पितृ पक्ष में हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। 16 दिनों तक मनाए जाने वाले पितृ पक्ष पितरों की तृप्ति और उनकी आत्मा की शांति के लिए समर्पित होता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान हमारे पूर्वज किसी न किसी रूप में भोजन ग्रहण करने के लिए धरती पर आते हैं। ऐसे में श्राद्ध पक्ष के दौरान भोजन, खान-पान और रसोई की पवित्रता या शुद्धता का खास ध्यान रखा जाता है। इस काल में क्या खाना चाहिए, क्या नहीं और भोजन बनाते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए? आज का यह लेख श्राद्ध के दौरान क्या बनाएं और क्या नहीं इस विषय पर आधारित है।

श्राद्ध के भोजन में क्या बनाएं?

श्राद्ध का भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिए, जिसमें प्याज और लहसुन का बिल्कुल इस्तेमाल न हो। साथ ही नीचे जानें खाने में क्या-क्या बना सकती हैं?

  • श्राद्ध की थाली में मुख्य रूप से खीर (विशेषकर चावल और मखाने की), पूड़ी या कचौड़ी, और उड़द या मूंग की दाल को शामिल किया जाना चाहिए।
  • मौसमी और सात्विक सब्जियों का ही प्रयोग करें। कद्दू या सीताफल, जिमीकंद या सूरन, तरोई, अरबी, और कच्चे केले की सब्जी श्राद्ध में बहुत शुभ मानी जाती है।
  • गेहूं के आटे की सात्विक रोटियां और चावल विशेषकर खीर के साथ) बनाए जाते हैं।
  • भोजन को शुद्ध देसी घी में ही बनाएं। इसके अलावा, भोजन में गुड़ का होना भी बहुत जरूरी माना जाता है, क्योंकि पितरों को गुड़ का भोग प्रिय होता है।

श्राद्ध के भोजन में क्या न बनाएं?

पितृ पक्ष में कुछ चीजों को खाना और बनाना पूरी तरह वर्जित माना गया है, क्योंकि इन्हें तामसिक श्रेणी में रखा जाता है।

  • श्राद्ध के पूरे दिनों में भूलकर भी खाने में प्याज, लहसुन या हींग का प्रयोग न करें। भोजन पूरी तरह निरामिष होना चाहिए।
  • मांस, मछली, अंडे, और किसी भी प्रकार के नशे या मांसाहारी वस्तु का सेवन और प्रयोग सख्त वर्जित है। बासी या पहले का रखा हुआ खाना भी पितरों को न दें।
  • श्राद्ध के खाने में मसूर की दाल, चना दाल, काली उड़द, बैंगन, मूली, गाजर, और बासी या कटे हुए फल शामिल नहीं किए जाते हैं।
  • भोजन में काले नमक का प्रयोग वर्जित माना जाता है। इसके अलावा, पैकेटबंद या डिब्बाबंद चीजों का इस्तेमाल करने से बचें।

पितृ पक्ष में भोजन की शुद्धता का रखते हैं विशेष ध्यान

श्राद्ध कर्म या पितृ पक्ष के दिनों में रसोई घर की पवित्रता और भोजन की शुद्धता का विशेष महत्व माना गया है। इस दौरान घर में पूरी तरह से सात्विक माहौल बनाए रखना चाहिए। नीचे प्वाइंट में जानें-

  • भोजन बनाने वाले व्यक्ति को स्नान करने के बाद पूरी तरह से शुद्ध होकर ही रसोई में प्रवेश करना चाहिए।
  • सबसे पहले बना हुआ भोजन भगवान को और पितरों को समर्पित किया जाता है, जिसे 'भोग' कहा जाता है।
  • इसके बाद भोजन का एक हिस्सा गाय, कुत्ते, कौवे और चींटियों के लिए निकाला जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इन जीवों के माध्यम से भोजन सीधे हमारे पितरों तक पहुंचता है।
  • इस दौरान परिवार के सभी सदस्यों को शांत मन और श्रद्धा भाव से सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।

श्राद्ध का भोजन बनाते समय पूरी पवित्रता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। खाना बनाने वाले व्यक्ति को स्नान करके साफ कपड़े पहनने चाहिए और भोजन बनाते समय मन में पूर्वजों का स्मरण करना चाहिए। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार पर उनका आशीर्वाद हमेशा बना रहता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। श्राद्ध पूजा और थाली से जुड़े नियमों के लिए अपने परिवार के बुजुर्गों या पंडित जी की सलाह जरूर लें। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Image Credit- ai