दशहरा पर्व असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। बंगाल में इस दिन को विजयदशमी कहते है और कई जगहों पर इसे आयुध-पूजा के नाम से भी जाना जाता है। दशहरा पर्व के बारे में पुराणों में यह मान्‍यता है कि, इस दिन भगवान राम ने सीता को रावण के चंगुल से बचाने के लिए रावण का वध किया था, इसलिए इस दिन को दशहरा के रूप में मनाया जाता है। वहीं, रावण का वध कर राम जब अयोध्या लौटे तो अयोध्या वासियों ने उनके वापस आने की खुशी में पूरे नगर में दीप जलाएं थे और श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान और उनकी सेना का भव्य स्वागत किया था। इस दिन को दिवाली के रूप में मनाया जाता है।

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मां दुर्गा से जुड़ी कहानी

दशहरा को भगवान राम द्वारा रावण का वध करने की मान्‍यता के अलावे एक अन्‍य मान्‍यता के अनुसार इस दिन मां दुर्गा ने नौ दिनों तक चले युद्ध के बाद महिषासुर का वध किया था। यही वजह है कि इस दिन मां दुर्गा की भी पूजा की जाती है। यही वजह है की पूरे देश में इसे धूम-धाम से मनाया जाता है। Navratri 9th Day: सिद्धिदात्री माता की इस तरह करें पूजा

इस साल विजयदशमी का शुभ मुहूर्त कितने बजे है

बंगाल में सप्तमी के दिन से ही दुर्गा पूजा की शुरूआत हो चुकी है और दशमी के दिन यानि आखिरी दिन मां दुर्गा की प्रतिमाओं को नदी में विसर्जित किया जाता है। वहीं, दशहरा की शुरूआत 29 सिंतबर से हुई थी और रावण दहन के साथ समाप्‍त होगी। दशहरा के दिन यानि 8 अक्‍टूबर मंगलवार को दोपहर 1:42 बजे से विजय मुहूर्त शुरू हो रहा है और यह दोपहर 2:29 बजे तक रहेगा। ऐसी मान्‍यता है कि इस मुहूर्त में किसी भी कार्य की कामना को लेकर की गई पूजा जरूर सफल होती है। यही कारण है कि इसे विजय मुहूर्त कहा जाता है। Durga Puja: दिल्ली बैठकर लेना चाहते है बंगाल का फील, तो इन 6 पंडालों में जरूर जाएं

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दशहरा पर जलेबी क्यों खाई जाती है

पूरे देश में इसे धूम-धाम से मनाने के साथ ही कुछ पंरपराए भी चली आ रही है, जैसे की कई राज्यों में दशहरा के दिन जलेबी खाने का चलन है। विजयदशमी पर लोग जलेबी जरूर खाते हैं और मेले या मार्केट से जलेबी खरीदकर घर भी ले जाते हैं। दरअसल इसके पीछे यह मान्‍यता है कि भगवान राम को शश्कुली नामक मिठाई बहुत पसंद थी और ऐसा माना जाता है कि जलेबी इसी मिठाई का रूप है।

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यही वजह है कि रावण के पुतले के दहन के बाद लोग जलेबी जरूर खाते है और अपनी खुशी को जाहिर करते है। इसी कारण दशहरे के दिन रामलीला स्थल या जहां रावण दहन हो रहा हो उस स्‍थान या मेले में जलेबी का स्टॉल जरूर मिलता है। लोग घर पर भी जलेबी बनाकर खाते है और इस उत्‍सव का आंनद उठाते है।