पिछले हफ्ते हमने वसीयत की बात की, ये समझने का प्रयास किया कि प्रत्येक परिवार के लिए वसीयत क्यों जरूरी है। उसी दिन एक पाठक ने ईमेल में कुछ ऐसी बात लिखी जो स्मृति में रह गई। उसका कहना था कि वसीयत लिखने का खयाल आया, लेकिन जब ये करने बैठी तो एहसास हुआ कि मुझे तो ये भी नहीं पता कि दस्तावेज कहां रखे हैं। जिनके बारे में मुझे स्वयं ज्ञात नहीं, उनके विषय में वसीयत में क्या निर्देशित करूं।
उसकी इस बात से एहसास हुआ कि किन महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। वित्तीय जानकारी होना एक बात है, पर अपने धन व संपदा को व्यवस्थित रखना भी जरूरी है, ताकि जो लोग आप पर निर्भर है उन्हें वह तब उपलब्ध हो सके, जब वाकई इसकी आवश्यकता हो, ये भी महत्वपूर्ण है। दोनों ही बातें साथ चलती हैं। करीब 20 वर्ष में आपने जो पोर्टफोलियो तैयार किया, उसके दस्तावेज कहां रखे हैं, किस प्लेटफार्म पर लागिन करना चाहिए या किस ईमेल पर उससे संबंधित विवरण आएंगे, यदि ये किसी को पता ही न हो तो तनाव होना स्वाभाविक है।
इस हफ्ते हम इसी का खाका तैयार करने का प्रयास करेंगे।
इस स्तंभ को वित्तीय प्रयोगशाला व अभ्यास की तरह लें। आपके पास कितनी संपदा है, इसका आकलन करने के बजाय इस पर जोर होना चाहिए कि उस तक पहुंच हो। उसकी जानकारी को अपडेट करती रहें। परिसंपत्ति की प्रत्येक श्रेणी पर विचार करें और ईमानदारी से स्वयं जवाब दें। क्या मुझे जानकारी है कि वह संपत्ति या संबंधित दस्तावेज कहां है, क्या उसकी सभी जानकारियां अपडेट हैं। क्या मुझसे जुड़े किसी एक व्यक्ति को उसके विषय में पता है। बैंक अकाउंट से आपकी वित्तीय यात्रा का आरंभ व अंत होता है। आपके परिवार से जुड़ा प्रत्येक बैंक खाता कहां और किस शाखा में है, इसकी जानकारी आपको होनी चाहिए। अकाउंट नंबर, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और नामिनी के नाम की भी जानकारी होनी चाहिए। बहुत से परिवारों में देखा गया है कि वर्षों पहले कुछ बैंक खाते खोले गए, पर अब उनका सक्रिय रूप से इस्तेमाल नहीं होता, उनसे जुड़ा मोबाइल नंबर भी बदल गया। शादी और बच्चे के जन्म के बाद नामिनी भी अपडेट नहीं किया गया। जिन खातों में नामिनी दर्ज नहीं होता, उन्हें खाते की राशि पाने के लिए कई बार तो सालों कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है और जरूरत के समय पैसा नहीं मिल पाता। इस हफ्ते प्रत्येक खाते को जांचें कि उसमें नामिनी दर्ज है या नहीं। यदि गलत प्रविष्टियां हों तो उन्हें सही व अपडेट करें।
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फिक्स्ड डिपॉजिट्स और रिकरिंग डिपॉजिट्स के दस्तावेजों को भी लोग कहीं रखकर भूल जाते हैं। इन्हें अच्छे इरादे के साथ सावधानी के साथ किसी सुरक्षित स्थान पर रख दिया जाता है, पर बाद में उस जगह को ही भूल जाते हैं। आपके परिवार के प्रत्येक फिक्स्ड डिपॉजिट्स के आगे बैंक का नाम, धनराशि और मैच्योरिटी डेट व नामिनी लिखें। यदि वह मैच्योर होने के बाद आपकी जानकारी के बिना ही आटो रिन्यू हो गई है तो ये देखना चाहिए कि उसकी ब्याज दर क्या है। बहुत से डिपाॅजिट्स मौजूदा ब्याज दरों पर रिन्यू हो जाती हैं, हो सकता है कि मूल रूप में आपने उस फिक्स्ड डिपॉजिट्स पर जो ब्याज अर्जित किया, उससे वह काफी कम हो।
म्यूचुअल फंड्स निवेश पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है, क्योंकि उन्हें विभिन्न प्लेटफार्म पर वर्षों संचालित किया जाता है। फोलियो से आशय प्रत्येक फंड हाउस से जुड़े आपके यूनीक इनवेस्टर नंबर से है। अगर आपने विभिन्न प्लेटफार्म पर कई साल तक निवेश किया हो तो हो सकता है कि कई फोलियो ऐसे हों जिनके विषय में आप भूल गई हों। उनके विषय में जानने का सबसे सरल तरीका है कि सीएएमएस या केफिनटेक वेबसाइट्स पर जाएं। ये दो पंजीकरण सेवा वेबसाइट्स हैं, जहां पर लगभग सभी भारतीय फंड हाउसेज का सारा रिकार्ड उपलब्ध रहता है। इन वेबसाइट्स पर जाकर अपना पैन डालें तो आपके नाम पर जो कुछ निवेशित है, उसकी समग्र जानकारी निकलकर सामने आ जाएगी। इस पर ध्यान दें कि प्रत्येक फोलियो के साथ जो रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर है, क्या वही है जिसे आप मौजूदा इस्तेमाल करती हैं। ये इसलिए जरूरी है क्योंकि फोलियो से जुड़ा विवरण व ओटीपी उसी पर आएगा।
इंश्योरेंस पालिसी पर अच्छा खर्च किया जाता है, पर समूचा विवरण नहीं मिलता। परिवार के लिए खरीदी गई प्रत्येक पालिसी निकालकर देखें, चाहे वह लाइफ, हेल्थ या वाहन या कोई अन्य बीमा पालिसी हो। प्रत्येक पालिसी किसने जारी की है, पालिसी नंबर क्या है, इंश्योर्ड राशि कितनी है, प्रीमियम देने की तिथि और नामिनी कौन है। इस बात पर विशेष ध्यान दें कि नामिनी आपकी मौजूदा पारिवारिक परिस्थितियों के अनुरूप है अथवा नहीं। जो पालिसी आपने शादी व बच्चों के जन्म से पहले खरीदी होगी, हो सकता है उसमें माता-पिता या भाई-बहन को नामिनी बनाया हो। बाद में जब शादी और बच्चों के जन्म के बाद परिवार की सुरक्षा का खयाल आएगा, तो नामिनी उससे मेल नहीं खाएगा। इसलिए नामिनी अपडेट अवश्य करें। हो सकता है कि ये मोबाइल पर ही हो जाए या उसके लिए एक छोटा सा फार्म भरना होगा। जिस काम में अधिकतम 20 मिनट लगेंगे, उससे जीवन में बहुत फर्क आ सकता है।
एंप्लाई प्राविडेंट फंड पर भी ध्यान देना चाहिए। बहुत से लोग अपने पूरे नौकरी काल में ईपीएफ योगदान देते रहते हैं, उसमें जमा राशि को बारंबार जांचते भी नहीं। नामिनी अपडेट करने या इस पर भी ध्यान नहीं देते कि यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) आपके वर्तमान नियोक्ता से जुड़ा है या नहीं। ईपीएफओ पोर्टल पर जाएं और यूएएन दर्ज करें व नामिनी चेक करें। उससे जुड़ा मोबाइल नंबर अपडेट होना चाहिए। यदि आपने कई नौकरियां बदली हैं तो ईपीएफ ट्रांसफर जरूर कराएं। जमा धनराशि पर चक्रवृद्धि ब्याज पूर्ववत मिलता रहे, इस लिहाज से ये जरूरी है।
पब्लिक प्राविडेंट फंड दीर्घकालिक सुरक्षित सेविंग है। अधिकांश घरों में लोग बैंक में पीपीएफ खाता खुलवाते हैं, तो कुछ लोग डाकखाना में खाता खुलवाना सही समझते हैं। उसकी राशि, मैच्योरिटी डेट और नामिनी को जांचें। यदि आपने पीपीएफ खाता डाकखाना में खुलवाया था, पर फिर वहां से दूसरे शहर में स्थानांतरण हो गया। ऐसे में उसे किसी नजदीकी बैंक शाखा में स्थानांतरित करवाएं।
अंत में उस दस्तावेज की बात आती है, जिसमें अन्य सभी वित्तीय दस्तावेजों का विवरण हो। इसे बहुत व्यापक करने की आवश्यकता नहीं। एक पेज पर या अपने मोबाइल फोन में फाइल बनाकर सारी जानकारी दर्ज कर सकती हैं कि दस्तावेज कहां रखे हैं, अकाउंट नंबर या फोलियो नंबर क्या है, नामिनी कौन है। इसे साल दर साल अपडेट करती रहें, जिस समय अपना इनकम टैक्स फाइल करती हैं उस समय ये कार्य करना उचित रहता है। किसी विश्वसनीय स्वजन को उसके विषय में बताएं।
इसमें भयभीत होने जैसा कुछ नहीं है। इससे आपकी वित्तीय यात्रा सहज-सुगम होती है व सबकुछ आंखों के सामने रहता है। जिन्हें आप सुरक्षित करना चाहते हैं, आपके धन तक उनकी पहुंच सुनिश्चित होती है। लक्ष्य सरल है, जो धन आपने व परिवार ने सालों की मेहनत से जोड़ा है वो दिखना चाहिए, उस तक पहुंच हो और जब जरूरत हो तो आपके प्रियजनों को बिना किसी झंझट या देरी के मिल जाए। इसलिए ये दस्तावेजीकरण करना आवश्यक है।
लक्ष्मी सिर्फ धन की सर्जना नहीं करती, बल्कि उसे सुरक्षित, व्यवस्थित रखती है। साथ ही ये सुनिश्चित करती है आवश्यकता के समय वह उपलब्ध हो।
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