अंतर्गत आने वाले कुछ मुख्य सवाल और नियम, जो आप अपने पार्टनर के साथ बैठकर डिस्कस कर सकती हैं, वे इस प्रकार हैं: 

  • क्या एक-दूसरे के सोशल मीडिया और फोन का पासवर्ड शेयर करना चाहिए?
  • क्या बिना पूछे एक-दूसरे का फोन इस्तेमाल करना सही है?
  • क्या पार्टनर की लोकेशन ट्रेस करना उचित है?
  • क्या सोशल मीडिया पर कोई भी एक्टिविटी करने से पहले पार्टनर की राय लेना जरूरी है?

इन सभी सवालों के जवाब हर कपल के लिए अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन डिजिटल बाउंड्री के तहत अगर आप दोनों पार्टनर अपनी पूरी सहमति के साथ इन सभी सवालों के लिए रूल्स बनाते हैं, तो इससे रिश्ते में गलतफहमियां नहीं होती हैं और रिश्ता मजबूत बनता है। इन्हीं सभी रूल्स और बाउंड्रीज को डिजिटल बाउंड्री का नाम दिया जाता है। डिजिटल बाउंड्री भरोसा मजबूत करती है और प्राइवेसी का भी पूरा ध्यान रखती है। डिजिटल बाउंड्रीज की वजह से सोशल मीडिया पर होने वाले बवाल भी कम होते हैं और कपल्स आपस में क्वालिटी टाइम बिता पाते हैं।

Digital Boundaries की कमी

डिजिटल बाउंड्री की कमी की वजह से अक्सर कपल्स में एक दूसरों को लेकर शक बढ़ता है। इसके अलावा तनाव और झगड़े भी होने लगते हैं। जब पार्टनर एक-दूसरे के फोन चेक करने लगते हैं, उनके सोशल मीडिया पासवर्ड्स मांगते हैं, तो इससे दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगती हैं। आपसी भरोसा भी खत्म होने लगता है। इसीलिए डिजिटल बाउंड्री आपके रिश्ते को बेहतर बना सकती हैं।

क्यों जरूरी है डिजिटल बाउंड्री?

कई कपल्स ऐसे होते हैं जिन्हें लगता है कि रिश्ते में पासवर्ड शेयर करना, फोन चेक करना और लोकेशन ट्रेस करना ही प्यार का सबूत है, लेकिन डिजिटल बाउंड्री में यह सब जबरदस्ती करना जरूरी नहीं होता। इसमें पार्टनर आपस में मिलकर आपसी प्यार और भरोसे को प्रायोरिटी पर रखते हैं। उनके लिए एक-दूसरे से लोकेशन और पासवर्ड शेयर करना जरूरी नहीं होता।

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दोनों की आपसी राय है जरूरी

डिजिटल बाउंड्री यह भी तय करती है कि आप बिना पूछे पार्टनर का फोन नहीं खोल सकते। यह एक ऐसी बाउंड्री है, जिसे आप क्रॉस नहीं कर सकते हैं, क्योंकि ऐसा करने से आपसी मतभेद भी हो सकते हैं। डिजिटल बाउंड्री में कोई भी निर्णय किसी एक पार्टनर की तरफ से थोपा नहीं होना चाहिए, इसके लिए दोनों की आपसी राय और रजामंदी बेहद जरूरी है।

अगर आप भी अपनी डिजिटल बाउंड्री सेट करना चाहती हैं, तो एक-दूसरे से सोशल मीडिया और डिजिटल आदतों को लेकर खुलकर बात करें। दोनों मिलकर ऐसे नियम बनाएं जिससे आपसी विवाद न हो। ध्यान रखें कि किसी भी नियम को लेकर अपने पार्टनर पर जबरदस्ती या दबाव न बनाएं। 

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