Mahalakshmi Vrat Paran Bhog: हिंदू धर्म में महालक्ष्मी व्रत का विशेष महत्व है, जो माता लक्ष्मी को समर्पित है। यह व्रत मुख्य रूप से भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि तक यानी कुल 16 दिनों तक रखा जाता है। इस दौरान माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। आज इस व्रत का समापन यानी पारण है। पारण के दिन किन चीजों का सेवन करना चाहिए और पारंपरिक रूप से क्या भोग लगाना चाहिए, इसकी सही जानकारी होना बहुत जरूरी है, जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

महालक्ष्मी व्रत पारण में क्या चीज खाना चाहिए?

महालक्ष्मी व्रत का समापन नियमों के अनुसार करना उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है जितना कि व्रत रखना। पारण के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद माता लक्ष्मी की पुनः पूजा की जाती है और उन्हें विशेष भोग अर्पित किया जाता है। इसके बाद ही व्रती अपना उपवास खोलते हैं।

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भोग

 महत्व चावल और मखाने की खीर माता लक्ष्मी को सबसे प्रिय भोग, जिसे प्रसाद रूप में खाया जाता है।  पंचामृत  दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बना, जिससे व्रत खोला जाता है।  ताजे फल  केला, अनार, सेब आदि सात्विक फल जो ऊर्जा प्रदान करते हैं।  पूरी और हलवा  कई परिवारों में गेहूं के आटे की सात्विक पूरी और सूजी का हलवा बनता है।  मखाना और काजू-किशमिश  मेवे जिन्हें भोग में अर्पित कर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

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महालक्ष्मी व्रत के पारण में क्या खाएं?

महालक्ष्मी व्रत का पारण करते समय खान-पान में सात्विकता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस दिन लहसुन, प्याज या तामसिक भोजन का सेवन बिल्कुल नहीं किया जाता है।

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  • माता लक्ष्मी को खीर अत्यंत प्रिय है। पारण के दिन चावल और दूध से बनी सात्विक खीर का भोग लगाया जाता है और इसी को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
  • कई लोग चावल की जगह मखाने, साबूदाना या मखाने-मेवे की खीर बनाकर भी पारण करते हैं, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत उत्तम मानी जाती है।
  • व्रत खोलने से पहले चरणामृत या पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर और शहद का मिश्रण) का सेवन करना बेहद शुभ माना जाता है।
  • ताजे फल जैसे केला, सेब, अनार और घर की बनी शुद्ध मिठाई या पूरी-चने का प्रसाद भी पारण के समय खाया जा सकता है।

महालक्ष्मी व्रत के पारण में क्या नहीं खाना चाहिए?

महालक्ष्मी व्रत का पारण करते समय भूलकर भी तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज, मांसाहारी चीजें और अंडे का सेवन नहीं करना चाहिए। पारण के भोजन में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग करना ज्यादा उत्तम माना जाता है या फिर बिना नमक की सात्विक चीजें जैसे खीर, फल और पूरी-हलवा खानी चाहिए। व्रत खोलने के तुरंत बाद बहुत भारी, मसालेदार या तली-भुनी चीजें खाने से बचें, क्योंकि इससे पेट खराब हो सकता है। सात्विक और हल्का आहार ही माता को प्रिय है।

पारण के समय ध्यान रखने योग्य जरूरी बातें

महालक्ष्मी व्रत का पारण करते समय कुछ नियमों का पालन करना बहुत आवश्यक है। पारण हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए। पारण करने से पहले किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को भोजन कराना और दान देना इस व्रत का एक अहम हिस्सा माना जाता है। इसके बाद परिवार के सभी सदस्यों के साथ बैठकर माता का प्रसाद ग्रहण करना चाहिए और माता लक्ष्मी से सुख-शांति की प्रार्थना करनी चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। महालक्ष्मी व्रत के खान-पान से जुड़े नियमों के लिए अपने परिवार के बुजुर्गों या पंडित जी की सलाह जरूर लें। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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