लता मंगेशकर अगर आज हमारे बीच होतीं, तो अपना 97वां जन्मदिन मना रही होतीं। लेजेंडरी सिंगर लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को हुआ था। उनकी जादुई आवाज ने न जाने कितने गानों को सुपरहिट कराया। उनकी आवाज का जादू कुछ ऐसा था कि उनके गाए गाने आज भी फैंस के दिलों में बसते हैं। उन्होंने दशकों तक अपनी मखमली आवाज से फैंस का दिल जीता और आज भी उनके गाए गाने हमारी रूह में बसते हैं। भारतीय सिनेमा में उनका योदगान बेमिसाल रहा और उनके पूरे करियर में उन्हें कई सम्मान भी मिले। क्या आपको पता है कि करियर की शुरुआत में उन्हें 'पतली आवाज' के कारण रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था। उनके पहले हिट गाने की रिकॉर्डिंग से जुड़ा किस्सा भी काफी खास है। चलिए आपको सुनाते हैं ये दिलचस्प किस्से।

पतली आवाज की वजह से लता मंगेशकर को कर दिया गया था रिजेक्ट

लता मंगेशकर ने खुद एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि करियर की शुरुआत में उन्हें कुछ डायरेक्टर्स ने यह कहकर रिजेक्ट कर दिया था कि उनकी आवाज बहुत पतली है। लता मंगेशकर ने यह किस्सा सुनाते हुए कहा था, "एस. मुखर्जी साहब जो फिल्मीस्तान के मालिक थे, उन्होंने मेरी आवाज को पतली कहकर रिजेक्ट कर दिया था। उस वक्त फिल्म 'शहीद' बन रही थी...इसका म्यूजिक मास्टर गुलाम हैदर साहब ने दिया था...उन्होंने मेरी आवाज सुनकर कहा था कि मैं तुम्हारे साथ गाना रिकॉर्ड करना चाहता हूं...उन्होंने कहा कि तुम वही गाना गाओ, 'बुलबुल मत रो यहां...।' मैं तो नूरजहां की फैन थी, मैंने शिद्दत से वो गाना गाया, लेकिन मेरी आवाज सुनकर मुखर्जी साहब ने कहा कि यह आवाज बहुत पतली है और उनकी हीरोइन को सूट नहीं करेगी। उस फिल्म में कामिनी कौशल हीरोइन थीं और युसूफ भाई (दिलीप कुमार) हीरो थे।"

ऐसे की थी पहले हिट गाने की रिकॉर्डिंग

फिल्म 'महल' के लिए लता मंगेशकर का गाना 'आएगा आने वाला' खूब मशहूर हुआ था। इस गाने की रिकॉर्डिंग से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा लता मंगेशकर ने खुद एक इंटरव्यू के दौरान शेयर किया था। उन्होंने बताया था, "जब मैं 'आएगा आने वाला...' गाने की रिकॉर्डिंग कर रही थी, तो वहां अशोक कुमार और एक पारसी सज्जन मौजूद थे...अशोक कुमार तो कुछ नहीं बोलते थे, लेकिन वो पारसी सज्जन कहते थे कि गाना ऐसा चाहिए..वैसा चाहिए। डायरेक्टर कमाल अमरोही ने मुझे माइक से थोड़ा दूर खड़ा किया था, क्योंकि उस वक्त एको नहीं था। मैं पहले दूर से शुरुआत का शेर पढ़ती और फिर माईक के पास पहुंचती और गाना शुरू करती। ऐसा कई बार करना पड़ा क्योंकि हर बार यही कहा जाता कि रिकॉर्डिंग ठीक नहीं हो रही है। मैं फिर वापस जाती और फिर गाते हुए आगे आती। यह सिलसिला काफी वक्त तक चला और आखिर में जब रिकॉर्डिंग सही हो गई और मैं स्टूडियो से बाहर निकली, तो मुझे चैन आया।"

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