शादी हो या कोई त्योहार, अच्छे गहने पूरे लुक को खास बना देते हैं, लेकिन अगर आप कुंदन जैसी दिखने वाली ज्वेलरी पहनना चाहती हैं और ज्यादा पैसे भी खर्च नहीं करना चाहतीं, तो गुजरात की पच्चीकम ज्वेलरी ट्राई कर सकती हैं। इस ज्वेलरी की खास बात है कि इसे मशीनों के बजाय हाथों से तैयार किया जाता है।
चांदी और रंग-बिरंगे पत्थरों से बनी ये ज्वेलरी दिखने में भी बहुत खूबसूरत लगती है। इसका रिश्ता गुजरात के कच्छ से है और कहानी भी इसकी सदियों पुरानी है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि आखिर पच्चीकम ज्वेलरी क्या है और इसकी खासियत क्या है? आइए जानते हैं-
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क्या है पच्चीकम ज्वेलरी?
पच्चीकम गुजरात के कच्छ इलाके की पुरानी गहने बनाने की कला है। इसमें चांदी के ढांचे में स्टोन को हाथ से दबाकर फिट किया जाता है। इसी तरीके से इन गहनों को खास लुक मिलता है। हर ज्वेलरी को बनाने में कारीगर की काफी मेहनत लगती है। खास बात तो यह है कि इनके डिजाइन भी एक-दूसरे से अलग होते हैं।
16वीं सदी से जुड़ी है पच्चीकम ज्वेलरी की कहानी
बताया जाता है कि इस कला की शुरुआत करीब 16वीं शताब्दी में कच्छ में हुई थी। पुराने समय में ऐसे गहने राजघरानों में पहने जाते थे। राजा-महारानी इन्हें खास मौकों पर पहनते थे। धीरे-धीरे यह हुनर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता गया और आज भी कच्छ के कारीगर इस ज्वेलरी को बनाने का काम करते हैं।
किन चीजों से बनते हैं ये गहने?
आपको बता दें कि पच्चीकम ज्वेलरी में खासतौर से चांदी और अलग-अलग रंगों के स्टोन यानी कि पत्थरों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कई तरह के कीमती और कम कीमती वाले पत्थर लगाए जाते हैं। जैसे-
- हीरा और पन्ना: गहनों को खास लुक देने के लिए।
- माणिक और फिरोजा: रंगों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए।
- एमेथिस्ट: अपने अलग रंग के लिए इस्तेमाल होने वाला पत्थर।
फैशन की दुनिया में भी है पच्चीकम ज्वेलरी की जगह
पच्चीकम ज्वेलरी अब सिर्फ ट्रेडिशनल कपड़ों के साथ ही नहीं पहनी जाती है बल्कि इसकी डिजाइन अब तरह के आउटफिट पर मैच कर जाती है।
- साड़ी और लहंगे के साथ: शादी या त्योहार में इसे पहन सकती हैं।
- इंडो-वेस्टर्न कपड़ों के साथ: यह गहने आपके लुक को अलग अंदाज दे सकते हैं।
- जींस और ड्रेस के साथ: छोटे पेंडेंट या ईयररिंग्स से स्टाइलिश लुक पा सकती हैं।
- ऑक्सीडाइज्ड चांदी वाले डिजाइन: ये गहने पुराने जमाने जैसा लुक पसंद करने वालों को अच्छे लगेंगे।
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