हर बात पर नाराज होकर अपनों से बातचीत बंद कर देने की आदत से समस्या सुलझने के बजाय और ज्यादा उलझने लगती है। कम्युनिकेशन स्किल में कमी के कारण लोगों से अक्सर ऐसी शिकायतें सुनने को मिलती हैं कि 'जरा सी बात पर वह नाराज हो गया' या 'मैं उससे बात नहीं करूंगा/करूंगी'।

दरअसल एक ही बात को कहने के दो तरीके होते हैं, लेकिन अक्सर लोग जल्दबाजी में गलत तरीके का इस्तेमाल करते हैं, जिससे दूसरे व्यक्ति की भावनाएं आहत होती हैं। अगर वही बात शालीनता के साथ कही जाए तो सुनने वाला व्यक्ति बुरा नहीं मानेगा। मनोवैज्ञानिक सलाहकार अनु गोयल यहां बता रही हैं कुछ ऐसी ही छोटी-छोटी गलतियों के बारे में, जिनकी वजह से रिश्तों में कटुता पैदा हो सकती है, लेकिन थोड़ी सी सूझबूझ के साथ उन्हें बहुत आसानी से सुधारा जा सकता है:

दांपत्य में न हो दूरी

रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातों को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर अनबन हो जाती है। ऐसे में कोशिश यही होनी चाहिए कि आपसी बातचीत के दौरान शब्दों का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाए।

गलत तरीका: "आज फिर तुमने आने में बहुत देर कर दी।"

अपने पार्टनर का इंतजार करते हुए जब कोई व्यक्ति परेशान हो जाता है, तो अक्सर उसके मुंह से यही वाक्य निकलता है। लेकिन इससे सामने वाले व्यक्ति को लगेगा कि हर बात पर उसके साथ रोक-टोक की जाती है।

सही तरीका: "आइए, मैं अभी आपको ही याद कर रहा/रही थी।"

यह सुनकर किसी भी व्यक्ति को अच्छा महसूस होगा कि उसका पार्टनर उससे कितना प्यार करता है। हर व्यक्ति को अपनी भूल का अहसास होता है। ऐसे में झल्लाने के बजाय अगर आप शालीनता के साथ इस सकारात्मक वाक्य का इस्तेमाल करेंगे, तो दूसरा व्यक्ति खुद ही आपसे सॉरी बोलेगा।

वरिष्ठ नागरिक और आप

जिन परिवारों में दो-तीन पीढ़ियां साथ मिलकर रहती हैं, वहां विचारों और जीवनशैली में अंतर के कारण सास-बहू या पिता-पुत्र में मामूली मतभेद स्वाभाविक हैं। ऐसे रिश्ते में दोनों अपनी जगह सही होते हैं, लेकिन एक-दूसरे की बात समझ न पाने के कारण अक्सर गलतफहमी पैदा हो जाती है। इसलिए कुछ भी कहने से पहले यह सोचना जरूरी है कि कहीं इससे सामने वाले की भावनाएं आहत तो नहीं होंगी?

गलत तरीका: "ऐसा मत करो/करें।"

घर में कामकाज के तरीके को लेकर सास-बहू के बीच कभी-कभी अनबन हो जाती है। ऐसे में अगर किसी को एक-दूसरे से कोई परेशानी हो, तो साफ शब्दों में मना करने पर रिश्ते में कड़वाहट बढ़ेगी।

सही तरीका: रोक-टोक करने के बजाय अगर आप कहें, "आप ऐसा करतीं तो ज्यादा अच्छा होता।"

बात वही रहती है, लेकिन कहने के तरीके से उसका मतलब बदल जाता है। अगर आप अपनी सास या बहू को कहीं जाने से मना करना चाहती हैं, तो "वहां मत जाओ" कहने के बजाय यह कह सकती हैं, "अगर आप यहीं रुक जातीं तो बहुत अच्छा रहता।" ऐसा आग्रह सुनकर कोई भी मना नहीं कर पाएगा।

बच्चों के साथ बातचीत

आज के दौर में पेरेंट्स के लिए परवरिश बहुत चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। जहां एक ओर उन्हें बच्चों को अनुशासित करने की जरूरत होती है, वहीं दूसरी ओर उनके साथ सहज संवाद होना भी बहुत जरूरी है। अधिकांश बच्चों, खासतौर पर टीनएजर्स को ऐसा लगता है कि पेरेंट्स उन्हें हर बात के लिए रोकते-टोकते हैं, वहीं दूसरी ओर माता-पिता महसूस करते हैं कि बच्चे उनकी बातें ध्यान से नहीं सुनते।

बच्चों को यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि पेरेंट्स उन्हें उनकी भलाई के लिए ही टोकते हैं। वहीं बच्चों को अनुशासित करने के क्रम में पेरेंट्स के व्यवहार में संतुलन बहुत जरूरी है।

गलत तरीका: "तुम पढ़ाई पर जरा भी ध्यान नहीं देते।"

अक्सर माता-पिता अपने बच्चों के सामने दिन भर में कई बार यही नकारात्मक वाक्य दोहराते हैं। इसी वजह से बच्चों के व्यवहार में झल्लाहट पैदा होती है, वे पेरेंट्स की बातों को गंभीरता से नहीं लेते और मनमानी करते हैं।

सही तरीका: "तुम्हें परीक्षा की तैयारी में जुट जाना चाहिए।"

जब आप अपने बच्चे से यह सकारात्मक वाक्य कहेंगे, तो वह पूरे उत्साह के साथ पढ़ाई में जुट जाएगा। ऐसे वाक्य उसे सही ढंग से काम करने के लिए प्रेरित करेंगे। उसकी हर अच्छी कोशिश पर शाबाशी देना न भूलें।

रिश्तेदारों के साथ व्यवहार

रिश्तेदार भी हमारे परिवार का हिस्सा होते हैं, लेकिन व्यस्तता और दूरी के कारण उनसे हमेशा मिलना-जुलना नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में बातचीत के दौरान विशेष सजगता बरतनी चाहिए, वरना शिकायतों के कारण बेवजह रिश्ते में दूरियां बढ़ने लगती हैं। अगर किसी बात को लेकर मन में कोई नाराजगी हो, तो भी व्यवहार में शालीनता होनी चाहिए।

गलत तरीका: "चार महीने हो गए, आपको फोन करने की भी फुर्सत नहीं मिली।"

बहुत दिनों के बाद मिलने पर अक्सर लोग अपने रिश्तेदारों से ऐसी ही शिकायतें करते हैं। हो सकता है कोई व्यक्ति खुश होकर आपसे मिलने आया हो, तो उसे यह बात चुभ सकती है।

सही तरीका: "बहुत दिनों के बाद आपसे मुलाकात हुई, बहुत अच्छा लगा।"

तरीका बदलने से वही बात सुनने वाले को बुरी नहीं लगेगी, बल्कि यह सोचकर उसे खुशी होगी कि आप उसे याद कर रहे थे।

यह भी पढ़ें- दिल में प्यार, दिमाग में डर; क्यों रिश्तों से दूर भागते हैं लोग?

पड़ोसियों से न हो अनबन

पार्किंग, शोर, सफाई और बच्चों की शरारत जैसे मुद्दों को लेकर पास-पड़ोस में रहने वाले लोगों से अनबन की आशंका बनी रहती है। अगर उनसे कुछ कहना हो, तो आपके अंदाज में शिष्टता होनी चाहिए।

गलत तरीका: "आपके शोर की वजह से हमारी नींद खराब हो गई।"

ऐसे आक्रामक लहजे में शिकायत करने से बात बिगड़ सकती है और पड़ोसी के साथ संबंध हमेशा के लिए खराब हो सकते हैं।

सही तरीका: "लगता है कल रात आपके घर कोई बड़ी पार्टी थी।"

समझदार के लिए इशारा ही काफी होता है। नाराज होने के बजाय अगर आप अपने पड़ोसी से ऐसा कहेंगे, तो उसे खुद अपनी भूल का अहसास होगा और भविष्य में वह ऐसी गलती नहीं दोहराएगा।

यह बात हमेशा याद रखें कि किसी से बातचीत बंद कर देना समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि इससे रिश्ते में जटिलताएं बढ़ती हैं। आपसी संवाद से ही रिश्तों को संवारने में मदद मिलती है।

कभी न भूलें ये बातें

अगर आपको किसी से कोई शिकायत है, तो उसके बारे में दूसरों को बताने के बजाय सीधे उसी व्यक्ति से विनम्रतापूर्वक बात करें।

  • अगर आपके मुंह से कोई गलत बात निकल जाए तो उसी वक्त माफी मांगें और दूसरों को माफ करने में भी उदारता दिखाएं।
  • जब तीन-चार लोग साथ मिलकर बात कर रहे हों, तो बीच में बोलने के बजाय अपनी बारी का इंतजार करें।
  • फोन पर बातचीत का अंदाज शालीन होना चाहिए। दूसरों की बातें ध्यान से सुनें और न समझने पर दोबारा पूछने में संकोच न करें।
  • सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफॉर्म पर स्टेटस या कमेंट्स पोस्ट करते समय भाषा की मर्यादा का विशेष ध्यान रखें।
अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

सखी फीचर्स