शाम के समय ढलते हुए सूरज को देखना केवल एक सुंदर दृश्य नहीं, बल्कि हमारी मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए एक कुदरती थेरेपी है। विज्ञान की भाषा में इसे 'सनसेट ऑ' (Sunset Awe) प्रभाव कहा जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि सूर्यास्त के समय मन में हैरान कर देने वाली सुंदर भावनाएं डिप्रेशन, चिंता और तनाव को दूर करने में अच्छा असर दिखाती हैं। ऐसे में यह जानना तो बनता है कि क्या है सनसेट ऑ, जानें मानसिक और शारीरिक सेहत पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...
क्या है 'सनसेट ऑ' (Sunset Awe) प्रभाव?
जब हम प्रकृति को देखते हैं, तो मन में एक विशेष प्रकार का विस्मय (Awe) पैदा होता है। एक्सपर्ट के मुताबिक, जब इंसान आसमान में ढलते सूरज के रंगों को देखता है, तो उसे एहसास होता है कि इस अनंत ब्रह्मांड के सामने उसकी अपनी परेशानियां और चिंताएं बहुत छोटी हैं। यह नजरिया इंसान को नकारात्मक सोच से बाहर निकालता है।
मानसिक और शारीरिक सेहत पर प्रभाव
सूर्यास्त का व्यू इतना गहरा होता है कि यह इंसान को पूरी तरह से आज के समय में ले आता है। इसके मुख्य वैज्ञानिक फायदे निम्नलिखित हैं-
1. तनाव और डिप्रेशन से मुक्ति
नियमित रूप से सूर्यास्त देखने से दिमाग में सकारात्मक तरंगे पैदा होती हैं। जिन लोगों ने प्रकृति के इस रूप को निहारा, वे मानसिक तनाव और अवसाद से आसानी से उबर पाए।
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2. बेहतर नींद और बायोलॉजिकल क्लॉक
सूर्यास्त के समय प्राकृतिक रोशनी का कम होना हमारी बायोलॉजिकल क्लॉक को संकेत देता है कि अब दिन खत्म हो रहा है। इससे शरीर में नींद लाने वाला हार्मोन रिलीज होता है, जिससे अनिद्रा की समस्या दूर होती है।
3. याददाश्त और एकाग्रता में वृद्धि
कुदरत के ऐसे दृश्य को देखने से एकाग्रता में वृद्धि होती है। इससे ध्यान लगाने की क्षमता और याददाश्त में भी सुधार होता है।
निष्कर्ष
डिजिटल दुनिया और भागदौड़ भरी जिंदगी में 'गोल्डन आवर' यानी सूर्यास्त के समय कुछ मिनट बाहर बिताना एक मुफ्त दवा की तरह है। रोज ढलते सूरज को देखना न केवल आपके मिजाज को बेहतर बनाता है, बल्कि आपके शरीर और दिमाग को अंदर से तरोताजा भी कर देता है।
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