जीवन के किसी न किसी मोड़ पर लोन लेने की आवश्यकता पड़ सकती है। यह होम लोन या कार लोन हो सकता है। मेडिकल इमरजेंसी या बिजनेस को बढ़ाने के इरादे से भी लोन की आवश्यकता पड़ सकती है। उस वक्त जब आप बैंक के पास जाती हैं, तो वह तीन अंकों को देखता है। ये अंक ही निर्धारित करते हैं कि किस ब्याज दर पर आपको लोन मिलेगा और कितनी शीघ्रता से आपकी आवेदन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे यह भी तय होता है कि आपको लोन मिल सकेगा अथवा नहीं। बहुत से लोग अपनी विश्वसनीयता के स्कोर यानी क्रेडिट स्कोर की जांच ही नहीं करते हैं।
क्रेडिट स्कोर से आशय तीन अंकों से है, सामान्यतः यह 300 से 900 के बीच होता है, जिससे पता लगता है कि ऋण प्राप्त कर्ता के तौर पर आप कितने विश्वसनीय हैं। भारत में अधिकांशत सिविल (CIBIL) द्वारा चिन्हित स्कोर का उल्लेख होता है, इस वजह से इसे सिविल स्कोर भी कहा जाता है। सामान्यतः यदि स्कोर 750 से अधिक है, तो उसे अच्छा माना जाएगा। 800 से अधिक होने पर इसे उत्कृष्ट श्रेणी में रखा जाएगा। यदि स्कोर 650 से नीचे है, तो लोन के लिए आवेदन एक जटिल मामला हो सकता है, ब्याज दर बढ़ जाएगी और लोन स्वीकृत होने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
बहुत से लोगों को जो बात चकित करती है, वह खराब स्कोर होना नहीं है, बल्कि स्कोर का नदारद होना है। यदि आपने कभी अपने नाम पर लोन नहीं लिया है, तो स्वाभाविक रूप से स्कोर होगा ही नहीं। यदि स्कोर नदारद है, तो यह खराब स्कोर होने के बराबर ही है, जिससे किसी प्रकार की मदद नहीं मिलेगी। ऐसा नहीं है कि आप विश्वसनीय नहीं हैं, बस आपका यह पहलू अपरिचित है। जब इस विषय में जानकारी नहीं होती, तो ऋणदाता अधिक ब्याज लगाते हैं।
ऋण को लेकर आपका अतीत क्या रहा है, इसके आधार पर स्कोर की गणना होती है। आपने कितना लोन लिया है, क्या उसे समय पर अदा किया है, आपके नाम पर कितने क्रेडिट कार्ड और लोन हैं, और कितने समय से आप क्रेडिट का इस्तेमाल कर रही हैं ये सब बातें क्रेडिट स्कोर तय करने में निर्णायक होती हैं। यही वजह है कि अपने नाम पर क्रेडिट हिस्ट्री निर्मित करना आवश्यक हो जाता है। इसके लिए लोन लेने की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि जब आपको वास्तव में लोन की आवश्यकता पड़ेगी, तो इसे तत्काल तैयार करना मुश्किल हो जाएगा। क्रेडिट हिस्ट्री निर्मित होने में समय लगता है, इसलिए समय रहते ही इस पर ध्यान देना चाहिए।
इसकी शुरुआत का सबसे सरल तरीका है, अपने नाम पर क्रेडिट कार्ड लेना। छोटी व नियमित खरीदारी के लिए उसका उपयोग करें, जैसे- घरेलू सामान, मासिक सब्सक्रिप्शन, बिल पेमेंट इत्यादि। इसके बाद प्रतिमाह तय तिथि आने से पहले ही आउट स्टैंडिंग धन का पूर्ण भुगतान कर दें। न्यूनतम नहीं, बल्कि पूरे धन का भुगतान करें। जब आप पूरे धन का भुगतान करेंगी, तो कोई ब्याज नहीं लगेगा, इस प्रकार आपको कोई अतिरिक्त मूल्य नहीं चुकाना होगा। यद्यपि इसके माध्यम से यह चीजें दर्ज हो जाएंगी कि ऋण लेने पर कितनी जिम्मेदारी पूर्वक आप उसकी अदायगी करती हैं। इस प्रकार 6 से 12 महीने में आपका क्रेडिट स्कोर बढ़ता जाएगा।
कुछ और चीजें हैं, जो सुरक्षा देने के साथ ही स्कोर बढ़ाने में मदद करेंगी।
इस मामले में पेमेंट हिस्ट्री किसी भी चीज से अधिक मायने रखती है। किसी एक पेमेंट में चूकने से ज्यादा नुकसानदेह है, देरी से पेमेंट करना। यदि देरी से पेमेंट करने का एक पैटर्न बन गया है, तो आपका स्कोर हमेशा के लिए खराब हो सकता है। प्रत्येक क्रेडिट कार्ड पर न्यूनतम राशि का ऑटो-पेमेंट सेट करें, ताकि चाहे कितनी भी व्यस्तता हो, पर समय पर अदायगी में कोई चूक न हो।
क्रेडिट का इस्तेमाल करना भी महत्व रखता है। यह आपकी उपलब्ध क्रेडिट सीमा का वह प्रतिशत होता है, जिसे आप किसी भी समय इस्तेमाल कर सकती हैं। यदि आपके क्रेडिट कार्ड की सीमा 1 लाख रुपये है और आप उसमें नियमित तौर पर 80 हजार रुपये बैलेंस रखती हैं, तो आपका उपयोग 80 प्रतिशत है। ऋणदाता अधिकतम उपयोग को वित्तीय दबाव के तौर पर देखते हैं। इसे 30 प्रतिशत से कम रखना एक समुचित लक्ष्य होगा।
एक के बाद एक कई लोन और क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन न करें। प्रत्येक आवेदन के साथ सख्ती से आपकी क्रेडिट रिपोर्ट जांची जाती है, जिससे आंशिक रूप से स्कोर कम होता है। भले ही प्रत्येक आवेदन के साथ तार्किकता का पहलू जुड़ा हो, पर छोटी अवधि में कई आवेदन प्राप्त होने से ऋणदाता पर दबाव बढ़ता है।
वर्ष में एक बार अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच अवश्य करें। सिबिल की वेबसाइट पर जाकर आप इसे निःशुल्क जांच सकती हैं। कई बैंकिंग ऐप पर भी यह सुविधा उपलब्ध है। क्रेडिट रिपोर्ट में गलतियां होना भी आम बात है। अक्सर लोगों को यह बात ज्ञात नहीं होती। मान लीजिए, आपने किसी लोन की पूर्ण अदायगी कर दी है, पर वह आउटस्टैंडिंग दिख रहा हो, तो सामने खुलने वाले अकाउंट में ही कोई गलती हो सकती है। समान नाम से कोई दूसरा अकाउंट हो सकता है, जो सामने खुल गया हो। ये सब चीजें आपके क्रेडिट स्कोर को घटा सकती हैं, जिसका आपको कई बार पता नहीं चलता। इसके बारे में सूचित करना और गलतियों को ठीक करवाना आपका अधिकार है। इसके लिए आपको ब्यूरो को लिखित में आवेदन करना होगा।
एक खास परिस्थिति से निपटने का तरीका जानना महत्वपूर्ण है। भले ही पूरे घर का प्रबंधन आपके हाथ में हो, किंतु यदि आपकी स्वतंत्र आय नहीं है या आपने करियर से ब्रेक ले रखा है, तो स्टैंडर्ड क्रेडिट कार्ड प्राप्त करना आपके लिए कठिन हो सकता है। ऐसे में 'सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड' का विकल्प उपलब्ध होता है, जिसके लिए आप बैंक में सुरक्षा निधि के तौर पर धन जमा करा सकती हैं (सामान्यतः यह राशि 10 से 50 हजार रुपये तक होती है)। अब उस खाते पर उतनी ही सीमा या कुछ कम धनराशि की सीमा वाला क्रेडिट कार्ड प्राप्त कर सकती हैं। इसे सामान्य कार्ड की तरह इस्तेमाल करें, छोटी खरीदारी करें और प्रतिमाह तय तिथि पर पूर्ण भुगतान कर दें। इससे निर्मित क्रेडिट हिस्ट्री स्टैंडर्ड कार्ड की भांति ही होगी। 12 से 18 महीने तक जिम्मेदारीपूर्वक इसका इस्तेमाल करने के बाद आप इसे रेगुलर कार्ड में बदलवा सकती हैं।
आपका क्रेडिट स्कोर बैंकों के लिए मात्र कुछ अंक नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण होता है कि वित्तीय व्यवस्था में आपका एक स्वतंत्र अस्तित्व है। कोई इंसान जिसने सालों तक दूसरों के धन का प्रबंधन किया हो, पर उसके नाम पर कोई क्रेडिट न रहा हो, उसके लिए यह स्कोर निर्मित करना किसी युक्तिसंगत कदम से कहीं अधिक मायने रखता है। यह तो अपनी वित्तीय पहचान को सबके सामने स्थापित करने से जुड़ा विषय है।
इस हफ्ते अपना क्रेडिट स्कोर जांचें। ये निशुल्क और मात्र पांच मिनट का काम है। इससे ये पता चलेगा कि वित्तीय परिदृश्य में आपकी स्थिति क्या है।
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