पिछले हफ्ते हमने ये समझने का प्रयास किया कि महिलाओं के नाम पर प्रापर्टी होने का क्या महत्व है, साथ ही ये जाना कि संपत्ति खरीद से पहले किन बातों पर ध्यान देना चाहिए। इस हफ्ते हम एक कदम आगे बढ़कर ये जानेंगे कि वो कौन से सवाल हैं जो खरीदारों को सही निर्णय लेने में मदद करते हैं।

प्रथम सवाल जो बहुत से खरीदार नहीं पूछते हैं कि बिल्डर ने उससे पहले कौन से प्रोजेक्ट पूरे करके दिए हैं।

रेरा रजिस्ट्रेशन से सिर्फ ये पता चलता है कि प्रोजेक्ट कानूनी नियमानुसार है। उससे ये जानकारी नहीं मिलती कि बिल्डर ने पूर्व में भी प्रोजेक्ट सही समय पर पूरे किए हैं, गुणवत्ता का जो वादा किया गया था, उसे पूरा किया गया है। उसके पुराने प्रोजेक्ट विवादों से दूर रहे हैं। खरीद से पहले अपने राज्य के रेरा पोर्टल पर जाकर बिल्डर का नाम सर्च करें। उसके पुराने प्रोजेक्ट पर नजर दौड़ाएं। क्या वो समय पर पूरे हुए हैं? उसके संबंध में कितनी शिकायतें दर्ज हुई हैं? वो किस विषय में थीं। प्रोजेक्ट पूरा करने में हुई देरी की शिकायतें आपको काफी कुछ बता देंगी कि संबंधित बिल्डर का प्रोजेक्ट कितना विचार योग्य है। यदि बिल्डर ने अनेक प्रोजेक्ट तय समय पर पूरे किए हैं व काम की गुणवत्ता को लेकर उसका रिकार्ड अच्छा है तो ये जानकारी भी अहम हो जाती है। इन चीजों को सर्च करने में कुछ मिनट लगेंगे और ये निश्शुल्क है।

दूसरा प्रश्न निर्माणाधीन व रीसेल प्रापर्टी के मध्य अंतर से जुड़ा है।

निर्माणाधीन प्रापर्टी अपेक्षाकृत सस्ती होती है, क्योंकि आप उस चीज के लिए भुगतान कर रहे होते हैं जो अभी मूर्त रूप में नहीं है। मूल्य के मामले में लाभ मिलता है, लेकिन जोखिम भी होता है। निर्माण कार्य बाधित हो सकता है। काम पूरा होने में कई वर्ष की देरी भी हो सकती है। उस समयावधि के लिए आपका धन बंधक बन जाएगा, जबकि किराया पूर्ववत चलता रहेगा। रीसेल प्रापर्टी का मूल्य अधिक होता है, पर वो मूर्त रूप में होती है। आप उसे देख व जांच सकते हैं। मेंटीनेंस चार्ज और इमारत के प्रबंधन को समझ सकते हैं। उसमें प्रवेश के लिए आपको प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती। पहली बार कोई प्रापर्टी खरीद रहे हैं, खासकर वे महिलाएं जो स्वतंत्र रूप से खरीद रही हैं, उनके लिए निर्माणाधीन के बजाय रेरा रजिस्टर्ड इमारत की रीसेल प्रापर्टी में अनिश्चितता कम होती है, भले ही प्रति वर्ग फुट उसका मूल्य अधिक हो।

तीसरा सवाल प्रापर्टी के स्वामित्व की वास्तविक कीमत से संबंधित है, बहुत से खरीदार जिसका हिसाब नहीं लगाते।

खरीद का मूल्य तो बस एक शुरुआत है। स्टांप शुल्क, रजिस्ट्रेशन शुल्क कुल मिलाकर छह से नौ प्रतिशत हो जाता है। यदि किसी एजेंट के माध्यम से खरीद हो रही है तो एक से दो प्रतिशत ब्रोकरेज भी जुड़ जाएगा। अधिकांश नए फ्लैट्स बेसिक कंस्ट्रक्शन के साथ दिए जाते हैं, जिसके बाद उसमें आंतरिक साज-सज्जा व जरूरत के अनुरूप अन्य फिटिंग कराने की आवश्यकता होती है। मध्यम श्रेणी के फ्लैट में इस कार्य को कराने में करीब तीन से आठ लाख रुपये तक खर्च हो जाते हैं। मासिक मेंटीनेंस चार्ज करीब दो से पांच हजार रुपये तक होता है। प्रापर्टी टैक्स भी लगता है। जो धन डाउन पेमेंट के रूप में देते हैं, उसे कहीं और निवेश करके रिटर्न नहीं अर्जित कर सकते।

प्रापर्टी खरीदने से पहले आगामी पांच वर्ष में जितना धन जाएगा, उसे जोड़ें। फिर ईमानदारी से विचार करें कि समान अवधि में उस प्रापर्टी से कितना धन सृजित होगा। बहुत से भारतीय शहरों में आवासीय किराए में सालाना दो-तीन प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होती है। बैंक के फिक्स्ड डिपाजिट में धन रखने पर उससे अधिक ब्याज मिलेगा, साथ ही मेंटीनेंस की जिम्मेदारी भी नहीं होगी। हालांकि इसका ये अर्थ नहीं निकलता कि प्रापर्टी खरीद खराब निवेश है। यहां आशय मात्र इतना है कि कोई भी निर्णय लेने से पहले धन का पूर्ण हिसाब करें, न कि बाद में उसे तर्क संगत ठहराने के लिए ऐसा करें।

चौथा सवाल है कि जब चीजें गलत हो जाएं तो क्या करें?

रेरा रजिस्टर्ड होने के बावजूद प्रोजेक्ट रुक जाते हैं और बिल्डर्स को आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ये जानना महत्वपूर्ण है कि ऐसी स्थिति में खरीदारों के पास भी विकल्प होते हैं, पर उन्हें त्वरित कार्यवाई करनी चाहिए। कई साल बाद की जाने वाली शिकायतों की अपेक्षा यदि रेरा के अंतर्गत उन्हें आरंभ में ही दर्ज कराया जाता है तो निराकरण की संभावना अधिक होती है। किसी प्रोजेक्ट के कई खरीदार साझा शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं, जिसपर शीघ्र सुनवाई की संभावना होती है। यदि बिल्डर दिवालिया घोषित हो चुका है तो मामला दिवालियापन व दिवालिया संहिता के अंतर्गत आएगा। इस प्रक्रिया में समय लगता है, लेकिन जिन खरीदारों ने भुगतान के सभी दस्तावेज सुरक्षित रखे हैं और अपने दावों को आरंभ में ही दाखिल कर दिया है, उनके समुचित निपटान की संभावना अधिक होती है।

पांचवां सवाल वो है, जिसका सामना प्रापर्टी खरीदने वाली महिलाओं को अक्सर करना पड़ जाता है और उन्हें इसके बारे में आगाह भी नहीं किया जाता।

कानूनी तौर पर प्रापर्टी खरीदने वाली महिला को अन्य खरीदारों के समान ही अधिकार होते हैं। कानून उनमें फर्क नहीं करता, लेकिन व्यवहार रूप में देखा गया है कि कुछ बिल्डर्स व हाउसिंग सोसाइटीज उन महिलाओं के साथ तल्खी से पेश आते हैं, जिनके साथ कोई पुरुष सह आवेदक के तौर पर नहीं होता। एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने से पहले अपने वकील के माध्यम से उसकी सभी शर्तों को समझें। सुरक्षा उपायों को लेकर जुबानी वादों का मूल्य नहीं होता, इसलिए ये सुनिश्चित करें कि सभी बातों का लिखित में उल्लेख किया गया हो। इसका महत्व वक्त आने पर पता चलता है। यदि कोई बिल्डर या एजेंट इस प्रकार व्यवहार कर रहा है मानो स्वतंत्र रूप से आपका खरीदार होना समस्या है, तो समझ जाएं कि वक्त आने पर जवाबदेही से बचने के लिए वे किस प्रकार व्यवहार करेंगे।

इस हफ्ते प्रापर्टी से जुड़े किसी संवाद को आगे बढ़ाने से पहले तीन चीजों को जांचें। रेरा पोर्टल पर बिल्डर का पुराना रिकार्ड जांचें। पांच साल तक उस प्रापर्टी के स्वामित्व, मेंटीनेंस, स्टांप शुल्क, आंतरिक साज-सज्जा पर कितना खर्च आएगा, इसका हिसाब करें। एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर से पहले अपने वकील के साथ मिलकर उसे समझें।

प्रापर्टी खरीद का निर्णय बहुत से परिवारों के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण होता है। अन्य निवेशों की भांति ही इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले बहुत सोच-विचार करना चाहिए। इस स्तंभ में सुझाए गए प्रश्न पूछना मुश्किल नहीं है, बस सामान्यत: उन्हें पूछा नहीं जाता।

यह कालम केवल शैक्षिक एवं वित्तीय जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।

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