जब भी हम आपस में बातचीत कर रहे होते हैं, तो उस दौरान थोड़ी असहमति होना स्वाभाविक है। हमारे परिवार में और आसपास कई तरह के लोग होते हैं। सबका व्यवहार एक जैसा नहीं होता। चाहे घर-परिवार हो या सामाजिक और व्यावसायिक संबंध, हर जगह दूसरों के किसी व्यवहार पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने से पहले सोचना और कई बार चुप रह जाना क्यों जरूरी है, यह बता रही हैं मनोवैज्ञानिक सलाहकार आयुषी शर्मा। जानते हैं आगे...
समझें मन की भाषा
आमतौर पर लोगों को ऐसा लगता है कि वे अपने करीबी लोगों की भावनाओं को समझने में सक्षम हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा हमेशा नहीं होता। ऐसी स्थिति में अपनों की शारीरिक भाषा देखकर उनके मन की बात समझने की कोशिश करें। हो सकता है ऑफिस के तनाव या थकान की वजह से वे परेशान हों, इसलिए उनसे तुरंत 'क्या हुआ?' पूछने के बजाय थोड़ा चुप रहना और मन शांत होने पर बात करना ही बेहतर होता है।
शांतिपूर्ण हो असहमति
चाहे घर-परिवार हो या दोस्ती, किसी भी रिश्ते में असहमति होना स्वाभाविक है। अगर आपका दोस्त कोई ऐसा फैसला ले रहा है जो आपको सही न लगे, तो भी तुरंत भावुक होकर प्रतिक्रिया देने के बजाय शांत रहें। हमारे लिए यह भी बहुत जरूरी है कि हम अपने रिश्तों में लोगों को उनकी खूबियों और कमियों के साथ स्वीकार करें, क्योंकि कोई भी व्यक्ति पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता।
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न करें अति-प्रतिक्रिया (ओवर-रिएक्ट)
दूसरों का व्यवहार चाहे कितना भी बुरा क्यों न हो, उस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता, लेकिन हमारी प्रतिक्रिया पूरी तरह हमारे हाथ में होती है। अगर कोई जानबूझकर आपको गुस्सा दिलाने की कोशिश करे, तो बहस में उलझने के बजाय शांत रहें या वहां से हट जाएं और अपने मन को इतना मजबूत बनाएं कि किसी की नकारात्मकता का आप पर असर न हो।
करें थोड़ा इंतजार
जब भी हम किसी नए सामाजिक माहौल या रिश्ते में जाते हैं, तो वहां के लोगों और माहौल को समझने में थोड़ा वक्त लगता है। इसलिए किसी बात के नापसंद होने पर भी तुरंत प्रतिक्रिया देने में जल्दबाजी न दिखाएं और नए सदस्यों के साथ हमेशा सहज और सकारात्मक संवाद बनाए रखें।
एक चुप सौ सुख
कई बार बहुत बातें कहने का भी कोई असर नहीं होता, लेकिन आपकी एक चुप्पी ही सामने वाले को स्थिति की गंभीरता समझाने के लिए काफी होती है। बच्चों की परवरिश से लेकर ऑफिस के कामकाज तक, सही समय पर साधी गई चुप्पी सामने वाले को खुद अपनी गलती का अहसास कराने में मदद करती है।
अंत में, यह बात हमेशा याद रखें कि जीवन में सुकून के लिए कुछ बातों को अनकहा ही छोड़ देना चाहिए।
कुछ जरूरी बातें
किसी से पहली बार मिलने पर अत्यधिक उत्साहित होकर बहुत ज्यादा तारीफ करने के बजाय संक्षिप्त बातचीत करें।
- जब कई लोग विवादास्पद मुद्दे पर चर्चा कर रहे हों, तो बहुत सोच-समझकर बोलें।
- दूसरों को उकसाने वाली नकारात्मक बातों को नजरअंदाज करके चुप रहना ही बेहतर होता है।
- अगर किसी व्यक्ति या मुद्दे पर आपकी राय नकारात्मक है, तो सामने बोलने के बजाय चुप रहना अधिक समझदारी है।
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लेखक - विनीता
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