हर पेरेंट्स अपने बच्चों से बहुच प्यार करते हैं और उनका भला ही चाहते हैं। इसके बावजूद कई बार उम्र बढ़ने के साथ-साथ बच्चों और माता-पिता के बीच एक दूरी बढ़ने लगती है। बचपन में हर बात के लिए पेरेंट्स पर निर्भर रहने वाले बच्चे बड़े होकर धीरे-धीरे उनसे कटने लगते हैं। यह दूरी रातों-रात नहीं आती, बल्कि इसके पीछे अनजाने में की गई पेरेंटिंग से जुड़ी कुछ गलतियां और लगातार बना रहने वाला कम्युनिकेशन गैप होता है। जब बच्चे अपने ही घर में खुद को अनसुना या असहज महसूस करने लगते हैं, तो वे भावनात्मक रूप से दूर होने लगते हैं। ऐसे में ये जानना तो बनता है कि इसके पीछे की वजहें और इस दूरी को कम करने के आसान उपाय क्या हैं? इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...
माता-पिता और बच्चों के बीच क्यों आती है दूरी?
पेरेट्ंस और बच्चों के बीच में कुछ कारणों के चलते दूरियां आ जाती हैं, जानते हैं-
1. बच्चे को अपनी इच्छाओं का जरिया मानना
- स्वतंत्रता न देना: अक्सर पेरेंट्स अपने बच्चे को एक स्वतंत्र व्यक्ति मानने के बजाय अपनी ही पहचान का हिस्सा समझने लगते हैं।
- खुद के सपने थोपना: बच्चे की अपनी पसंद, करियर या लाइफस्टाइल को स्वीकार करने के बजाय उन पर अपनी पुरानी उम्मीदें और सपने थोपने से रिश्ते में कड़वाहट आने लगती है।
2. भावनात्मक जरूरतों की अनदेखी और हेरफेर
- इमोशनल मैनिपुलेशन: जाने-अनजाने में बच्चों को गिल्ट फील कराना या भावनात्मक दबाव बनाकर अपनी बात मनवाना उन्हें दूर कर देता है।
- भावनाओं को न समझना: बच्चे जब अपनी मानसिक या भावनात्मक परेशानी शेयर करते हैं, तो उन्हें समझे बिना खारिज कर देना दूरी का बड़ा कारण बनता है।
3. अपनी गलती न मानना और संवाद की कमी
- जवाबदेही से बचना: कई पेरेंट्स अपनी गलती हो जाने पर भी माफी मांगने या अपनी चूक स्वीकार करने में हिचकिचाते हैं।
- कम्युनिकेशन ब्रेकडाउन: जब घर में संवाद सिर्फ सलाह, रोक-टोक और डांट-फटकार तक सीमित रह जाता है, तो बच्चे खुलकर बात करना बंद कर देते हैं।
माता-पिता और बच्चों के बीच की दूरी को कैसे मिटाएं?
बढ़ती दूरियों को कम करने के लिए यहां दिए गए निम्न तरीके काम आ सकते हैं-
- जब बच्चा अपनी बात रखे, तो बीच में टोकने या तुरंत फैसला सुनाने के बजाय धैर्य से उसकी बात और भावनाओं को समझें।
- पुरानी बातों या गलतियों को लेकर एक-दूसरे को दोष देने के बजाय उन्हें स्वीकार करें और रिश्ते में आगे बढ़ें।
- जब बच्चे बड़े हो जाएं, तो उन्हें एक स्वतंत्र नागरिक की तरह देखें और उनकी निजी जिंदगी व निर्णयों की सीमाओं का आदर करें।
- व्यस्तता के बावजूद बच्चों से बात करने के लिए समय निकालें। कोई साधारण फोन कॉल या हल्का-फुल्का मिलना-जुलना भी रिश्ते में मिठास बनाए रखता है।
पेरेंट्स क्या करें और क्या न करें?
| क्या करें | क्या न करें |
| बच्चों को धैर्य से सुनें | बात-बात पर न टोकें |
| अपनी गलती भी स्वीकारें | खुद को हमेशा सही न समझें |
| बच्चों की प्राइवेसी का सम्मान करें | दूसरों से तुलना न करें |
| सकारात्मक बातचीत करें | इमोशनल ब्लैकमेल न करें |
माता-पिता और बच्चों का रिश्ता प्यार और विश्वास पर टिका होता है। अगर आपके और आपके बच्चे के बीच दूरी आ रही है, तो घबराने के बजाय अपनी पेरेंटिंग की आदतों को समझें और उनमें सकारात्मक बदलाव करें। थोड़ा सा धैर्य, खुला संवाद और परस्पर सम्मान किसी भी पुराने से पुराने मनमुटाव को मिटाकर रिश्ते को फिर से मजबूत बना सकता है।
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