प्रति वर्ष कुछ चीजें घटित होती हैं। जन्मदिन आता है, उसके साथ मिलता है शगुन का एक लिफाफा। इसी तरह राखी, दीवाली जैसे त्योहारों पर भी बच्चों को शगुन का लिफाफा देने की परंपरा रही है, जिसके साथ बड़ों का आशीष जुड़ा होता है। बड़ों से ये लिफाफा जब मिलता है तो बच्चों में अलग ही उत्साह होता है। ये धन वे कुछ ही दिनों में खर्च कर डालते हैं और महीनेभर में उसके बारे में भूल जाते हैं। ये चक्र चलता रहता है। ये उपहार हम प्रेम के साथ देते हैं, शायद ही कभी ये सोचते हैं कि उस धन के साथ हम कुछ और सार्थक उपहार दे सकते थे।

यहीं से एक अहम संवाद की शुरुआत होती है। आज मैं आपके विषय में नहीं, बल्कि आपके बच्चों के विषय में बात करूंगी। ये उनकी शिक्षा और शादी खर्च के विषय में नहीं है, जिसके विषय में हम बाकायदा योजना बनाकर चलते हैं और उन्हें इसका आभास भी नहीं होता। ये उससे अलग है। एक ऐसा निवेश जो बच्चों के नाम पर हो, जिसका प्रबंधन भी उनके द्वारा किया जाए, साथ ही उन्हें ये बताया जाए कि किस प्रकार वे उस खाते को सूझबूझ से जारी रख सकते हैं।

हम अपने बच्चों से हर तरह की बात करते हैं। उनकी पढ़ाई, मित्रों, स्वास्थ्य व उनके भविष्य के बारे में बातें होती हैं, किंतु धन के बारे में बात करने से बचते हैं। यहां ये वजह नहीं कि हमें इस विषय में फिक्र नहीं होती, बल्कि हमारा ये विश्वास रहा है कि धन बड़ों का विषय है। बच्चों के लिए वे अत्यधिक जटिल और संवेदनशील विषय हो जाएगा। हम बच्चों को वित्तीय संवादों से उसी प्रकार दूर रखते हैं, जिस प्रकार पीढ़ी दर पीढ़ी होता आया था। फलस्वरूप जब वे वयस्क होते हैं तो ऐसे विषयों के लिए तैयार नहीं होते। धन की भाषा को समझने के लिए अन्य लोगों पर निर्भर होते हैं, क्योंकि उसके विषय में हमें बचपन में कभी बताया ही नहीं गया।

जो बच्चा म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट को देखते हुए बड़ा होता है, उसके विषय में सवाल करता है कि कैसे धन बढ़ता है, जिसे बताया जाता है कि उसके जन्मदिन पर मिला शगुन कई साल में किस प्रकार एक बड़ी राशि में बदल जाता है, ये सब भी जरूरी हैं। ये न सोचें कि इन बातों से उसका बचपन खो जाएगा और वो बच्चा एकाएक बड़ा हो जाएगा। दसअसल धन के विषय में ये बातें क्लासरूम में नहीं सिखाई जा सकतीं। घर पर सामान्य बातचीत के दौरान समय के साथ ही ये समझदारी विकसित होती है।

इसकी शुरुआत कुछ इस तरह करें। संतान के नाम पर सीधे म्यूचुअल फंड अकाउंट खोल सकती हैं। अवयस्क संतान का स्वतंत्र खाता नहीं हो सकता, पर अभिभावक, माता अथवा पिता के संरक्षण में ये खाता शुरू किया जा सकता है। बच्चे के 18 वर्ष आयु पूरी करने तक ये खाता अभिभावक द्वारा ही संचालित किया जाएगा। वयस्क होने पर खाताधारक को नए सिरे से केवाइसी पूरी करनी पड़ेगी। बच्चे के नाम पर खाता खोलते समय आपको अपने केवाइसी दस्तावेजों, पैन के साथ उसका बर्थ सर्टिफिकेट लगाना पड़ेगा। बहुत से बड़े निवेश प्लेटफार्म एसआइपी के माध्यम से अवयस्क के खाते को सपोर्ट करते हैं। ये प्रक्रिया आनलाइन 30 मिनट में पूरी हो जाती है।

अब बात करेंगे आंकड़ों की, जिनकी वजह से आपके सोच में परिवर्तन आएगा।

संतान जब पांच वर्ष की आयु पूरी करे तब उसके नाम पर पांच सौ रुपये की एसआइपी इंडेक्स फंड में डालें, जिसमें 12 प्रतिशत का सालाना रिटर्न मिलता हो। जब संतान 18 वर्ष की आयु पूरी करेगी तो उस खाते में कुल करीब दो लाख 40 हजार रुपये राशि जुड़ जाएगी। आप इस मद में 78 हजार रुपये का निवेश करेंगे, लेकिन साल दर साल लाभ व चक्रवृद्धि ब्याज जुड़ते हुए वो राशि बड़ी हो जाएगी। राखी और दीवाली शगुन की राशि बहुत बड़ी नहीं होती, लेकिन एक उद्देश्य लेकर चलने पर वही धन सार्थक राशि में बदल जाएगा।

यहां एक और मानक है, जो धन से अधिक मायने रखता है।
प्रत्येक तिमाही खाते का स्टेटमेंट लेकर संतान के साथ बैठें। उन्हें उसका आंकड़ा दिखाएं, ये बताएं कि इंडेक्स फंड क्या होता है- देश की बड़ी कंपनियों में किया जाने वाला ये छोटा निवेश होता है, जब कंपनियां तरक्की करती हैं तो उसमें निवेशित आपकी राशि भी बढ़ती है। उन्हें इसके विषय में प्रश्न पूछने को प्रोत्साहित करें। सबकुछ एकसाथ बताने की जल्दबाजी न दिखाएं। जब बाजार गिरता है तो धन में भी गिरावट आती है, इसका लेखा-जोखा भी उनसे न छिपाएं, बल्कि उसे सामने रखते हुए उन्हें समझाएं कि ऐसा क्यों हुआ। ये बताएं कि बाजार में उतार-चढ़ाव आएंगे, पर निवेशक को धैर्य नहीं खोना चाहिए।

जब संतान की अगली जन्मतिथि आए, तो उससे पूछें कि क्या वह शगुन की राशि को खर्च करना चाहेगी या अपने खाते में डालना पसंद करेगी। इसका निर्णय उन्हें करने दें। ये निर्णय भी अपने आप में एक सबक होगा। दस वर्ष की आयु का बच्चा यदि पांच सौ रुपये म्यूचुअल फंड में निवेश का निर्णय लेता है तो इसका अर्थ है कि उसमें ये समझ पनपने लगी है कि धन किस प्रकार बढ़ता है, उसमें समय की क्या भूमिका है। ये समझ जीवनभर उसके काम आएगी।

करीब 13 वर्ष या उससे अधिक आयु के बच्चों के लिए कई और बातें महत्वपूर्ण हो सकती हैं। कई ऐसे भारतीय एप हैं, जिन्हें खास तौर पर युवाओं के लिए डिजाइन किया गया है, जिनके माध्यम से वे वर्चुअल पोर्टफोलियो में निवेश के बारे में सीख सकते हैं, वहां बाजार भाव वास्तविक होता है, लेकिन असल धन दांव पर नहीं लगता। वहां किशोर पोर्टफोलियो बना सकते हैं, तिमाही फायदों के साथ उसे बढ़ता देख सकते हैं। बाजार भाव में उतार-चढ़ाव से वर्चुअल पोर्टफोलियो में भी बढ़त और गिरावट दिखाई देगी। इससे वे समझ सकेंगे कि इक्विटी बाजार किस प्रकार काम करता है, पर यहां वास्तविक धन गंवाने का कोई जोखिम नहीं होगा। इसी के साथ उनके नाम पर एक वास्तविक म्यूचुअल फंड अकाउंट खोल सकते हैं। 15 साल या समकक्ष आयु की संतान के लिए ये एक ऐसा उपहार होगा जो बहुत से वयस्कों के पास भी नहीं होता। वे सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों जानकारी से समृद्ध होंगे।

टैक्स को लेकर भी व्यावहारिक बात समझनी चाहिए। अवयस्क संतान के म्यूचुअल फंड खाते में जो लाभ होता है उसे अभिभावक की आय में जोड़कर टैक्स की देयता बनती है। इसमें प्रति संतान खाते पर 1500 रुपये की सालाना टैक्स में छूट मिलती है। हालांकि बहुत से परिवार संतान के लिए दीर्घकालिक निवेश करते हैं, जिसके फायदों की तुलना में प्राय: टैक्स का बोझ पीछे छूट जाता है।

अकाउंट तो बस शुरुआत है। उसके इर्द-गिर्द जो संवाद होता है वो वास्तव में अधिक मायने रखता है। हम बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाते हैं, विनम्रता और दयालु होने की सीख देते हैं। इसी प्रकार उन्हें धन के विषय में समझाना, उसके प्रबंधन के बारे में जानकारी देना भी महत्वपूर्ण है। अन्य प्रकार के सबकों की तुलना में ये विषय ऐसा है, जिसमें चक्रवृद्धि बढ़ोत्तरी होती है।

राखी का लिफाफा मिला ही हो। शगुन टेबल पर सामने रखा हो। वो धनराशि एक हफ्ते में खत्म हो जाए, उससे पहले ही खाता खोलें। संतान को इस प्रक्रिया को करीब से देखने का अवसर दें। उसे बताएं कि इसके पीछे वजह क्या है। ये संवाद किसी धन से अधिक महत्वपूर्ण होगा। वास्तव में सच्चा उपहार तो यही है।
यह कॉलम केवल शैक्षिक एवं वित्तीय जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।
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