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Yogini Ekadashi 2022: योगिनी एकादशी में करें इस व्रत कथा का पाठ, पूजा का मिलेगा संपूर्ण फल

योगिनी एकादशी का व्रत हिन्दुओं में विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इस व्रत की कथा सुनने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।  
Published -23 Jun 2022, 13:35 ISTUpdated -23 Jun 2022, 13:57 IST
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  • Samvida Tiwari
  • Editorial
  • Published -23 Jun 2022, 13:35 ISTUpdated -23 Jun 2022, 13:57 IST
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yogini ekadashi katha and significance by expert

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। पूरे साल में 12 एकादशी तिथियां होती हैं जो पूरी तरह से भगवान विष्णु को समर्पित होती हैं। प्रत्येक एकादशी  तिथि में लोग भगवान की पूजा पूरे श्रद्धा भाव से करते हैं और व्रत रखने वाले कथा का पाठ करके ही पूजा का समापन करते हैं।

एकादशी तिथियों में से एक प्रमुख है आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष का योगिनी एकादशी। इस साल यह व्रत 24 जून, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा और इस दिन विशेष पूजा का विधान बताया गया है जिससे घर की सुख समृद्धि बनी रहे। ऐसा माना जाता है कि यह व्रत तभी पूर्ण माना जाता है जब व्रत कथा का पाठ किया जाता है। आइए ज्योतिर्विद पं रमेश भोजराज द्विवेदी जी से जानें योगिनी एकादशी में आपको कौन सी कथा का पाठ करना चाहिए जिससे पूजा का संपूर्ण फल मिलने के साथ शुभ फलों की प्राप्ति हो सके।

योगिनी एकादशी में क्या करें

puja in yogini ekadashi

  • इस दिन व्रत रखने वाले लोग प्रातः जल्दी उठकर साफ़ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को भी साफ़ करें।
  • विष्णु जी का पूजन पूरे सच्चे ह्रदय से करें और पूजा स्थान पर आसान बिछाकर बैठें और व्रत का संकल्प लें।
  • पूजन के समय व्रत कथा का पाठ करें और कथा के समापन पर विष्णु जी की आरती करके प्रसाद वितरण करें।

योगिनी एकादशी व्रत कथा

yogini ekadashi katha significance

योगिनी एकादशी की कथा के अनुसार महाभारत काल के समय में धर्मराज युधिष्ठिर ने एक बार भगवान श्री कृष्ण से कहा कि हे त्रिलोकीनाथ आप कृपा करके आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनाएं और इसके महत्व  के बारे में बताएं। कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि हे पाण्डु पुत्र आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम योगिनी एकादशी है और इसके व्रत का पालन करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। यह व्रत इस लोक और परलोक में मोक्ष (गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र के फायदे) का मार्ग खोलने वाला होता है।

yogini ekadshi katha and puja vidhi

इस व्रत की कथा के अनुसार अलकापुरी राज्य में कुबेर नाम का एक राजा राज्य करता था। वह नित्य ही भगवान शिव की पूजा किया करता था और एक माली हेम रोज  पूजन के लिए फूल लेकर आता था। उसकी पत्नी का नाम विशालाक्षी था। एक दिन वह फूल लेकर आया, लेकिन पत्नी की सुंदरता के वशीभूत होकर पूजन के फूलों की तरफ में ध्यान न दे सका। उधर राजा पूजा के लिए फूल की प्रतीक्षा करता रहा। दोपहर तक जब माली नहीं आया, तो राजा ने सैनिकों को उसका पता लगाने को कहा।  उस समय सैनिकों ने बताया कि माली पत्नी प्रेम में विलुप्त होने की वजह से फूल की तरफ ध्यान न दे सका। सैनिकों ने उस माली को पकड़कर राजा के पास पहुंचा दिया। राजा ने गुस्सा होते हुए हेम को कोढ़ी होने का श्राप दिया और पत्नी वियोगी होने का भी श्राप दे दिया।

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श्राप के प्रभाव से माली पृथ्वी लोक पर पहुंचकर कोढ़ी हो गया और  वह भूख, प्यास से जंगल में भटकता रहा, उसने कई दुःख भोगे। एक दिन वह मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम पहुंचा और ऋषि को प्रणाम करते हुए अपने कष्टों से मुक्ति का मार्ग पूछा। ऋषि ने आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी योगिनी एकादशी का व्रत और विष्णु जी के पूजन की सलाह दी। हेम माली ने विधिपूर्वक योगिनी एकादशी व्रत और भगवान विष्णु का पूजन (भगवान विष्णु के व्रत में इन बातों का रखें ध्यान) किया। उस व्रत के प्रभाव से उसके सभी क्लेश दूर हुए और वो पुनः अपने वास्तविक रूप में आ गया। तभी ये योगिनी एकादशी व्रत को विशेष रूप से फलदायी माना जाने लगा।

योगिनी एकादशी के व्रत का जितना फल होता है उतना ही उसकी कथा का भी होता है। इसलिए पूजा को पूर्ण करने के लिए इस दिन व्रत कथा अवश्य पढ़ें और दूसरों को भी सुनाएं। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit: wallpapercave.com 

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