यदि आप भी नियमित रूप से इयरफोन या हेडफोन का उपयोग करते हैं, तो आपको थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। दरअसल, व्यक्ति के कान एक निश्चित डेसिबल (ध्वनि की तीव्रता मापने का पैमाना) तक की आवाज को ही सहन कर सकते हैं। कुछ लोगों को बहुत तेज संगीत सुनने की आदत होती है, जिससे भविष्य में उनकी सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, पूरी दुनिया में हाई वॉल्यूम पर म्यूजिक सुनने की वजह से लोगों की सुनने की शक्ति कमजोर हो रही है। बता दें कि लगातार तेज आवाज के संपर्क में रहने से कान के पर्दे और नसों में दर्द हो सकता है। अगर आप नियमित रूप से हेडफोन, इयरफोन या इयरबड्स जैसे गैजेट्स का उपयोग करते हैं, तो आपको अभी से सावधानी बरतनी चाहिए। इसके लिए हमने डॉ. अमिताभ मल्लिक (एचओडी, ईएनटी विभाग, पारस हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम) से भी बात की है। जानते हैं आगे...
कम रखें वॉल्यूम
यदि आपको तेज वॉल्यूम पर म्यूजिक सुनने या ओटीटी पर फिल्में देखने की आदत है, तो इसे अभी से सुधारने की कोशिश करें, अन्यथा इससे आपकी सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इस समस्या से बचने के लिए हेडफोन, इयर प्लग या इयरबड्स के उपयोग के दौरान वॉल्यूम कम रखें। घर पर टीवी देखते समय भी साउंडबार की वॉल्यूम नियंत्रित रखें। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध के अनुसार, लगभग 80 डेसिबल तक के शोर को करीब 20 घंटे तक बर्दाश्त किया जा सकता है। ध्वनि का स्तर 60 से 85 डेसिबल के बीच रखना कानों के लिए सुरक्षित माना जाता है। 85 डेसिबल से अधिक तेज ध्वनि के संपर्क में आने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, इसलिए हमेशा वॉल्यूम नियंत्रित रखने की आदत बनाएं।
नॉइज कैंसिलेशन हेडफोन
बाहरी शोर को दबाने के लिए हेडफोन का वॉल्यूम बढ़ा देना धीरे-धीरे आपकी सुनने की क्षमता को कम कर सकता है। ऐसे में वॉल्यूम बढ़ाने के बजाय नॉइज कैंसिलेशन वाले हेडफोन का उपयोग करना अधिक फायदेमंद होता है। ऐसे हेडफोन की खासियत यह होती है कि इनसे बाहरी आवाजें कानों तक नहीं पहुंचतीं, जिससे म्यूजिक सुनने में कोई बाधा नहीं आती। हालांकि, ड्राइविंग करते समय या सड़क पर पैदल चलते समय इनका उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि बाहरी आवाज न सुनाई देने के कारण दुर्घटना हो सकती है।
इयरबड से बेहतर हैं हेडफोन
कुछ लोग इयरबड्स और हेडफोन के अंतर को नहीं समझ पाते। इयरबड्स आकार में बहुत छोटे होते हैं और कान के भीतर अच्छी तरह फिट हो जाते हैं। ये आमतौर पर सिलिकॉन या कठोर प्लास्टिक से बने होते हैं। इयरबड्स का डिजाइन ध्वनि को इयरड्रम के बहुत करीब ले जाता है, जिससे साउंडवेव सीधे पर्दे तक पहुंचती है और बहुत तेज आवाज सुनाई देती है, जो कानों के लिए नुकसानदेह है।
दूसरी ओर, हेडफोन को कानों के बाहरी हिस्से पर ऊपर से लगाया जाता है और यह पूरे कान को कवर करता है। इसका डिजाइन अवांछित आवाज को ब्लॉक करने में मददगार होता है। ओवर-द-इयर हेडफोन कानों को पूरी तरह कवर करके बाहरी शोर को काफी हद तक नियंत्रित करते हैं।
थोड़ा ब्रेक भी है जरूरी
संगीत सुनना अच्छी आदत है और इससे तनाव भी दूर होता है, लेकिन किसी भी चीज की अति नुकसानदेह होती है। अगर आप लगातार तेज म्यूजिक सुनते हैं, तो हर आधे घंटे के बाद 5 मिनट का या एक घंटे के बाद 10 मिनट का ब्रेक जरूर लें।
तय करें वॉल्यूम की सीमा
कुछ डिवाइस की सेटिंग्स में कस्टम वॉल्यूम अपनी जरूरत के हिसाब से सेट करने की सुविधा होती है। यह पता लगाने के लिए कि आप वॉल्यूम की क्या सीमा निर्धारित कर सकते हैं, अपने डिवाइस की सेटिंग या यूजर मैनुअल की जांच करें। अधिकतर स्मार्टफोन में अधिकतम वॉल्यूम की सीमा तय करने का विकल्प होता है। यदि आप आवाज ज्यादा बढ़ाने का प्रयास करते हैं, तो फोन पर एक पॉप-अप मैसेज आता है कि इस सीमा से अधिक वॉल्यूम आपके कानों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
रखें इन बातों का ध्यान
अपने डिवाइस का वॉल्यूम 60 से 80 डीबी (dB) के बीच रखें। 85 डीबी से अधिक की आवाज को देर तक सुनना नुकसानदेह होता है।
- लगातार इयरफोन का उपयोग करने से बचें, खासतौर पर रात को सोने से पहले। 8 घंटे से अधिक समय तक 80 डीबी से ज्यादा वॉल्यूम पर डिवाइस का उपयोग करना कानों को नुकसान पहुंचा सकता है।
- अपने इयरफोन को नियमित रूप से साफ करते रहें, क्योंकि धूल और गंदगी से कानों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
- नियमित रूप से ब्रेक लेकर अपने कानों को तेज शोर के प्रभाव से बचाएं।
लेखक: अमित निधि
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