देश जैसे-जैसे विकास कर रहा है, इससे तमाम क्षेत्रों में जॉब्स के अवसर भी बढ़ रहे हैं। नौकरीडॉटकाम जैसे जॉब पोर्टल का उदाहरण हमारे सामने है, जहां पर आपको विभिन्न तरह की नौकरियों की ओपनिंग देखने को मिल जाएंगी, लेकिन सवाल यह है कि क्या हम इन नौकरियों के लिए उपयुक्त हैं। अक्सर कहा जाता है कि आजकल देश में बेरोजगारी बहुत है। बड़ी संख्या में पढ़े-लिखे युवा बेरोजगार हैं, लेकिन यह स्किल गैप की वजह से है। आज नौकरियों की कमी नहीं है। कमी स्किल्ड लोगों की है। ऐसे में अगर आप पढ़ाई कर रही हैं तो कुछ ऐसे स्किल सीखने के लिए आगे आएं, जो नौकरी दिलाने में मददगार हों। इनके बारे में हमें करियर कंसल्टेंटविवेक कुमार सिंह बता रहे हैं।
डिग्री पर भारी ये जॉब स्किल्स
वर्कइंडिया की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में ब्लू कालर नौकरियों के लिए नियोक्ता अब डिग्री के बजाय हैंड्स ऑन स्किल्स को अधिक महत्व दे रहे हैं। ऐसे में अगर आप इलेक्ट्रिशियन, प्लंबिंग, फ्रिज/एसी टेक्निशियन, वेल्डर या कारपेंटर जैसे कौशल में हैंड्स ऑन स्किल रखते हैं, इनकी व्यावहारिक स्किल रखते हैं तो आराम से नौकरी के अवसर पा सकते हैं, भले ही आप 10वीं पास ही क्यों न हों। सबसे अच्छी बात है कि इस तरह की हैंड्स ऑन स्किल रखने वाले युवाओं को देश में ही नहीं, विदेश में भी जॉब के मौके मिल सकते हैं। ये स्किल्स आप ऐसे आइटीआइ से सीख सकते हैं, जहां केवल किताबी नहीं, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी जाती है, क्योंकि ये ऐसे स्किल हैं, जिन्हें कोई नॉर्मल ग्रेजुएट युवा नहीं कर सकता है, जब तक कि उसके पास इसकी स्किलिंग न हो। यही वजह है कि तमाम कंपनियों के नियोक्ता अब हाथ का कौशल रखने वाले युवाओं को नौकरी देने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं।
एआइ की स्किलिंग
आज के समय में इंडस्ट्री में जो बदलाव हो रहे हैं, उसके चलते आज दुनियाभर में एआइ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। एआइ के भी दो पार्ट हैं। एक पार्ट है, जहां एआइ को डेवलप किया जाता है, जबकि दूसरा पार्ट एप्लिकेशन है, जिसका हम उपयोग करते हैं। डेवलपमेंट में कोडिंग की जरूरत होती है, जहां पाइथन जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज इस्तेमाल होती है। इसे मल्टी लैंग्वेज भी कहते हैं। युवा यदि डेवलपमेंट कोडिंग में अपनी स्किलिंग बढ़ाएं तो यहां उनके लिए जॉब के अवसर बहुत हैं। यदि टेक बैकग्राउंड से नहीं हैं तो ऐसे में एआइ के जितने मॉडल हैं, उन्हें आपको इस्तेमाल करना आना चाहिए।
ये एआइ की दो तरह की स्किल हैं, जिसमें आने वाले दिनों में बहुत जॉब्स देखने को मिलेंगे। आने वाले समय में एआइ हर चीज में इस्तेमाल होने लगेगा। यह हमारे दिनचर्या की चीजों में भी इस्तेमाल होगा। ऐसे में अभी आप चाहे जिस कोर्स की पढ़ाई कर रहे हों, एआइ को इस्तेमाल करने की स्किल आपको जरूर सीख लेनी चाहिए। माना कि एआइ के कारण बहुत-सी नौकरियों पर इसका असर पड़ेगा, लेकिन इस नई तकनीक की वजह से बहुत-सी अलग तरह की नई नौकरियां भी सामने आएंगी। एआइ से जुड़ा कोर्स आप ऑनलाइन माध्यम से भी कर सकते हैं। गूगल पर आपको ऐसे संस्थान मिल जाएंगे, जो एआइ से संबंधित तीन महीने/छह महीने की अवधि के सर्टिफिकेट कोर्सेस करा रहे हैं, लेकिन ऑनलाइन माध्यम से जहां से भी यह कोर्स करें, पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच-परख जरूर करें, उसका रिव्यू देखें।
साइबर सिक्योरिटी की मांग
साइबर सिक्योरिटी आज भी ऐसा क्षेत्र है, जहां जॉब के बहुत अवसर उपलब्ध हैं। जैसे-जैसे हर चीज का डिजिटाइजेशन हो रहा है, इस तरह के तकनीकी कौशल वाले प्रोफेशनल्स की मांग भी बढ़ रही है, क्योंकि अब सभी ऑफिस के कागजात या रिकॉर्ड ऑनलाइन ही मेंटेन हो रहे हैं। लॉकर या स्टोर रूम में सुरक्षित रखे जाने वाले डॉक्यूमेंट्स अब साइबर सिक्योरिटी के हवाले हैं। ऐसे में जाहिर है इस तकनीकी कौशल की मांग आने वाले दिनों में भी रहने वाली है। इन दिनों साइबर सिक्योरिटी एंड एथिकल हैकिंग के नाम से कई सारे संस्थान ये कोर्स करा रहे हैं। इसका बेसिक कोर्स 12वीं के बाद कर सकती हैं।
नर्सिंग/पैरामेडिकल में जॉब्स
विभिन्न हॉस्पिटल्स और नए-नए खुल रहे कॉरपोरेट हॉस्पिटल्स में अभी नर्सिंग और पैरामेडिकल के बहुत जॉब देखे जा रहे हैं। हेल्थकेयर के इस क्षेत्र में सेहत के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण आने वाले वर्षों में भी इस तरह के जॉब्स की बहुत मांग रहने वाली है। आप भी नर्सिंग या पैरामेडिकल कोर्स की पढ़ाई करके तुरंत नौकरी के लायक बन सकते हैं, क्योंकि मेडिकल की आने वाली बड़ी-बड़ी मशीनों को चलाने और उनकी देखरेख के लिए ये लोग काफी प्रशिक्षित होते हैं। नर्सिंग में अंडरग्रेजुएट कोर्स करने के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी व इंग्लिश विषय से 12वीं होना चाहिए। वहीं, अगर आप जनरल नर्सिंग ऐंड मिडवाइफरी (जीएनएम), एग्जिलरी नर्स मिडवाइफरी (एएनएम) जैसे कोर्स करना चाहते हैं तो यह भी 12वीं के बाद किया जा सकता है।
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जीएनएम तीन वर्ष की अवधि का कोर्स है, जबकि एएनएम कोर्स की अवधि दो वर्ष है। पैरामेडिकल में आप अपनी रुचि के अनुसार मेडिकल लैब टेक्निशियन, एक्स-रे टेक्निशियन, एमआरआइ टेक्निशियन, सीटी स्कैन टेक्निशियन, डायलिसिस टेक्निशियन, ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट, नर्सिंग केयर असिस्टेंट, ईसीजी असिस्टेंट, एंबुलेंस अटेंडेंट जैसा कोई भी कोर्स कर सकते हैं। पैरामेडिकल के ये कोर्स 10वीं या 12वीं के बाद किए जा सकते हैं। देश के विभिन्न संस्थानों में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा तथा डिग्री के रूप में ये कोर्स उपलब्ध हैं। सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा की अवधि छह महीने से लेकर दो साल तक की होती है। डिप्लोमा और अंडरग्रेजुएट जैसे कोर्स के लिए बायोलॉजी से 12वीं होना जरूरी है।
हॉस्पिटैलिटी में बढ़ते अवसर
इन दिनों हॉस्पिटैलिटी में खासकर बड़े-बड़े होटल, रेस्टोरेंट, रिसार्ट, कू्रज या एयरलाइंस में काम करने वालों की मांग धीरे-धीरे बहुत बढ़ रही है। आप भी 12वीं के बाद इससे संबंधित कोर्स कर सकती हैं।
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सेल्स की सदाबहार फील्ड
सेल्स को सदाबहार फील्ड माना जाता है। सेल्स आज के समय में भी ऐसी स्किल है, जिसमें सबसे अधिक जॉब उपलब्ध हैं, क्योंकि हर तरह की बिजनेस कंपनियों को ऐसे लोग चाहिए, जो उत्पाद या सेवाओं की सेल्स में कुशल हैं। सेल्स एवं मार्केटिंग में संबंधित कोर्स करके आप भी अपने लिए अवसर बढ़ा सकती हैं।
अकाउंट एंड फाइनेंस
इन दिनों सारे काम सॉफ्टवेयर पर होने के कारण अकाउंट एंड फाइनेंस में बहुत नौकरियां हैं, लेकिन यह ट्रेनिंग से जुड़ा क्षेत्र है। इससे संबंधित सॉफ्टवेयर सीखकर आप इस क्षेत्र में अपने लिए अवसर बढ़ा सकती हैं।
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