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    'लड़के कभी रोते नहीं', 'मर्द को दर्द नहीं होता' जैसी बातें हम कब तक सिखाते रहेंगे?

    लड़कों को हम बचपन से ही इन्सेंसिटिव होना सिखाते हैं, लेकिन इसके बाद हम उनसे हमेशा ये उम्मीद करते हैं कि वो सेंसिटिव बनें। इस तरह की बातें सामाजिक तौर ...
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    Updated at - 2023-01-16,15:48 IST
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    Why men Dont Cry

    'लड़के रोते नहीं हैं', 'लड़के स्ट्रांग होते हैं,' 'मर्द को दर्द नहीं होता', 'अरे क्या लड़कियों की तरह रो रहा है?' .... कुछ याद आया? ये वो डायलॉग हैं जो अधिकतर घरों में सिखाए जाते हैं। लड़कों को बचपन से ही इन चीजों की ट्रेनिंग दी जाती है। पर क्या कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों? इमोशनल इंटेलिजेंस वैसे तो बहुत कम लोगों में होती है, लेकिन ऐसा क्यों होता है कि हम अपने घर में मौजूद लड़कों को जानबूझकर ना रोने की ट्रेनिंग देते हैं। 

    इसे एक अपवाद ही कहा जाएगा कि पुरुषों को ट्रेनिंग तो दी जाती है ना रोने की लेकिन जब वही लड़का इन्सेंसिटिव हो जाता है तो मां, बहन, पत्नी सभी को दिक्कत होती है। आज हम फुर्सत से बात करते हैं इसी राजा बेटा सिंड्रोम के बारे में जो बचपन से ही सब एक लड़के के अंदर कूट-कूटकर भर देते हैं। 

    आखिर पुरुष क्यों नहीं रोते?

    कुछ फिलोसफी की बातें हों उससे पहले हम बात कर लेते हैं साइंटिफिक कारणों की जिनकी वजह से पुरुष कम इमोशनल होते हैं। 2011 की एक स्टडी बताती है कि पुरुष महिलाओं की तुलना में बहुत कम रोते हैं। जहां एक महिला साल भर में 30 से 64 बार या इससे ज्यादा रोती है वहीं पुरुष साल भर में सिर्फ 5 से 17 बार ही रोते हैं। 

    boys and their crying issues

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    इसका सीधा सा कारण है टेस्टोस्टेरोन जो उन्हें कम इमोशनल बनाता है। ये एक साइंटिफिक फैक्ट है कि वो महिलाओं की तुलना में अपने एक्सप्रेशन से अपने इमोशन कम दिखाते हैं, लेकिन इसके अलावा उस मानसिकता का क्या जो हमारा समाज उनके अंदर डालता है। 

    बचपन से क्यों सिखाई जाती हैं इन्सेंसिटिव बातें?

    हमारे देश में राजा बेटा सिंड्रोम बहुत प्रचलित है जहां एक बच्चे को हमेशा से ये सिखाया जाता है कि तुम्हारा लड़का होना ही काफी है। 

    लड़कों का रोना बनाया जाता है अपवाद

    हम अधिकतर इस बारे में शिकायत करते हैं कि लड़के इनसेंसिटिव होते हैं। पर अगर वो सेंसिटिव होते हैं तो हम उन्हें जज करने लगते हैं। लड़कों को रोने पर रोका जाता है और बचपन से ही उन्हें कहा जाता है कि 'लड़के भी कहीं रोते हैं?' अब जब किसी बच्चे को हमेशा से ही ये सिखाया जाएगा तो फिर बड़े होकर हम अचानक ही उससे सेंसिटिव होने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? (पुरुषों को क्यों पसंद होती हैं बड़ी उम्र की महिलाएं)

    boys crying

    क्या सिर्फ लड़का होना ही उनकी काबिलियत है?

    आपने कभी ये सोचा है कि लड़कों के परिवार वाले शादी से पहले इतने भाव क्यों खाते हैं? मेरे हिसाब से इसका जवाब यही है कि उन्हें बचपन से ही ये सिखाया जाता है कि वो लड़के हैं तो उनके लिए सब कुछ ठीक है। लड़कों को हमेशा ये समझाया जाता है कि उन्हें एक ग्लास पानी भी उनकी जगह पर मिल जाएगा। उनकी अंडरवियर पहले तो मां धोएगी और बाद में उनकी पत्नी आकर ये काम करेगी। आप किसी भी मध्यमवर्गीय परिवार में जाएं तो ऐसे कई लोग मिलेंगे जो ये मानते हैं कि घरेलू काम करने से लड़कों की इज्जत घट जाती है और ये तो सिर्फ लड़कियों का ही काम है। 

    मर्द को दर्द नहीं होता

    ये अमिताभ बच्चन की फिल्म का एक डायलॉग था, लेकिन ये इतना फेमस हुआ कि आज तक ये काम कर रहा है। मर्द को दर्द नहीं होता और उसे भला क्यों ही दर्द महसूस होगा क्योंकि वो तो रो ही नहीं सकता है। पुरुषों को अपना दर्द छुपाने और किसी भी बात पर ज्यादा रिएक्ट ना करने की सलाह दी जाती है और फिर हम उनसे ये उम्मीद करते हैं कि वो हमारा दर्द समझें। 

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    दोहरी मानसिकता में कब तक जीते रहेंगे हम? 

    अब इतनी बातें करने के बाद सवाल फिर से वही है कि आखिर हम इतनी दोहरी मानसिकता क्यों रखते हैं? यहां पर उन महिलाओं की बात हो रही है जो अपने बेटों को यही सिखाती आई हैं। उस समाज की बात हो रही है जो महिला और पुरुष के लिए दोहरे मापदंड रखता है। क्या आपको ये नहीं लगता कि आप भी कहीं ना कहीं अपने बेटे को इन्सेंसिटिव बनाने की जिम्मेदार हैं? अगर आप ही अपने बच्चों में फर्क करेंगी और लड़की और लड़के को अलग-अलग बातें सिखाएंगी तो समाज पर दोष देना सही होगा क्या?  

    सोचने वाली बात है कि हम लड़कों को क्या सिखाते हैं और उनसे क्या उम्मीद करते हैं। आपकी इस मामले में क्या राय है ये हमें आर्टिकल के नीचे दिए कमेंट बॉक्स में बताएं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।  

    Image Credit: The Asianparent/ Shutterstock/ freepik 

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