हर साल दीपावली और धनतेरस का यह पावन पर्व आता है, हम घरों की साफ-सफाई करते हैं, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के स्वागत के लिए तैयारी करते हैं। चारों ओर उत्सव का उल्लास महसूस होता है। इन शुभ दिनों में हम पूरी श्रद्धा से मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं, उन्हें पुष्प अर्पित करते हैं। यह उल्लास और पर्व बीतने पर सबकुछ सामान्य हो जाता है। उत्सव बीतने पर सब कुछ सामान्य हो जाता है। इस वर्ष मैं चाहूंगी कि आप कुछ अलग करें। प्रार्थना के साथ ही कुछ ऐसा जिसका लाभ जीवनभर रहे। इस स्तंभ में 50 सप्ताह तक हमने धन के विषय में बात की। अब अमल का समय है। इस स्तंभ के पाठकों द्वारा भेजे गए ईमेल में अधिकांश लोग जो सवाल पूछते हैं, वे म्यूचुअल फंड्स, टैक्स या इंश्योरेंस के विषय में नहीं होते हैं। सामान्य सवाल यही होता है कि मैं कहां से शुरू करूं?
नॉमिनी जांचें
अपने सभी बैंक अकाउंट खोलकर देखें, प्रत्येक फिक्स्ड डिपॉजिट, प्रत्येक म्यूचुअल फंड फोलियो को जांचें। यह देखें कि नॉमिनी के रूप में किसका नाम दर्ज है। बहुत से लोग पाएंगे कि 20 वर्ष पहले कोई नाम दर्ज किया होगा। शादी, किसी प्रिय के निधन या संबंधित व्यक्ति को लेकर मन बदलने के बाद भी नॉमिनी पर पुनर्विचार नहीं किया गया हो। इसलिए यह सुनिश्चित करें कि वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार सभी दस्तावेजों पर नॉमिनी का नाम सही दर्ज हो। यदि कोई वसीयत की है तो वहां भी यह देखें कि नॉमिनी सही दर्ज है। नॉमिनी ही संपत्ति का अधिकारी होता है, जबकि वसीयत से यह तय होता है कि संपत्ति किसको मिलेगी।
अपनी कुल संपत्ति का मूल्य लिखें
नोटबुक के पृष्ठ पर बाईं ओर अपनी सभी परिसंपत्तियों का विवरण लिखें जैसे फ्लैट, गोल्ड, एफडी, म्यूचुअल फंड्स, पीपीएफ, नकद राशि। दाईं ओर अपनी सभी देनदारियों का विवरण दर्ज करें जैसे होम लोन, कार लोन, क्रेडिट कार्ड का आउटस्टैंडिंग अमाउंट। अब एक को दूसरे से घटाएं। इस प्रकार जो राशि निकलकर आएगी, वह आपकी कुल संपत्ति का मूल्य होगी। बहुत से लोगों ने लिखित में ऐसा नहीं किया होगा। इसे जांचने के बाद वित्तीय स्थिति में स्पष्टता आएगी।
इमरजेंसी फंड पर नजर दौड़ाएं
आपके पास तीन से छह माह तक के घरेलू खर्च के लिए धनराशि तरल रूप (लिक्विड) में हर समय उपलब्ध होनी चाहिए। इसके लिए बचत खाता सबसे उपयुक्त है। इसके बाद लिक्विड म्यूचुअल फंड, जिसे भुनाने में एक-दो कार्यदिवस लग जाते हैं, अच्छा विकल्प हो सकता है। इस श्रेणी में फ्लैट, लॉक-इन पीरियड वाली एफडी या इक्विटी फंड को नहीं रखा जाएगा। इक्विटी फंड बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है। संभव है कि जब आपको सर्वाधिक आवश्यकता हो, तब बाजार में गिरावट का दौर हो। यदि इमरजेंसी फंड नहीं है, तो इसे तैयार करने पर काम करें।
इंश्योरेंस जांचें
सभी पॉलिसियां निकालें, यह देखें कि वे वास्तव में क्या कवर करती हैं और कौन सी चीजें उसकी परिधि से बाहर हैं, साथ ही यह भी कि वे कब एक्सपायर होंगी। स्वयं से एक सरल सा सवाल पूछें कि यदि कल कुछ गलत हो गया, तो क्या यह पॉलिसी मेरे परिवार की मदद करेगी? बहुत से लोग ऐसी पॉलिसियों का प्रीमियम देते रहते हैं, पर जरूरत पड़ने पर वे परिवार के काम नहीं आतीं। इस बात की जानकारी ही निदान की दिशा में पहला कदम होगा।
सभी निवेश खातों को खोलें और देखें कि उसमें क्या है?
क्या सभी एसआईपी (SIP) उसी तरह चल रही हैं, जिस प्रकार चलनी चाहिए? क्या ऐसे फोलियो भी हैं, जिनके बारे में आप भूल गई हों? कहीं पर यह लिखें कि आपके निवेश खातों में क्या है और उनसे किस प्रकार लक्ष्यों की पूर्ति हो रही है। यहां अभी कुछ बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है, पर इस विषय में जानना आवश्यक है।
परिवार में धन को लेकर संवाद करें
इसके लिए किसी औपचारिक बैठक की आवश्यकता नहीं है। चाय पर जब सब साथ बैठे हों, तब इस विषय में संवाद छेड़ सकती हैं। लॉकर की चाबी कहां रखी है, यह किसे पता है? कौन से लोन अभी चल रहे हैं? पासवर्ड की जानकारी किसे है? यदि परिवार में किसी व्यक्ति को कुछ हो गया, तो क्या अन्य लोग चीजों को संभाल पाएंगे? यह संवाद महत्वपूर्ण है। प्रियजनों के लिए यह आपके स्नेह का ही परिचायक है।
अपना क्रेडिट स्कोर जांचें
प्रत्येक भारतीय को चार रजिस्टर्ड क्रेडिट ब्यूरो में से प्रत्येक से प्रतिवर्ष निःशुल्क क्रेडिट रिपोर्ट प्राप्त करने का अधिकार है। सिबिल (CIBIL) की वेबसाइट पर जाएं और वहां पर जरूरी जानकारी दर्ज करते हुए क्रेडिट स्कोर जांच सकती हैं। एक्सपीरियन या क्रिफ की वेबसाइट के माध्यम से भी यह संभव है। यदि क्रेडिट स्कोर 750 से अधिक है, तो समुचित ब्याज दरों पर लोन के लिए आपकी पात्रता मजबूत होती है। 650 से नीचे क्रेडिट स्कोर होने पर लोन की राह मुश्किल हो सकती है या आपको अधिक ब्याज देना पड़ सकता है। यदि आपकी रिपोर्ट में कोई त्रुटि है, तो उस पर अपना पक्ष रख सकती हैं। यदि स्कोर कम है, तो आप उसे बढ़ाने का प्रयास कर सकती हैं। जानकारी से ही बेहतरी का मार्ग खुलता है।
वित्तीय वर्ष के लिए अपनी आयकर स्थिति जांचें
यदि आपने ओल्ड टैक्स का चयन किया है, तो यह जांचना चाहिए कि आयकर में 80C के तहत छूट के लिए नियत डेढ़ लाख की राशि में से कितना धन निवेश किया जा चुका है और अभी कितना धन निवेश के लिए शेष है। पीपीएफ, ईएलएसएस म्यूचुअल फंड्स, और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम में इस लिहाज से निवेश किया जा सकता है। वित्तीय वर्ष आगामी मार्च में समाप्त होगा, तो अभी पर्याप्त समय है, पर इस दिशा में कदम तभी बढ़ा सकेंगी जब आपको वस्तुस्थिति का भान होगा। यदि न्यू टैक्स रिजीम का चयन किया है, तो यह जांचने का सही समय है कि जो निर्णय लिया, वह कितना सोच-विचारकर लिया गया था।
अपने धन तक पहुंच का नक्शा
एक लिफाफे, फोल्डर या किसी सुरक्षित डिजिटल स्पेस में कुछ जरूरी चीजों को संभालकर रखें, जैसे वसीयत, लॉकर की चाबी, सभी अकाउंट की जानकारी, पॉलिसियां व उनके नंबर, अपने सीए या वित्तीय सलाहकार का नंबर। यदि कोई पासवर्ड हो तो उसे लिखकर सुरक्षित करें, ताकि किसी आपात स्थिति में परिवार को वे उपलब्ध हो सकें। ये सभी चीजें किस स्थान पर रखी गई हैं, इसके विषय में किसी विश्वसनीय व्यक्ति को बताएं। इस प्रकार संकट की स्थिति में आपके परिवार को जिन चीजों की सर्वाधिक आवश्यकता होगी, वे सुलभ हो सकेंगी। ये वे चीजें हैं, जिनके विषय में हम बस यही सोचते रह जाते हैं कि किसी दिन इसके लिए समय निकालेंगे।
यह स्तंभ मात्र शैक्षिक उद्देश्य से है। परिवार से संबंधित कोई भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले किसी वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।
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