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    Diwak Temple Rajasthan: आखिर क्यों इस मंदिर में देवी मां को चढ़ाई जाती है हथकड़ी?

    राजस्थान में देवी माता का एक ऐसा मंदिर है जहां हथकड़ी चढ़ाई जाती है। आइये जानते हैं इसके पीछे का कारण।  
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    • Gaveshna Sharma
    • Editorial
    Updated at - 2022-11-02,17:44 IST
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    Devi Maa Ka Mandir

    Diwak Temple Rajasthan: हमारे देश में कई ऐसे मंदिर हैं जहां भगवान को अजीबो गरीब चीजें चढ़ाई जाती हैं। ऐसा ही एक मंदिर राजस्थान में भी है जहां देवी मां के मंदिर में हथकड़ी चढ़ाने की परंपरा सालों से चली आ रही है। 

    इस मंदिर में लोग हथकड़ी चढ़ाकर माता रानी से अपनी सभी मनोकामनाओं को पूरा करने की प्रार्थना करते हैं। हमारे एक्सपर्ट ज्योतिषाचार्य डॉ राधाकांत वत्स से जब हमने इस बारे में पूछा तो उन्होंने विस्तार से मंदिर में चली आ रही इस परंपरा के बारे में बताया। 

    तो चलिए जानते हैं कि कौन सा है ये मंदिर और क्यों चढ़ाई जाती है यहां देवी मां को हथकड़ी।  

    दिवाक मंदिर, राजस्थान 

    diwak temple

    राजस्थान के प्रतापगढ़ में स्थित माता रानी के इस मंदिर को दिवाक मंदिर के नाम से जाना जाता है। माता का यह मंदिर जोलर ग्राम पंचायत नाम की जगह पर स्थापित है। इस मंदिर में भक्तों की अथाह भीड़ देखने को मिलती है। जैसा कि हमने बताया कि इस मंदिर की विशेषता ही ये है कि यहां माता को हथकड़‍ियां और बेड़‍ियां भक्तों द्वारा चढ़ाई जाती हैं। 

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    क्यों चढ़ाई जाती है हथकड़ी 

    hathkadi waali mata

    दिवाक मंदिर के परिसर में करीब 200 साल पुराना एक त्रिशूल है। उसी त्रिशूल पर मां दुर्गा को हथकड़ी चढ़ाई जाती है। माना जाता है कि इस त्रिशूल पर जो ह‍थकड़‍ियां 100 साल से भी ज्‍यादा पुरानी हैं। मंदिर की मान्यत के अनुसार, यहां हथकड़ी चढ़ाने की परंपरा इसलिए निभाई जाती है ताकि लोग अपने परिजनों को जेल से छुड़ा सकें। इसके अलावा, कोर्ट कचहरी के मामलों से बचने के लिए भी लोग यहां हथकड़ी चढ़ाते हैं। 

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    कैसे हुई इसकी शुरुआत 

    hancuffs offer to devi maa

    इस मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित कथा है। माना जाता है कि जहां आज ये दिवाक मंदिर है उस जगह पर पहले घना जंगल हुआ करता था और उस समय में उस जंगल पर डाकुओं का कब्जा था। जंगल में रहने वाले डाकू माता की पूजा किया करते थे। धीरे धीरे डाकुओं द्वारा जेल की सजा से बचने एवं डाका डालने में सफल होने पर हथकड़ी चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई।बस तभी से यह परंपरा चली आ रही है और अज भी लाखों की तादाद में यहां हथकड़ी ले लेकर श्रद्धालु पहुंचते हैं। 

    तो ये थी दिवाक मंदिर में देवी माँ को हथकड़ी चढ़ाने के पीछे की कथा। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर जरूर शेयर करें और इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। आपका इस बारे में क्या ख्याल है? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। 

    Image Credit: Freepik 

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